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इलेक्टोरल बांड के जरिए चंदा योजना कितनी हो पाएगी सफल ?

चुनावी चंदे को पारदर्शी बनाने का आगाज होगा पहली मार्च से
एसबीआइ की चुनिंदा शाखाओं से होगी चुनावी बांडों की बिक्री

चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल

नई दिल्ली। चुनावी चंदे की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से शुरू हुई चुनावी बांड स्कीम की शुरुआत एक मार्च से हो जाएगी। इसके तहत बांडों की पहली श्रृंखला की बिक्री आरंभ होगी। ये बांड 10 मार्च तक ही भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से खरीदे जा सकेंगे। वित्त मंत्रलय ने जारी एक बयान में इस बात का एलान किया कि ये बांड केवल भारतीय नागरिक अथवा भारत में स्थापित की गई कंपनी द्वारा ही खरीदे जा सकेंगे।

सरकार ने इलेक्टोरल बांड स्कीम को इसी साल दो जनवरी को अधिसूचित किया था। शुरुआत में भारतीय स्टेट बैंक की देश भर में चार शाखाओं को इसकी बिक्री की अनुमति प्रदान की गई है। ये शाखाएं दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में स्थित हैं। साल 2018 की पहली तिमाही के लिए स्कीम की शुरुआत पहली मार्च को हो रही है।

चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल

पहले इसे जनवरी में ही शुरू किया जाना था। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने साल 2017-18 के आम बजट में चुनावी बांड की स्कीम लाने की घोषणा की थी। इसके मुताबिक केवल वही पंजीकृत राजनीतिक दल इन बांडों के जरिये चंदा ले पाएंगे जिन्हें पिछले लोकसभा अथवा विधानसभा चुनाव में एक फीसद से अधिक मत प्राप्त होंगे। वित्त मंत्रलय के मुताबिक राजनीतिक पार्टियां इन बांडों को केवल अधिकृत बैंक खातों के जरिये ही भुना पाएंगी।

लोग राजनीतिक दलों को चंदा देने के लिए इन्हें व्यक्तिगत अथवा समूह के तौर पर भी खरीद सकेंगे। बांड जारी होने से अगले पंद्रह दिनों के लिए वैध होंगे। यानी राजनीतिक दलों के लिए इन्हें इसी अवधि के भीतर भुनाना आवश्यक होगा। वित्त मंत्रलय ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के बाद बांड जमा कराने वाले दलों को इसका भुगतान नहीं होगा। राजनीतिक दल जिस दिन बांड अपने बैंक खाते में जमा करेंगे, चंदे की राशि उसी दिन उनके खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

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सरकार का मानना है कि चुनावी बांड से राजनीतिक चंदे की प्रक्रिया काफी हद तक पारदर्शी हो जाएगी। चुनावी बांड के सिक्योरिटी फीचर बिल्कुल करंसी नोट की तरह होंगे। इसकी छपाई शुरू हो गई है। राजग सरकार ने 2001 में एक अहम सुधार करते हुए चेक से राजनीतिक चंदा देने वालों को टैक्स में छूट देने की पहल की थी।

कुछ राजनीतिक दलों को चेक से चंदा मिलना शुरू हुआ, लेकिन आज भी अज्ञात स्नोत से चंदा अधिक आ रहा है। इस व्यवस्था को बदलने के लिए ही सरकार ने चुनावी बांड की वैकल्पिक व्यवस्था बनाई है।आम बजट 2017-18 प्रस्तुत करते हुए राजनीतिक पार्टियों पर भी नकेल कस दी। जेटली के अनुसार अब पार्टियों को चंदा लेने से पहले इन बातों का ध्यान रखना होगा।

चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल
चुनावी चंदे में पारदर्शिता का सवाल

– अब राजनीतिक पार्टी एक व्यक्ति से अधिकतम दो हजार रुपए का नगद चंदा ले सकती है।

– राजनीतिक दलों को चंदा लेने में सुविधा के लिए बैंक चुनावी बांड जारी किए जाएंगे।

– अब चंदा देने वाले केवल चैक और डिजिटल भुगतान कर मान्यता प्राप्त बैंकों से बांड खरीद सकते हैं।

– सरकार इसके लिए बैंकों को अधिकृत करेंगा, जहां से ये चुनावी बांड भरे जा सकेंगे।

– दानदाताओं से चैक या डिजिटल माध्यम से भी चंदा लिया जा सकता है।
– अब सभी पार्टियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आय कर रिटर्न भरना होगा।

– इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है।

ऐसे में यह कहना भी मुश्किल लगता है कि फिर सिर्फ बांड के जरिए चंदा योजना कितनी सफल रह पाएगी? राजनीतिक दल तो इसकी जगह कोई और रास्ता निकाल लेंगे। सरकार मान सकती है कि उसका ताजा प्रावधान राजनीतिक दलों और कारपोरेट जगत के गठजोड़ को तोड़ने में बाधक बनेगा। और दानकर्ता की बैलेंस शीट में चुनावी बांड का हवाला होगा ।

आदि लेकिन सवाल यह है कि आम जनता को कैसे पता चलेगा कि किसने किस राजनीतिक दल को कितना चंदा दिया? इस नजरिए से राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता को कैसे स्वीकार किया जाएगा? ऐसे में चुनावी चंदे को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कोई व्यावहारिक रास्ता अपनाने की दरकार सभी खत्म नहीं मानी जा सकती। चुनावी बांड की तरह दूसरे रास्ते से भी आने वाले चंदों को भी पारदर्शी बनाने की जरूरत है।

पार्टियों की आय-व्यय के ब्योरे को भी पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के उपाय भी होने चाहिए। अन्य कई लोकतांत्रिक देशों में चुनावी चंदे संबंधी अलग-अलग कई प्रावधान हैं। कहीं-कहीं तो चंदे की राशि की सीमाएं निर्धारित हैं। वैसे चुनावी बांड योजना भी पारदर्शिता लाने की एक अच्छी पहल अवश्य है, लेकिन सवाल यही है कि यह कितनी कारगर सिद्ध होगी। असली बात तो यह है कि राजनीतिक दलों का चरित्र और नीयत बदलनी चाहिए। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक अधिक कुछ हाथ लगने वाला नहीं है।

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