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बेटियों को शादी के लिए नहीं आत्मनिर्भर बनाने के लिए पढ़ाएं : स्वाती सिंह

जीवन में अवसाद विषयक गोष्ठी का आयोजन हुआ

लखनऊ। हमारे समाज में महिलाओं को एक नारी की तरह ट्रीट नहीं किया जाता और उन पर चीजों को थोप दिया जाता है। बच्चियों को डरा कर चुप करवा दिया जाता है और सारा बोझ महिलाओं पर लाद दिया जाता है जो अवसाद का कारण बनता है। ये बातें प्रेस क्लब में सोमवार को आयोजित जीवन में अवसाद विषयक गोष्ठी में बोलतें हुए राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वाती सिंह ने कही।

उन्होंने पुरूषवादी सोच को नकारते हुए कहा कि महिलाओं को दबाया जाता है जिसमें डिप्रेशन शुरू होता है और समाज की सोच बदले बिना इससे उबरा नहीं जा सकता है। लोग बेटे बेटी को समान अवसर दे और बेटियों को केवल शादी करने के लिए ही ना पढ़ाएं बल्की उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के शिक्षा प्रदान करवाएं। हाल ही में मंचित नाटिका द्रौपदी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस काल में भी महिलाओं की नहीं सुनी जाती थी और द्रौपदी के मन की व्यथा को पाण्डवों ने भी जानने का प्रयास नहीं किया था।

आज 11-12वीं की परिक्षाओं में देखें तो लड़कियां लड़कों से ज्यादा सफल होती है पर नौकरियों पर नजर दौड़ाएं तो पुरूषों की संख्या अधिक होती है, इसका मतलब हम बेटियों को बेटों के बराबर नहीं मानते जिससे अवसाद पनपता है। एक पीड़िता की शादी उसके रेपिस्ट से करवा दी जाती है जिससे उसे जीवन भर अवसाद का सामना करना पड़ता है।

शहरों के साथ साथ गांवों में भी अवसाद बढ़ रहा है जिससे बचने के समाज की सोच बदलना ही एकमात्र विकल्प बचता है।आभा जगत ट्रस्ट की गोष्ठी में डॉ मधु पाठक, एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री, नागेन्द्र सिंह चौहान, किन्नर प्रतीक शर्मा, एसिड अटैक पीड़ित फरहा के साथ अध्यक्षता कर रही शिवा पाण्डेय ने अवसाद को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत मानपत्र, अंगवस्त्र तथा पुष्प गुच्छ भेंट कर किया गया।

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