राहुल गांधी कैसे छह महीने में हर समस्या ऐसे हल करेंगे ?

नई दिल्ली। कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार अगर किसानों और रोजगार की समस्या सुलझा नहीं सकती तो हमें बता दे। मैं इस मसले को छह महीने में हल कर दूंगा। अखबारों में यह खबर देखकर भरोसा हो गया कि राहुल गांधी ने बिल्कुल यही बात कही होगी। क्योंकि मीडिया को उनके बयानों को तोड़ने-मरोड़ने की कभी जरूरत नहीं पड़ती। पिछले चुनावों में वो आलू की फैक्ट्री लगवाने से लेकर मुरादाबाद की पीतल इंडस्ट्री के बीचोबीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने के वादे भी वो कर चुके हैं। वो तो जनता की गलती है कि उसने राहुल गांधी को सत्ता नहीं दी और ‘मेड इन इंडिया’ आलू खाने से चूक गए। अब जब राहुल गांधी सिर्फ छह महीने में देश के किसानों और बेरोजगारों की समस्या का शर्तिया इलाज करने का दावा कर रहे हैं तो उनके इस दावे पर संदेह करने की कोई वजह नहीं है। बस सवाल यह है कि वो ये काम कैसे करेंगे? राहुल गांधी की कार्यशैली और उनके पिछले बयानों के आधार पर हमने अनुमान लगाया है कि वो कौन-कौन से तरीके होंगे जिनसे राहुल गांधी इस विकट समस्या को छू-मंतर कर देंगे। छह महीने की इस कार्य योजना में हमने राहुल गांधी के लिए 15-15 दिन के तीन विदेशी अज्ञातवास का भी प्रावधान रखा है।
खेती के क्षेत्र में रॉबर्ट वाड्रा की उपलब्धियों का फायदा देश को भी मिलना चाहिए। ये मुद्दा काफी समय से उठता रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी अब तक इसे पारिवारिक मामला बताकर छिपाती रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2008 में रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा में अपने एक खेत पर बिना एक भी पैसा लगाए 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी की थी। मोदी 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की बात कहते हैं, जबकि रॉबर्ट वाड्रा के पास इसे छह महीने से भी कम समय में 50 करोड़ गुना करने का मंत्र है। उम्मीद है राहुल गांधी उनकी इस प्रतिभा का इस्तेमाल करेंगे और अपना कृषि मंत्री बनाएंगे। वैसे रॉबर्ट वाड्रा के रहने से जमीन अधिग्रहण के मसले भी सरकार के लिए चुटकियों का खेल हो जाएंगे।
राहुल गांधी हाल के दिनों में जब अमेरिका गए थे तो वहां पर उन्होंने कहा था कि भारत तो परिवारवाद से ही चलता है। दरअसल इसी बयान में रोजगार को लेकर उनका विजन छिपा है। जिस तरह से परिवारवाद के कारण 47 साल की उम्र में भी राहुल गांधी को रोजगार की फिक्र नहीं है वही फॉर्मूला देश के हर व्यक्ति पर लागू किया जा सकता है। इसके तहत हर कोई अपना फैमिली बिजनेस अगली पीढ़ी को सौंप देगा। नेता का बेटा नेता बनेगा, अफसर का बेटा अफसर, दरोगा का बेटा दरोगा और चायवाले का बेटा चायवाला। इससे एक झटके में रोजगार की समस्या का समाधान हो जाएगा। अगर फिर भी किसी के पास रोजगार नहीं है तो वो अपने पिताजी से बात करे, क्योंकि गलती उन्हीं की मानी जाएगी। इस फॉर्मूले से राहुल गांधी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का भी सफाया कर देंगे।
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वो बहाने न बनाए और फौरन रोजगार देना शुरू कर दे। इससे संकेत मिलता है कि राहुल गांधी मौका मिलने पर ठीक इसी अंदाज में रोजगार देंगे। उनकी सरकार बनते ही फौरन रोजगार देने का काम शुरू हो जाएगा। हो सकता है कि इसकी रफ्तार बढ़ाने के लिए स्पीड पोस्ट की मदद ली जाए। कुछ साल पहले कांग्रेस के वक्त में ही रोजगार दफ्तर देश भर में खोले गए थे, लेकिन कुछ अज्ञात कारणों से बेरोजगार युवा इन दफ्तरों में रोजगार लेने नहीं जाते। अब जब स्पीड पोस्ट से रोजगार उनके घर पहुंच जाएगा तो वो इनकार नहीं कर पाएंगे।
राहुल गांधी बहुत पहले ही कह चुके हैं कि गरीबी कुछ नहीं होती, यह वास्तव में एक दिमागी अवस्था का नाम है। जब राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे तो गरीबी को फौरन मनोवैज्ञानिक रोग घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद अगर कोई कहेगा कि वो गरीब है तो उसका दिमाग के डॉक्टर से इलाज करवाया जाएगा। इससे देश में मनोचिकित्सकों का कामधंधा भी बढ़ेगा और देश की जीडीपी को फायदा होगा। इस तरह इंदिरा गांधी के गरीबी हटाओ नारे को सफल बनाने की पूरी जिम्मेदारी मनोचिकित्सकों पर आ जाएगी।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.