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जानिये क्यों छिना गया स्मृति ईरानी से सूचना प्रसारण मंत्रालय !

नई दिल्ली: 2019 लोकसभा चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में अचानक फेरबदल कर दिया। किडनी ट्रांसप्लाट और ऑपरेशन के चलते केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली की जगह पीयूष गोयल वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे।

जेटली से मंत्रालय लिया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है, लेकिन स्मृति ईरानी से सूचना प्रसारण मंत्रालय वापस लेना बड़ा फैसला माना जा रहा है। स्मृति से इससे पहले भी एचआरडी मंत्रालय छीना गया था। सूचना प्रसारण मंत्रालय में ही राज्यमंत्री के रूप में काम देख रहे राज्यवर्धन सिंह राठौर ही अब पूरी तरह से सूचना प्रसारण मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे।

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ईरानी अब केवल टेक्सटाइल मंत्रालय की प्रभारी रहेंगी। ये दूसरी बार है जब स्मृति ईरानी से हाई प्रोफाइल मंत्रालय लिया गया हो। इससे पहले उनसे मानव संसाधन मंत्रालय लिया गया था और प्रकाश जावड़ेकर ने उनकी जगह ली थी।

अपने फैसलों को लेकर स्मृति ईरानी अक्सर विवादों में रहती हैं। हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फेक न्यूज (फर्जी खबरों) पर अंकुश लगाने के उपायों के तहत बयान जारी कर कहा था कि अगर कोई पत्रकार फर्जी खबरें करता हुआ या इनका दुष्प्रचार करते हुए पाया जाता है तो उसकी मान्यता स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है।

बयान में कहा गया था कि पत्रकारों की मान्यता के लिए संशोधित दिशा-निर्देशों के मुताबिक अगर फर्जी खबर के प्रकाशन या प्रसारण की पुष्टि होती है तो पहली बार ऐसा करते पाए जाने पर पत्रकार की 6 महीने के लिए मान्यता निलंबित की जाएगी। जबकि दूसरी बार ऐसा करते पाए जाने पर उसकी मान्यता 1 साल के लिए निलंबित की जाएगी। वहीं तीसरी बार अगर इसका उल्लंघन होता है तो पत्रकार (महिला/ पुरुष) की मान्यता स्थायी रूप से रद्द कर दी जाएगी।

प्रधानमंत्री कार्यालय(पीएमओ) ने स्मृति ईरानी के फैसला पलटते हुए कहा है कि इसे पूरी तरह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के ऊपर छोड़ देना चाहिए। पीएमओ के इस फैसले से स्मृति ईरानी पर सवाल खड़े होने लगे थे।

स्मृति ईरानी को अपने विवादित बयानों के कारण कई बार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। मंत्री बनने के बाद से लगातार उनका किसी न किसी विवाद में नाम आता रहता है।

 चर्चित विवाद

स्मृति ईरानी के शिक्षा मंत्री बनने के बाद यूजीसी के निर्देश पर दिल्ली यूनिवर्सिटी को चार साल का डिग्री कोर्स वापस लेना पड़ा था।

शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी पर दो अलग चुनावी शपथपत्र में अपनी शिक्षा के बारे में अलग-अलग जानकारी देने के आरोप लगे।

एचआरडी मंत्रालय की तरफ से संचालित सेंट्रल स्‍कूलों में जर्मन की जगह संस्‍कृत भाषा लाने के उनके फैसले पर भी काफी बवाल मचा था।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर विरोध जताकर मंत्रालय विवादों में आ चुका है।

 हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी पर भी स्मृति के मंत्रालय की किरकिरी हो चुकी है। यूनिवर्सिटी के कुछ दलित छात्रों के खिलाफ बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी के एक छात्र नेता की पिटाई का आरोप लगा था।

 जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी में महिषासुर दिवस मनाए जाने और दुर्गा को लेकर इरानी ने संसद में एक पर्चा पढ़ा था, जिस पर विवाद हो गया था। तब स्मृति ने कथित तौर पर कहा था कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्र मां दुर्गा का अश्लील चित्रण करते हैं। इस पर कई दिनों तक उनके खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ था।

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