ब्रिटेन को एक चेतावनी देना जरूरी

यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास के सबसे दमनकारी अत्याचारों की वजहरॉलेट द्वारा निर्मित और उनके नाम से प्रसिद्ध कानून था। इस कानून को रॉलेट एक्ट के नाम से जाना जाता है और 13 अप्रैल 1919 को नृशंस जलियाँवाला बाग हत्याकांड की वजह यही कानून था।महात्मा गांधी ने रॉलेट एक्ट के खिलाफ ही अपने पहले अहिंसक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। तब तक उनका शुमार भारतीय राष्ट्रीय नेताओं की अग्रणी पंक्ति में नहीं हुआ था.इस कानून के तहत साम्राज्य के खिलाफ षड्यंत्र के महज शक के आधार पर नागरिक अधिकारों को छीन लेने का प्रावधान था और, इसके मायने ये थे कि किसी राजद्रोही अखबार की एक प्रति रखने पर भी बिना किसी मुकदमे के दो साल की सजा हो सकती थी।इसी कानून का विरोध करने के लिए गांधी के आह्वान पर हजारों भारतीय 13 अप्रैल 1919 को चहारदीवारी से घिरे जलियाँवाला बाग में जमा हुए।

आज लगभग एक सदी बाद भी यह अमृतसर की उस बेहद शर्मनाक और क्रूर घटना को याद रखना जरूरी है कैसे सिपाहियों ने आंदोलनकारियों को सीधा निशाना बनाया था. वे 10 मिनट तक गोलियां बरसाते रहे, 1650 राउंड गोलियां चलीं और 379 लोग मार डाले गए (गैर-सरकारी भारतीय स्रोतों के मुताबिक मृतकों की संख्या कहीं अधिक थी).इस नरसंहार में 1137 लोग घायल हुए। षष्टी चरण मुखर्जी के पोते ने मुझे वह कुआं भी दिखाया जहां कई लोग अपनी जान बचाने के लिए कूद गए थे। बाद में कुएं से 120 शव निकाले गए।तो इस सब से ब्रिटेन के प्रति भारत के रवैये के बारे में हमें क्या पता चलता है?

अब ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि जिस देश का इतिहास ही काला हो वह भारत के आर्थिक लूटेरो को शरण देने से क्यो बाज आएगा। ललित मोदी और विजय माल्या के बाद नीरव मोदी का अगला पता भी अब शायद ब्रिटेन ही होगा। खबर है कि पंजाब नेशनल बैंक से 280 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाले नीरव मोदी ने ब्रिटेन में राजनीतिक शरण पाने के लिए अर्जी दी है। पश्चिम के जो देश राजनीतिक शरण के नाम पर हमेशा से विवाद में रहे हैं, उनमें ब्रिटेन भी एक है। दुनिया भर के अतिवादी तत्व और यहां तक कि अपराधी और कभी-कभी तो आतंकवादी अपने देश में राजनीतिक कारणों से सताए जाने की दुहाई देकर इन देशों में शरण पाते रहे हैं। अब अगर राजनीतिक शरण के प्रावधान आर्थिक घोटालेबाजों का भी सहारा बन गए हैं, तो इसका अर्थ हुआ कि ब्रिटेन में इन प्रावधानों के अधिकतम संभव दुरुपयोग की जमीन तैयार हो चुकी है।

आर्थिक घोटाले करने के बाद भी ललित मोदी और विजय माल्या वहां बेखौफ ऐशो-आराम भरी जिंदगी जी रहे हैं। जाहिर है कि उनके उदाहरणों ने नीरव मोदी को भी ब्रिटेन की शरण में जाने की प्रेरणा दी होगी। ऐसे में भारत सरकार विश्वमंच पर ब्रिटेन को खुली चेतावनी देनी चाहिए कि आज जो वह कर रहा है वही सब भारत भी कर सकता है। आज से 70 साल पूर्व और आज के भारत में काफी बदलाव आ चुका है।

हालांकि इस मामले में ब्रिटेन के कायदे-कानून, उनके उपयोग-दुरुपयोग और आर्थिक व अन्य तरह के अपराधियों को उनसे मिलने वाले बच निकलने के रास्ते,आसन है। लेकिन इन सब के बावजूद अगर भारत उन भगोड़ों के प्रत्यर्पण में नाकाम रहते हैं, तो यह कई तरह से हमारी नाकामी का मामला भी है। आर्थिक या अन्य अपराधियों के मामले में प्रत्यर्पण दो तरह से कामयाब हो पाता है। एक तो प्रत्यर्पण संधि से और दूसरा इस बात से कि आप उस देश पर कितना अंतरराष्ट्रीय दबाव बना पाते हैं, जहां आपके अपराधी छिपे बैठे हैं। हालांकि प्रत्यर्पण संधि ही अपने आप में पर्याप्त नहीं होती, प्रत्यर्पण से पहले उस देश की अदालतों में साबित करना होता है कि यह शख्स वाकई अपराधी है और इसे पकड़कर वापस ले जाने में कोई राजनीति नहीं है।

