कर्नाटक में रिलीज नहीं होगी रजनीकांत की ‘काला’

बेंगलुरू : सुपरस्टार रजनीकांत की चर्चित फिल्म ‘काला’ को कर्नाटक में देखने को बेताब उनके फैंस को बड़ा झटका लगा है। कावेरी विवाद को लेकर रजनीकांत के बयान से नाराज कर्नाटक फिल्म चेंबर ऑफ कॉमर्स (KFCC) ने ‘काला’ को प्रदर्शित नहीं करने का फैसला किया है। यह फिल्म सात जून को भारत सहित दूसरे देशों में रिलीज हो रही है।

केएफसीसी के अध्यक्ष सा रा गोविंदु ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि यह फैसला लिया गया है कि रजनीकांत की फिल्म को कर्नाटक में रिलीज नहीं किया जाएगा। दरअसल, रजनीकांत ने कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु का कावेरी नदी का हिस्सा छोड़ने को कहा था। इसी के बाद कर्नाटक में रजनी के बयान की तीखी आलोचना हो रही थी। यहां तक कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी रजनीकांत को कर्नाटक आने का न्योता देते हुए कहा था कि यहां स्थिति देखने पर रजनीकांत अपना रूख जरूर बदल लेंगे। यह फिल्म एक गैंगस्टर ड्रामा है जिसमें रजनीकांत काला करीकलन नाम के गैंगस्टर का रोल कर रहे हैं। नाना पाटेकर भी इस फिल्म में एक ताकतवर नेता के किरदार में दिखाई देंगे। इस फिल्म के डायरेक्टर रंजीत की पिछली फिल्मों की तरह ‘काला’ में भी एक कड़ा राजनीतिक संदेश है। फिल्म को धनुष ने प्रड्यूस किया है। हुमा कुरैशी और एस्वरी राव भी फिल्म में मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। इस साल की यह सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है।

कर्नाटक में रजनी की ‘काला’ की रिलीज को लेकर राज्य के डिस्ट्रिब्यूटर ने केएफसीसी के साथ कई बार बैठक भी की थी, लेकिन बात बन नहीं पाई। पिछले साल भी एसएस राजमौली की चर्चित ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ को भी कुछ ऐसी मुश्किल का सामना करना पड़ा था। कन्नड़ विरोधी टिप्पणी पर कुछ लोगों ने ऐक्टर सत्यराज से माफी की मांग की थी और फिल्म रिलीज में बाधा पहुंचाने की धमकी दी थी। कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कई वर्षों से विवाद है। कावेरी नदी के बेसिन में कर्नाटक का 32 हजार वर्ग किलोमीटर और तमिलनाडु का 44 हजार वर्ग किलोमीटर का इलाका आता है। दोनों ही राज्यों का कहना है कि उन्हें सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है। विवाद के निपटारे के लिए जून 1990 में केंद्र सरकार ने कावेरी ट्राइब्यूनल बनाया था, लंबी सुनवाई के बाद 2007 में फैसला दिया कि हर साल कावेरी नदी का 419 अरब क्यूबिक फीट पानी तमिलनाडु को दिया जाए, जबकि 270 अरब क्यूबिक फीट पानी कर्नाटक को दिया जाए।

कावेरी बेसिन में 740 अरब क्यूबिक फीट पानी मानते हुए ट्राइब्यूनल ने अपना फैसला सुनाया। इसके अलावा केरल को 30 अरब क्यूबिक फीट और पुड्डुचेरी को 7 अरब क्यूबिक फीट पानी देने का फैसला दिया गया। ट्राइब्यूनल के फैसले से कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल खुश नहीं थे और फैसले के खिलाफ तीनों ही राज्य एक-एक करके सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी नदी के पानी के बंटवारे के लिए एक मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि नदी के पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद ट्राइब्यूनल (CWDT) के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु को जो पानी मिलना था, उसमें कटौती की और बेंगलुरु की जरूरतों का ध्यान रखते हुए कर्नाटक को मिलने वाले पानी की मात्रा में 14.75 टीएमसी फीट का इजाफा किया।

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