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एक पैसे का सवाल है भाई, एक पैसे का

पूरा देश पेट्रोल – डीजल में बढे दाम की आगमें झुलुस रहा है और आइल कंपनीयां कब दाम कम करेंगी इसकी राह देख रहे करोडो लोगोकी आशा पर जैसे की जले पर निमक छिडकने के समान 16 दिन बाद दाम कम तो हुये लेकीन कितने…सिर्फ सिर्फ एक पैसा। एक पैसा वैसे तो एक रूपिये का सौंवा भाग होता है। एक एक पैसा जमा कर के सौ पैसे हो जाय तो एक रूपिया बनता है। यह गणित सही है। लेकीन जो दाम घटाये गये वह सही नहीं है और नहीं होंगे। भला ये भी कोइ कटौती है क्या? एक पैसा। और वो भी 16 दिन लगातार दाम धडाधड बढाने के बाद सिर्फ एक पैसा घटा कर वाकइ में भारतकी आयल कंपनीओने अपना दिवाला फूंक दिया। यदी एक पैसा भी कम नहीं करते तो कंपनीओ का क्या घाटा होता या क्या मुनाफा हुआ?

देश के प्रधानमंत्री जब विदेश में पतंग उडा रहे थे तब भारत में सरकारी आयल कंपनीया देश के प्रधानमंत्री का मानो मजाक उडा रही हो इस तरह सिर्फ 1 पैसा कम करके न सिर्फ प्रतिपक्ष बल्की सभी को सरकारकी तीखी आलोचना करने पर मजबूर कर दिया। जिसके लिये आयल कंपनीयां और इस विभाग के मंत्री महोदय भी जिम्मेवार हो शक्ते है। प्रधानमंत्री की गैर मौजुदगीमें मंत्री सरकार की शाख बचा नहीं पाये और 1 पैसा कम कर के ये तो 1 पैसेवाली सरकार है जी…ऐसा कहने का मौका दे दिया। विदेश गये प्रधानमंत्री को भी शायद बुरा तो लगा होगा और ये कैसे हुवा उसकी जांच भी चल रही होंगी।

यदी देखा जाय तो पेट्रोल और डीजल के उंचे दाम पिछले कइ दिनो से आम आदमी के लिये बोज समान बन गये है। युपीए के शासनमें बढते पेट्रोल-डीजल के दाम सरकार की विफलता थी तो अब इन चीजो के बढते दाम के लिये कौन जिम्मेवार है..? ये सवाल कोइ पूछे तो सरकार को अच्छा नहीं लगता। पेट्रोलियम मंत्री प्रधान का कहना है की पेट्रोल-डीजल के बढते दाम के लिये कच्चे तेल का अंतर्राष्ट्रीय बाजारमें बढते उंचे दाम जिम्मेवार है। अरे भाई, उस वक्त भी यही हाल था। लेकीन फिर भी सरकार को कोसा गया और जब अपनी बारी आयी तो बाजार पर ढोल दिया। हर किसी सरकार को अपना बचाव करने का अधिकार है। बचाव करे लेकिन उपभोक्ताओं को कुछ राहत तो मिले। राहत मिली तो कितनी…1 पैसे की. ये भी कोइ बात हुई क्या?

चुनाव सर पर है। सरकार फिर से जीतने के लिये हर संभव प्रयास कर रही है। तेल के दाम घटाना आवश्यक है। यदी ऐसा ही चलता रहेंगा तो क्या होगा ये आयल कंपनीयां जानती ही होंगी। आयल कंपनीयां अरबो-खरबो कमा रही है तब दाम कम करे। लोग परेशान है। और ये परेशानी दूर करने की जिम्मेवारी सरकार की है।

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