ललित मोदी और विजय माल्या के मामले में हम बावजूद दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि के, अभी तक ब्रिटेन की अदालतों को ऐसा भरोसा दिलाने में कामयाब नहीं हो सके हैं। और सिर्फ आर्थिक अपराधी ही नहीं, गुलशन कुमार हत्याकांड मामले में तो हम संगीतकार नदीम सैफी का प्रत्यर्पण भी नहीं करा सके। सबसे गंभीर मामला तो 1993 के दो विस्फोटों के आरोपी हनीफ टाइगर का है, जिसका प्रत्यर्पण बावजूद सीधा-सीधा आतंकवाद का मामला होने के, अभी तक कानूनी उलझनों में अटका पड़ा है।अरबों रुपये की बैंक धोखाधड़ी के आरोपों से घिरे हीरा कारोबारी नीरव मोदी के ब्रिटेन में होने की खबर के बाद एजेंसियों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय को इस संबंध में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है।

पुष्ट रिपोर्ट आने के बाद विदेश मंत्रालय ब्रिटेन सरकार से प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है।ज्ञात हो कि नीरव पर अपने मामा मेहुल चैकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक के साथ 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का आरोप है। इसी तरह भारतीय भगोड़ा रवि शंकरन नेवी वॉर रूम लीक मामले का मुख्य आरोपी है। वर्ष 2010 में इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद शंकरन ने लंदन में सरेंडर कर दिया था। बॉलीवुड में संगीतकार रहे सैफी की जोड़ी नदीम-श्रवण के रूप में काफी प्रसिद्ध रही। टी-सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार की हत्या मामले में नाम आने के बाद नदीम ब्रिटेन भाग गए।. 12 अगस्त 1997 को मुंबई में एक मंदिर के बाहर गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में सह-संदिग्ध के तौर पर नदीम सैफी को नामजद किया गया। वर्ष 2000 में नदीम ने ब्रिटेन में जाकर शरण ले ली।अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम के करीबी टाइगर हनीफ को भारत प्रत्यर्पित करने के आदेश पिछले दिनों ब्रिटेन की एक अदालत ने दिया था, लेकिन उसे अभी तक नहीं लाया जा सका। उसे 2010 में ग्रेटर मैनचेस्टर से गिरफ्तार हुआ।

हनीफ टाइगर बाबरी विध्वंस कांड के बाद सूरत में वर्ष 1993 में हुए दो बम धमाकों में वॉन्टेड है। वर्ष 1993 में ही हनीफ भारत छोड़कर ब्रिटेन भाग गया था।आईपीएल के पूर्व आयुक्त और कारोबारी ललित मोदी धनशोधन मामले में देश से फरार चल रहे हैं। मोदी 2008 से 2010 तक आईपीएल के कमिश्नर रहे थे। दो नई टीमों की नीलामी के दौरान गलत तरीके अपनाए और मॉरिशस की कंपनी वर्ल्ड स्पोर्ट्स को 425 करोड़ में आईपीएल का ठेका दिया, जिसके बदले 125 करोड़ का कमीशन लिया।देश का बड़ा शराब कारोबारी विजय माल्या दो साल पहले देश छोड़कर ब्रिटेन भाग गया था। फिलहाल माल्या ब्रिटेन की अदालत में भारत प्रत्यपर्ण किए जाने संबंधी मामले का सामना कर रहा है। विजय माल्या पर देश के कई सरकारी और निजी बैंकों से करीब 9 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। भारत में अपराध करने के बाद किसी अमेरिकी या यूरोपीय देश में शरण लेने का सिलसिला कई सालों से चल रहा है।

इस मामले में ब्रिटेन भारत के लिए मोस्टवांटेड अपराधियों के लिए सबसे बड़ा शरणगाह बन चुका है।टाइगर हनीफ, नदीम सैफी से लेकर विजय माल्या और नीरव मोदी तक ने देश में बड़े अपराध को अंजाम देने के बाद ब्रिटेन में सुरक्षित आसरा खोज लिया। कानूनी बंदिशों के चलते इन अपराधियों को वापस भारत लाना फिलहाल संभव नहीं हो सका है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां और सरकारें लगातार इनके प्रत्यर्पण की कवायद में जुटी हुई हैं। भार के लिए अब ऐसे मामलों में ब्रिटेन पर भी दबाव बनाने और बढ़ाने का समय है। दुनिया भर के अपराधी अगर ब्रिटेन में शरण लेने लग गए, तो यह उसके लिए तो गड़बड़ होगा ही, उसकी छवि भी इससे अच्छी नहीं बनेगी। तरह-तरह के आतंकवादियों को शरण व प्रशिक्षण देने वाले पाकिस्तान का खुद का हाल क्या हुआ है, यह हम पिछले कई साल से देख ही रहे हैं। अगर एक देश के अपराधी दूसरे देश में शरण लेकर दंड से बच सकते हैं, तो इसका अर्थ है कि जिसे हम ग्लोबलाइजेशन कह रहे हैं, उसकी अवधारणा में नैतिकता के लिए कोई जगह नहीं है।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.