BJP के शाह इसलिए है राजनीति के शहंशाह, जानिये !

नई दिल्ली: महज पांच साल पहले केंद्रीय राजनीति में कदम रखने वाले अमित शाह का कद आसमान को छूने लगा है। पार्टी के अंदर यूं तो शायद ही किसी को उनके राजनीतिक कद पर शक रहा है, लेकिन पूवरेत्तर के तीन दुरुह गढ़ों को फतह कर उन्होंने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके कौशल के कायल हैं तो क्यों। खुद प्रधानमंत्री इसका इजहार करने में कभी ङिाझके नहीं।

amit-modi
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अब पार्टी में किसी को शक नहीं होना चाहिए कि मोदी के बाद नंबर टू शाह ही हैं।  त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में सरकार गठन के बाद भाजपा और राजग की सरकार 21 राज्यों में होगी। उससे भी बड़ी बात यह है कि जम्मू-कश्मीर और असम के बाद त्रिपुरा में जीत ने साबित कर दिया है कि भाजपा की विचारधारा के लिए कहीं कोई अवरोध नहीं है।

modi-with-amit
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यह सभी कारनामा शाह के नेतृत्व में ही हुआ है। दो दिन पहले जब प्रधानमंत्री जीत का जश्न मनाने भाजपा कार्यालय पहुंचे थे तो वहां भी खुले दिल से जीत का श्रेय शाह को दिया था। उन्होंने कहा-‘मैं अमित भाई को छात्र जीवन से जानता हूं और जब देखता हूं कि उनके नेतृत्व में भाजपा सफलता पर सफलता हासिल कर रही है तो गर्व होता है।’

संसदीय बोर्ड के सदस्यों की मौजूदगी में उन्होंने यह संदेश भी दे दिया कि शाह हर किसी की भूमिका तय करेंगे और यह हमारी जिम्मेदारी बनती है कि उसका पालन करें।  ध्यान रहे कि 2014 में भाजपा की सरकार केवल छह राज्यों में थी मगर आज 15 राज्यों में उसके मुख्यमंत्री है। छह राज्यों में एनडीए का शासन है। इस दौरान शाह ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के लिए मुश्किल लक्ष्य तय किया और उससे ज्यादा हासिल किया।

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पार्टी को इस मुकाम तक पहुंचाने में शाह की मेहनत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अध्यक्ष रहते साढ़े तीन वर्षो में वह कभी आराम से बैठे नहीं। उन्होंने इस दौरान औसतन प्रतिदिन 541 किमी यात्र। की। उन्होंने 120 लोक सभा सीटों की पहचान की, जिन पर भाजपा का कभी खाता नहीं खुला है। सोमवार को संसद परिसर में भी इसका रंग दिखा।

शाह और प्रधानमंत्री की अगवानी के लिए भाजपा के सभी वरिष्ठ नेता तत्पर थे। प्रधानमंत्री मोदी और शाह समेत कई भाजपा नेताओं ने गले में पूवरेत्तर के राज्यों को पटका डालकर संदेश देने की कोशिश की।

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