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संतान से हैं परेशान, इन उपायों से दूर करें ये समस्या

पितृ दोष के कारण कई व्यक्तियों को संतान प्राप्ति में बाधा तथा रुकावटों का सामना करना पड़ता है। इन बाधाओं के निवारण के लिए उपाय निम्रलिखित हैं:

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1. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य-राहू, सूर्य-शनि आदि योग के कारण पितृ दोष बन रहा है तब उसके लिए पितरों का श्राद्ध, पितृ तर्पण, ब्राह्मण भोजन तथा दानादि करने से शांति प्राप्त होती है।
2. मातृ दोष : यदि कुंडली में चंद्रमा पंचम भाव का स्वामी होकर शनि, राहू, मंगल आदि क्रूर ग्रहों से युक्त या आक्रांत हो और गुरु अकेला पंचम या नवम भाव में है तब मातृ दोष के कारण संतान सुख में कमी का अनुभव हो सकता है।
मातृ दोष के शांति उपाय
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मातृ दोष बन रहा है तब इसकी शांति के लिए गौदान करना चाहिए या चांदी के बर्तन में गाय का दूध भर कर दान करना शुभ होगा। इन शांति उपायों के अतिरिक्त एक लाख गायत्री मंत्र का जाप करवाकर हवन कराना चाहिए, दशमांश तर्पण करना चाहिए और ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए, वस्त्रादि का दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए। इससे मातृ दोष की शांति होती है। मातृ दोष की शांति के लिए पीपल के वृक्ष की 28 हजार परिक्रमा करने से भी लाभ मिलता है।
3. भ्रातृ दोष : तृतीय भावेश मंगल यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहू के साथ पंचम भाव में हो तथा पंचमेश व लग्नेश दोनों ही अष्टम भाव में हों तब भ्रातृ शाप के कारण संतान प्राप्ति में बाधा तथा कष्ट का सामना करना पड़ता है।
भ्रातृ दोष के शांति उपाय
भ्रातृ दोष की शांति के लिए श्री सत्य नारायण का व्रत रखना चाहिए, सत्यनारायण भगवान की कथा कहनी या सुननी चाहिए तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करके सभी को प्रसाद बांटना चाहिए।
4. सर्प दोष : यदि पंचम भाव में राहू है और उस पर मंगल की दृष्टि हो या मंगल की राशि में राहू हो तब सर्प दोष की बाधा के कारण संतान प्राप्ति में व्यवधान आता है या संतान हानि होती है।
सर्प दोष के शांति उपाय
सर्प दोष की शांति के लिए ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराना चाहिए, उन्हें वस्त्र, गाय दान, भूमि दान, तिल, चांदी या सोने का दान भी करना चाहिए लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि जो भी करें वह अपनी शक्ति तथा सामर्थ्य के अनुसार ही करें।
5. ब्राह्मण श्राप या दोष : किसी व्यक्ति की कुंडली में यदि धनु या मीन में राहू स्थित है और पंचम भाव में गुरु मंगल व शनि हैं और नवम भाव का स्वामी अष्टम भाव में है तब यह ब्राह्मण श्राप की कुंडली मानी जाती है और इस ब्राह्मण दोष के कारण ही संतान प्राप्ति व बाधा, सुख में कमी या संतान हानि होती है।

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ब्राह्मण श्राप के शांति उपाय
ब्राह्मण श्राप की शांति के लिए किसी मंदिर में या किसी सुपात्र ब्राह्मण को लक्ष्मी नारायण की मूर्तियों का दान करना चाहिए। जातक अपनी शक्ति के अनुसार किसी कन्या का कन्यादान भी कर सकता है। बछड़े सहित गाय भी दान की जा सकती है। शैय्या दान की जा सकती है। सभी दान व्यक्ति को दक्षिणा सहित करने चाहिएं। इससे शुभ फलों में वृद्धि होती है और ब्राह्मण श्राप या दोष से मुक्ति मिलती है।
6. मातुल श्राप : यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पांचवें भाव में मंगल, बुध, गुरु तथा राहू हों तब मामा के श्राप से संतान प्राप्ति में बाधा आती है।

मातुल श्राप के शांति उपाय
मातुल श्राप से बचने के लिए किसी मंदिर में श्री विष्णु जी की प्रतिमा की स्थापना करवानी चाहिए। लोगों की भलाई के लिए पुल, तालाब, नल या प्याऊ आदि लगवाने से लाभ मिलता है और मातुल श्राप का प्रभाव कुछ कम होता है।
7. प्रेत श्राप : किसी व्यक्ति की कुंडली में यदि पंचम भाव में शनि तथा सूर्य हों और सप्तम भाव में कमजोर चंद्रमा स्थित हो तथा लग्न में राहु, बारहवें भाव में गुरु हो तब प्रेत श्राप के कारण वंश बढने में समस्या आती है। यदि कोई व्यक्ति अपने दिवंगत पितरों और अपने माता-पिता का श्राद्ध कर्म ठीक से नहीं करता हो या अपने जीवित बुजुर्गों का सम्मान नहीं कर रहा हो तब इसी प्रेत बाधा के कारण वंश वृद्धि में बाधाएं आ सकती हैं।

प्रेत श्राप के शांति उपाय
प्रेत शांति के लिए भगवान शिवजी का पूजन करवाने के बाद विधि-विधान से रुद्राभिषेक कराना चाहिए। ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र फल, गौदान आदि उचित दक्षिणा सहित अपनी यथाशक्ति देनी चाहिए। इससे प्रेत बाधा से राहत मिलती है। गयाजी, हरिद्वार, प्रयाग आदि तीर्थ स्थानों पर स्नान तथा दानादि करने से लाभ और शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

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