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पाकिस्‍तान की सियासी रण में कूदा 26/11 हमले का मास्टरमाइंड

लाहौर : पाकिस्तान के आम चुनाव में मुंबई हमले का मास्टरमाइंड और भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद की पार्टी जमात उद दावा भी शिरकत कर रही है। हालांकि, इस आम चुनाव में वह खुद मैदान में नहीं है, लेकिन उसकी पार्टी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्‍सा ले रही है। इस चुनाव में आतंकी संगठन जमात उद दावा (जेयूडी) का दावा है कि 200 से अधिक उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे जाएंगे। पाकिस्‍तान के आम चुनाव में हाफिज की शिरकत के साथ भारत और अमेरिका समेत तमाम मुल्‍कों की नजर इस चुनाव पर टिकी है।

पाकिस्तान में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो चुका है। अब पाकिस्तान में 25 जुलाई को आम चुनाव होने हैं। फिलहाल पूर्व मुख्य न्यायाधीश नसीरुल मुल्क को वहां के कार्यवाहक प्रधानमंत्री चुने गए हैं। चुनाव आयोग में जमात-उद-दावा की पार्टी अभी तक रजिस्टर्ड नहीं है, इसलिए सईद ने अपने उम्मीदवारों को एक निष्क्रिय राजनीतिक पार्टी अल्लाह-हू-अकबर तहरीक (एएटी) से मैदान में उतारने का फैसला किया है। ये पार्टी पाक चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है। जमात-उद-दावा के उम्मीदवारों ने चुनाव आयोग से नॉमिनेशन पेपर ले लिए हैं।

अल्लाह-हू-अकबर तहरीक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) के प्रवक्ता अहमद नदीम ने बताया कि एमएमएल के अध्यक्ष सैफुल्लाह खालिद और एएटी के सदर अहसान बारी गठबंधन के लिए तैयार हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर उन्होंने कहा कि एमएमएल अपने 200 उम्मीदवार उतारेगा। एमएमएल के उम्मीदवार एएटी के चुनाव चिह्न पर आम चुनाव में मैदान में उतरेंगे। कई राजनेता एमएमएल से जुड़े हैं, जो एएटी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे।

लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी संगठन जमात-उद-दावा की राजनीतिक पार्टी का नाम मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) है। सईद जमात-उद-दावा का चीफ है। 2017 में जमात-उद-दावा ने मुस्लिम मिल्ली लीग का गठन किया था। पाक चुनाव आयोग ने इसका रजिस्ट्रेशन नहीं किया। इसलिए सईद ने निष्क्रिय राजनीतिक पार्टी अल्लाह-हू-अकबर तहरीक (एएटी) से अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। पिछले साल ही 30 जनवरी को हाफिज सईद को लाहौर में हिरासत में लिया गया था। हाफिज और उसके चार साथी अब्दुल्ला उबेद, मलिक जफर इकबाल, अब्दुल रहमान आबिद और काजी काशिफ हुसैन को घर में नजरबंद किया गया था।
पाकिस्‍तान में सक्रिय आतंकी संगठन जमात-उद-दावा का लश्कर-ए-तैयबा से गहरा रिश्‍ता है। भारत में मुंबई हमले के बाद यह आतंकी संगठन सुर्खियों में आया। इसके बाद जमात-उद-दावा अपने आंतकी वारदातों से विश्‍व पटल पर कुख्‍यात हो गया। मुंबई हमलों के बाद साल 2008 में संयुक्त राष्ट्र ने भी हाफिज के नाम को आतंकियों की सूची में डाला था। अमेरिका ने भी हाफिज के सिर पर 10 मिलियन डॉलर यानि 70 करोड़ रुपयों का इनाम रखा है।

मुंबई हमलों के बाद हाफिज को हाउस अरेस्ट भी किया गया था, लेकिन पाकिस्तानी कोर्ट ने उसे आजादी मिल गई थी। अंतरराष्‍ट्रीय दबाव के चलते इस साल 30 जनवरी से 22 नवंबर को एक बार फिर नजरबंद किया गया था। आतंकी हाफिज पाकिस्तान की नई नस्ल की रगों में हिंदुस्तान के खिलाफ जहर घोलता है। घाटी को आतंक का जख्म देने का जिम्मेदार भी हाफिज है और आतंक के इसी खेल को हाफिज पाकिस्तान की राजनीति में बैठ करना चाहता है, ताकि उसके कारनामें दुनिया की नज़रों से बचे रहे।

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