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पुलिस स्टेशन में आपकी एफआईआर लिखने से मना कर देते है, तो बोलिये ये सिर्फ एक शब्द, तुरंत FIR दर्ज़ करनी पड़ेगी

दिल्ली. भारत के संविधान को विश्व में सबसे ज्यादा मजबूत और मानवीय माना गया है. इसका कारण यह है कि समय के अनुसार भारतीय संविधान के नियमों में परिवर्तन करने का भी संशोधन रखा गया है. लेकिन फिर भी देखा जाता है कि भारत में लोगों को पूरा न्याय नहीं मिल पाता. इसका कारण यह है कि जब भी कोई अपराध होता है और आप इसकी एफआईआर कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाते है तो वह किसी न किसी कारण से आपकी एफआईआर लिखने से मना कर देते है.

पुलिस स्टेशन में एफआईआर
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लेकिन आज हम आपको एक ऐसा शब्द बताने जा रहे है जिसका इस्तेमाल करने से पुलिस को आपकी एफआईआर दर्ज करनी ही पड़ेगी. अक्सर देखा जाता है कि पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से इसलिए मना कर देती है क्योंकि जिस क्षेत्र में अपराध होता है वह क्षत्र उस पुलिस स्टेशन के अंदर नहीं आता और वह आपको उस क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में जाने की सलाह देते है.

लेकिन आपको बता दें कि जब भी आप इस शब्द का इस्तेमाल करेंगे तो नियम के अनुसार पुलिस को आपकी एफआईआर दर्ज करनी ही पड़ेगी. आप भी जानना चाहते होंगे कि आखिर वह शब्द कौन सा है ? तो आपको बता देते है कि वह शब्द है जीरो एफआईआर. जी हाँ अगर आपके साथ कोई अपराध हुआ है और उसकी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाते है तो वहाँ आपको वहां जीरो एफआईआर दर्ज कराने के लिए बोलना है जिसके बाद पुलिस को आपकी रिपोर्ट दर्ज करनी ही पड़ेगी.

भले ही अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो उसकी एफआईआर आप किसी भी पुलिस स्टेशन में जीरो एफआईआर के नाम से करा सकते है. बता दे कि इसमें सबसे पहले आपकी रिपोर्ट दर्ज की जाएगी. जिसके बाद इस रिपोर्ट को ज्यूरिडिक्शन वाले पुलिस स्टेशन में फॉरवर्ड कर दिया जाता है.

दरअसल इसे लागू करने का सबसे बड़ा मकसद यही है कि ज्यूरिडिक्शन के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय मिलने में जरा सी भी देर न हो. दरअसल इस तरह के नियम की शुरुआत निर्भया बलात्कार के बाद से की गई है जिसमें सभी भारत निवासियों ने निर्भया के न्याय के लिए सरकार से मांग की थी और सड़कों पर प्रदर्शन भी किया था.

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