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स्वदेशी मोटरसाइकिल, 1 लाख 20 हजार किलोमीटर की यात्रा, गौरव सिद्धार्थ ने बनाई गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में जगह

 लखनऊ। राजधानी के प्रेस क्लब में मंगलवार को लखनऊ के गौरव सिद्धार्थ ने प्रेस वार्ता कर  गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में जगह बनाने की जानकारी दी।  गौरव सिद्धार्थ ने बताया कि उन्होंने सितम्बर 17, 2015 को  स्वदेश के अंदर 1,20,000 किलोमीटर, जो की पृथ्वी के लगभग 3 चक्कर के बराबर है। चुनौतीपूर्ण यात्रा के लिए, स्वदेशी का सन्देश लेकर निकले गौरव का लक्ष्य था, दुनिया की सबसे लम्बी दूरी की मोटरसाइकिल यात्रा का कीर्तिमान हासिल करने का जो अभी तक अमेरिका के डेनेल लीन के नाम था।
गौरव ने 1 वर्ष 8 माह तक की लगातार यात्रा में एक मार्ग का उपयोग केवल एक बार करते हुए, देश के सभी 29 राज्य तथा 5 केंद्र शासित प्रदेशों के जिला मुख्यालयों की यात्रा की। 9 माह तक लगातार दस्तावेज़ों की जांच के उपरान्त अंततः गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड संस्था ने 25 फरवरी 2018 को उनकी इस यात्रा को एक देश के अंदर की गयी सर्वाधिक दूरी की यात्रा के रूप में प्रतिपादित कर प्रमाणपत्र प्रदान करा जो निश्चित रूप से, गौरव के लिए ही नहीं बल्कि सम्पूरा राष्ट्र के लिए सम्मान की बात है।
गौरव की इस यात्रा को स्वामी रामदेव ने स्वयं मोटरसाइकिल चला कर प्रारम्भ किया. माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की माता श्रीमती हीराबा ने भी इस यात्रा को अपना आशीर्वाद दिया. यह संपूर्ण यात्रा स्वयं के खर्चे से की गयी, यद्यपि कई बिज़नेस एवं कॉर्पोरेट संस्थानों से यात्रा को प्रायोजित करने के प्रस्ताव मिले लेकिन चूँकि गौरव इस अनेकता में एकता को जानने वाली यात्रा का लुत्फ़ सीमित साधनो के साथ उठाना चाहते थे अतः उन्होंने इन्हे अस्वीकार कर दिया.

देश के अन्य विभूतियों जैसे नारायण मूर्ति, अन्ना हज़ारे, श्री श्री रविशंकर, सध्गुरु जग्गी वासुदेव, माता अमृतानंदमयी, PT उषा, किरण बेदी, सौरव गांगुली, आनंदीबेन पटेल, शिवराज सिंह चौहान, रघुराम राजन, अरविन्द केजरीवाल, रतन टाटा, इरोम शर्मीला, धर्मपाल गुलाटी, राज्यवर्धन सिंह राठौर, कुमार विश्वास, विकास व् प्रकाश आम्टे ने भी इस यात्रा को अपना अमूल्य समय व समर्थन दे कर प्रोत्साहित किया।
अपने लगभग 2 वर्ष की इस यात्रा के दौरान गौरव ने हीरो इम्पल्स मोटरसाइकिल समेत, अन्य आवश्यक गियर्स, जीपीएस, कैमरा आदि सभी स्वदेशी उपकरणों का ही प्रयोग किया, तथा देश को यह सन्देश दिया की स्वदेशी वस्तुएं सस्ती, टिकाऊ एवं सर्वत्र उपलब्ध रहती हैं तथा देश की अर्थव्यवस्था को भी सुचारु रूप से चलने में मदद करती हैं।
गौरव ने यात्रा में अपना निजी मोटो रखा था नियंत्रित गति, सुरक्षा ज्यादा, अतः उन्होंने अपनी बाइक की गति कभी भी 50-70 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं रखी, इसलिए उन्हें देश के किसी भी हिस्से में यातायात का उल्लंघन करते नहीं पाया गया। इसके अतिरिक्त स्थान स्थान पर उन्होंने लोगो को वृक्षारोपण, रक्तदान एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए जागरुक किया एवं नियमित अंतराल पर स्वयं भी रक्तदान करते रहे. उन्होंने युवाओं को डिजिटल लॉकर, हेलमेट का नियमित उपयोग, आईएसआई  वस्तुएँ, एवं जीवन बीमा पॉलिसी की अनिवार्यता के बारे में भी जागरुक किया।

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