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पाकिस्तान: PM इमरान खान सीनेट में विपक्षियों की ताकत कमजोर करेंगे

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान में राजनीतिक अराजकता के माहौल में इमरान सरकार उच्च सदन(सीनेट) में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इसके लिए मार्च 2021 में होने वाले उच्च सदन (सीनेट) के चुनाव एक माह पहले फरवरी में ही कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय केन्द्र सरकार ने कैबिनेट की एक बैठक में मंगलवार को लिया। बैठक
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पाकिस्तान: PM इमरान खान सीनेट में विपक्षियों की ताकत कमजोर करेंगे

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान में राजनीतिक अराजकता के माहौल में इमरान सरकार उच्च सदन(सीनेट) में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इसके लिए मार्च 2021 में होने वाले उच्च सदन (सीनेट) के चुनाव एक माह पहले फरवरी में ही कराने का निर्णय लिया है। यह निर्णय केन्द्र सरकार ने कैबिनेट की एक बैठक में मंगलवार को लिया। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री इमरान खान ने की।104 सदस्यीय सीनेट में सांसदों के रिटायर होने से 52 सीट 11 मार्च को खाली होने वाली हैं। अभी तक सीनेट में निर्णायक ताकत के रूप में विपक्षी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट बना हुआ है।

पाकिस्तान: PM इमरान खान सीनेट में विपक्षियों की ताकत कमजोर करेंगे
पाकिस्तान में राजनीतिक अराजकता के माहौल में इमरान सरकार उच्च सदन(सीनेट) में अपनी ताकत बढ़ाना चाहती है। इसके लिए मार्च 2021 में होने वाले उच्च सदन (सीनेट) के चुनाव एक माह पहले फरवरी में ही कराने का निर्णय लिया है।

ज्ञात हो कि पाकिस्तान में विपक्षी गठबंधन पीडीएम ने सरकार के खिलाफ चल रहे आंदोलन में संसद से सामूहिक इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। इमरान सरकार ने इसके बाद ही अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। आमतौर पर गोपनीय प्रक्रिया से सीनेट के चुनाव होते हैं। इस बार इमरान खान चाहते हैं कि चुनाव खुले रूप में हाथ उठाकर हो।

पाक सरकार पर जनता का भरोसा कम हुआ

पाकिस्तान में सरकार के हालात खराब हैं। सरकार पर जनता का विश्वास ही खत्म हो गया है। हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला है कि हर पांच पाकिस्तानियों में चार ऐसे हैं जो ये मानते हैं कि सरकार गलत दिशा में जा रही है । उसकी नीतियों से जनता का भला होने के बजाय देश का नुकसान हो रहा है। यह सर्वे आइपीएओएस (इप्सोस) ने किया है। पूरे देश किए गये सर्वे में 79 फीसद जनता ने बताया कि सरकार की नीतियां देश को गलत दिशा में ले जा रही हैं, जबकि समर्थन करने वाले मात्र 21 फीसद ही थे। बेरोजगारी के मामले में यह माना गया है कि पिछले कुछ समय से बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है।