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किशोरों की असल जिंदगी को प्रभावित कर रहा सोशल मीडिया, बिना वजह विवादों में फंस जाते हैं किशोर

लॉस एंजिलिस, सोशल मीडिया साइट का सबसे ज्यादा प्रभाव किशोरों पर देखने को मिलता है। अपना ज्यादातर समय इन साइटों पर बिताने वाले किशोरों को पता भी नहीं चलता कि यह कब उनके वास्तविक जीवन पर हावी हो गया। यह बात एक में सामने आई है।

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अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के कर्ताओं की मानें तो इस कारण एक अलग तरह का डिजिटल विभाजन हो रहा है। प्रोफेसर कैंडाइस ऑडगर्स ने बताया, स्मार्टफोन बच्चों में हो रही दिक्कतों का सबसे बड़ा आईना है। कम आय वाले परिवार से आने वाले किशोरों के सोशल मीडिया पर अनुभव का असर उनके असल जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करता है।

इस कारण कई बार वह बेमतलब की लड़ाई में फंस जाते हैं।12015 में हुए के अनुसार करीब 92 प्रतिशत गरीब किशोर इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं और 65 फीसद के पास स्मार्टफोन है। वहीं, अच्छी कमाई वाले घरों के 97 प्रतिशत बच्चे इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और 69 फीसद के पास स्मार्टफोन है।

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ऑडगर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर शोषण का शिकार हो सकने वाले किशोरों को उनके माता-पिता, स्कूल और अन्य संस्थानों से अतिरिक्त मदद दी जानी चाहिए।

आज ज्यादातर लोग डिजिटल युग का हिस्सा बनकर सोशल मीडिया के अवसरों का भरपूर प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन जो भी बच्चे सोशल मीडिया में किसी तरह का संघर्ष कर रहे हैं उन्हें बाहरी दुनिया और परिवार की सलाह की ज्यादा जरूरत है।

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