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हिन्दुत्व रक्षा के मूल एजेंडा से भटक रहा है संघ…?

हिंदू हित की बात करेगा वही देश पर राज करेगा,का नारा देने वाले संघ परिवार के ही एक सदस्य डॉ प्रवीण तोगडिया ने करोडो हिंदू जिसका बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं वह राम मंदिर की जो रट लगाइ उसका परिणाम यह आया की उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ बोलने की सजा के तौर पर रास्ता दिखा दिया गया। और अब वे हिन्दुओं के लिए नया संगठन बनाए तो आरएसएस को बुरा नहीं मानना चाहिए।

इस तरह का एक मत धीरे धीरे राम मंदिर के रामभक्तों में पनपना शुरू हो चुका है। यह मानना है राजनितिक घटनाओं पर अपनी पैनी नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का। १७ अप्रैल से तोगड़िया, मंदिर वहीं बनायेंगे का फिर एक बार नारा लेकर उसी तरह मैदान में उतर रहे जैसे वे कांग्रेस के शासन में ललकारते थे।

इस सारे एपिसोड में मोदी को बचाने के लिए संघ परिवार ने राम मंदिर के लिए अपनी आँखे बंद कर ली और जातिवाद को बढ़ावा देने के लिए दलित, आदिवासी, ओबीसी को खुश करने के लिए नया मिशन हाथ में लेकर दूध से मक्खी को निकाल के फेंकने की तरह तोगड़िया को निकाल दिया। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है की बीजेपी ने हमेश ये वादा किया की केंद्र में जब भी पूर्ण बहुमत मिलेगा राम मंदिर के लिए कानून बनायेंगे।

२०१४ में नरेन्द्र मोदी को पूर्ण बहुमत मिला तब तोगडिया की तरह करोडों हिन्दू में ऐसी आशा जगी की बस अब तो राम मंदिर का काम शुरू हो ही गया समझो। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तब वीएचपी के तोगडिया ने मोदी और संघ एवं बीजेपी को वादा याद करवाया। लेकिन नतीजा जब नहीं निकला तब तोगडिया ने जाहिर में संसद में कानून बनाने का मुद्दा छेड़ा तब आखिर उन्हें ही निकाल दिया।

और इस सब खेल में संघ की भूमिका राम मंदिर के हित की नहीं किन्तु मोदी के हित की तोगडिया को लगी तो उसमे कसूर तोगडिया का नहीं परन्तु संघ के वरिष्ठ नेताओं का है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का यह भी कहना है की गांधीजी ने कहा था की आज़ादी के बाद कांग्रेस का विसर्जन किया जाना चाहिए। कांग्रेस का तो विसर्जन नहीं हुआ लेकिन लगता है की मोदी संघ का विसर्जन कर के रहेंगे क्योंकि ज्यादातर संघ प्रचारक अब मोदीमय हो गए है।

जैसा वे कहते है ऐसा हो रहा है। संघ के मुद्दे नागपुर से नहीं दिल्ली से तय हो रहे है ऐसा तोगड़िया समर्थकों का मानना है। संघ की विचारधारा अब मोदी की विचारधारा बनती जा रही है ऐसे में संघ की विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि तोगडिया को निकाले जाने के बाद मोहन भागवत ने दहांणु पालघर में ललकारा की यदि अयोध्या में राम मंदिर नहीं बना तो इस देश की संस्कृति की जड़ उखड़ जायेगी।

जो बात, जो मुद्दा तोगडिया उठा रहे थे वह किसी को नहीं भाया और जब वही बात भागवत ने कही और जोर देकर कही तो क्या भागवत के खिलाफ कदम लेना चाहिए।
तोगड़िया का अनशन आज १७ से अहमदाबाद में शुरू हो रहा है हालांकि पुलिस द्वारा सार्वजनिक अनशन की अनुमति न मिलने पर वे अब वीएचपी के कार्यालय बनाकर भवन में बैठ कर अपना अनशन शुरू करेंगे।

हो सकता है की शायद उसकी भी अनुमति न मिले। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है की अब राम मंदिर का मामला कोर्ट के हवाले सौंप दिया गया है जब की संघ और मरते दम तक अशोक सिंघल यही कहते रहे की राम मंदिर कोई कोर्ट का विषय नहीं है। यह करोडों लोगों की आस्था का विषय है। फिर कोर्ट पर आश लगाए बैठना कहां तक ठीक है। हो सकता है की सरकार यह चाहती हो कि मंदिर बनाने का फैसला कोर्ट का है हमारा नहीं और सरकार कोर्ट के फैसले का सम्मान करेगी ऐसी कोई रणनीति पर जा रही हो। तोगड़िया को समर्थन देने वाले राम भक्तों का कहना है कि संघ अपने मूल एजेंडा से भटक कर मोदी बचाव में अटक गया है।

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