दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में सक्रिय नही दिखा हैं।

उपेन्द्र कुशवाहा

दो जून की रोटी, आज सोशल मीडिया पर दो जून की रोटी एक हास्य व्यंग्य के रूप में पिछले वर्ष सक्रिय था लेकिन इस वर्ष कही नही नजर नही आया । लेकिन, वास्तिवता में दो जून की रोटी का बहुत बड़ा महत्व है। 38 डिग्री सेल्सियस तापमान पर काम करने वाले एक मजदूर से दो जून की रोटी का महत्व पूछा जाए, तो इसकी मार्मिकता सामने आ जाएगी। इसलिए आज दो जून है और दो जून की रोटी जरूर खाइएगा।
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सोशल मीडिया पर वायरल संदेश

सोशल मीडिया पर आज दो जून की रोटी को लेकर संदेशों का आदान प्रदान होता था । पिछले वर्ष सोशल मीडिया पर लिखते हैं कि रोज हम 2 जून की रोटी पकाते हैं, आज 2 जून की रोटी हमें पका रही है। वहीं ऐसे कई लोग व्हाट्सएप और फेसबुक पर संदेश डाल रहे थे कि आज दो जून है रोटी समय से खा लें। वहीं कुछ संदेश आता था कि दो जून की रोटी बड़े नसीब बालों को मिलती है।

मुहावरों में है जवाब

आज दो जून, 2018 है। ये एक तारीख है। वहीं दो जून का अ​र्थ दोनों टाइम यानि सुबह और शाम से भी होता है। दो जून की रोटी का मतलब है दो समय की रोटी। दो बार भोजन। किसी ने एक पुस्तक लिखी, दो जून की रोटी। तभी से यह मुहावरा प्रचलन में आ गया।
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हंसने का भी बहाना

पडरौना के डॉक्टर राजेश सिंह  का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग हंसना भूल गए हैं। व्हाट्सएप और फेसबुक पर चल रहे ये संदेश लोगों को हंसाने में थोड़ा सी मदद कर रहे हैं।

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