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अमेरिका की चेतावनी, छोटे देशों को धमकाने की कोशिश ना करे चीन

वाशिंगटन । एशिया में चीन की लगातार बढ़ती एकाधिकार की नीति पर अमेरिका ने कहा है कि उसे छोटे देशों को धमकाने या दबाव में लेने की इजाजत नहीं है। दक्षिण चीन सागर और कई अन्य मसलों पर चीन के आक्रामक रुख को देखते हुए ट्रंप प्रशासन ने यह बात कही है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में एक अमेरिकी थिंक टैंक ने ट्रंप प्रशासन को सलाह दी थी कि वह चीन के आक्रामक रवैये की लगातार अनदेखी नहीं कर सकता। उसे चीन के खिलाफ बोलना और कार्य करना होगा।

पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों की सहायक विदेश मंत्री सूसन थॉर्नटन ने चीन के संबंध में यह बात अमेरिकी संसद की विदेशी मामलों की समिति के समक्ष कही है। सूसन ने कहा, हम सभी बराबर हैं। एशिया में प्रभाव जमाने के मामले में चीन अगर अमेरिका का स्थान लेना चाहता है, तो उसका यह प्रयास मंजूर है। लेकिन उसे प्रभाव जमाने के लिए किसी देश को धमकाने या दबाव में लेने की इजाजत नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में चीन ऊपर आता है तो अच्छी बात है। लेकिन इसके लिए उसे तय मानदंडों और नियमों का पालन करना होगा। सबके साथ समान व्यवहार करना होगा।

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सहायक विदेश मंत्री ने बताया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति के तहत अमेरिका क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और मजबूत बनाने पर कार्य कर रहा है। इसमें दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ नया व्यापार समझौता करना भी शामिल है। प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका बड़ी ताकत है और वह अपना यह रुतबा कायम रखेगा। चीन की एकाधिकार वाली नीति और उत्तर कोरिया की चुनौती के लिहाज से यह क्षेत्र अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। इसलिए नई चुनौतियों के लिहाज से कार्य किया जा रहा है। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करते हुए चीन क्षेत्र में वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान के दावों को अस्वीकार कर रहा है।

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बता दें कि चीन ने बार-बार इस समुद्री क्षेत्र के बाहर के देशों आम तौर पर अमेरिका और जापान पर दक्षिण चीन सागर में संकट भड़काने का आरोप लगाया है। जब चीन अपने पड़ोसी देशों के साथ कूटनीति के माध्यम से मामले को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की योजना के बारे में बात करते हुए, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उम्मीद है कि किसी भी तरह की भी परेशानी पैदा करने की कोशिश नहीं की जाएगी।

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