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कांग्रेसी नेताओं के बढ़ते आत्मघाती बयान

लोक सभा चुनाव की तिथि ज्यो ज्यो नजदीक आ रही है, बयान वीरों के संयम खत्म होता जा रहा है। वैसे तो हर दल के नेता के मुंह से ऐसे बयान सामने आते है कि सुनकर उनकी बुद्धि और सोच पर तरस आता है। लेकिन देश की सबसे बड़ी और लम्बे अरसे तक देश पर राज करने वाली कांग्रेस के युवा सम्राट राष्ट्रीय अध्यक्ष दिल्ली के एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था कि आप मुझे बताओ कि कोका-कोला कंपनी को किसने शुरू किया? कौन था ये? कोई जानता है? मैं आपको बताता हूं कि कौन थे? कोका-कोला कंपनी को शुरू करने वाला एक शिकंजी बेचने वाला व्यक्ति था। वो अमरीका में शिकंजी बेचता था। पानी में चीनी मिलाता था। उसके अनुभव, हुनर का आदर हुआ। पैसा मिला और कोका-कोला कंपनी बनी। मैकडॉनल्ड कंपनी को किसने शुरू किया? कोई बता सकता है।

वो ढाबा चलाता था। आप मुझे हिंदुस्तान में वो ढाबावाला दिखा दो, जिसने कोका-कोला कंपनी बना दी हो। कहां है वो?इस बयान के बाद राहुल गांधी की भारी किरकिरी हुई। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर रहते राहुल द्वारा यह कहना कि ‘‘ इस देश को इस्लामिक नही बल्कि हिन्दु आतंकियों से ज्यादा खतरा है। जो मंदिर जाते है, लड़किया छेडते है। इसके पहले चंडीगढ़ के एक विश्वविद्यालय में 11 अक्टूबर, 2012 को भाषण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यूरोप के राजदूत ने कहा कि आने वाली सदी भारत की है क्योंकि यहां ह्यूमन रिसोर्स बहुत अच्छा है। लेकिन पंजाब के ह्यूमन रिसोर्स का क्या हो रहा है. यहां 10 में से सात युवा नशे की गिरफ्त में हैं। भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने 14 नवंबर 2011 को फूलपुर से यूपी असेंबली चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत करते हुए एक रैली को संबोधित किया था।

इसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि यूपी के युवा कब तक आप जाएंगे और पंजाब और दिल्ली में मजदूरी करते रहेंगे। कब तक आप महाराष्ट्र में भीख मांगते रहेंगे। 16 अप्रैल, 2007 को एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा, ‘‘एक बार मेरा परिवार कुछ करने का फैसला कर ले तो उससे पीछे नहीं हटता। चाहे यह भारत की आजादी हो, पाकिस्तान का बंटवारा या फिर भारत को 21वीं सदी में ले जाने की बात हो। इसी तरह कठुआ गैंगरेप और उन्नाव रेप पर जहां देश पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहा है, वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने इस मामले में बेतुका बयान दिया।

कमलनाथ ने कहा था कि मैंने कहीं पढ़ा था कि भारतीय जनता पार्टी के ऐसे 20 नेता हैं जो बलात्कार से जुड़े हैं। अब जनता को सोचना होगा कि अब इस पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी होना चाहिए या बलात्कार जनता पार्टी। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा अब बेटी छिपाओ, बलात्कारियों से बचाओ में तब्दील हो गया है। कमलनाथ ने मेक इन इंडिया का भी माखौल उड़ाया और कहा कि जनता तय करे कि इसे मेक इन इंडिया की बजाए रेप इन इंडिया कहे या नहीं।अब ताजा मामला आतंकियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज और गुलाब नबी आजाद का है। यह कहना गलत न होगा कि कांग्रेस नेताओं को जिस तरह से जनता के दिल में जगह बनाने के लिए बयान और काम करना चाहिए वह उस हिसाब से वह काम नही कर पा रही है।

कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज की ओर से पाकिस्तान के पूर्व सेनाध्यक्ष परवेज मुशर्रफ के नजरिये से सहमति जताना और गुलाम नबी आजाद का यह कहना आग में घी डालने के अलावा और कुछ नहीं कि घाटी में सेना के आतंक विरोधी अभियान में आतंकी कम और आम नागरिक ज्यादा मारे जा रहे हैं। वह यहां तक बोल गए कि सेना चार आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करती है और 20 नागरिक मार देती है। समझना कठिन है कि ऐसा बेतुका बयान किस इरादे से दिया गया? कहीं वह ऐसे बयान देकर जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत तो नहीं करना चाह रहे हैं? सैफुद्दीन सोज तो यह कह सकते हैं कि कश्मीर पर उनके विचार उनकी निजी राय हैं, लेकिन आखिर राज्यसभा में कांग्रेस के नेता प्रमुख गुलाम नबी आजाद क्या सफाई देंगे? उनका बेतुका बयान कितना आत्मघाती है, यह इससे प्रकट हो रहा है कि आतंकी संगठन लश्कर ने भी उससे सहमति जता दी।

बेहतर हो कि गुलाम नबी आजाद ही यह स्पष्ट करें कि वह आतंकी संगठन सरीखी भाषा क्यों बोल रहे हैं? इसमें संदेह है कि इतना भर कहने से कांग्रेस का काम बन जाएगा कि उन्होंने जो कुछ कहा वह तो आम लोगों के प्रति उनकी चिंता को व्यक्त करता है। गुलाम नबी आजाद को यह पता होना चाहिए कि सेना की आतंक रोधी कार्रवाई के दौरान आम तौर पर वही कथित नागरिक निशाना बनते हैं जो आतंकियों के बचाव में पत्थरबाजी करते हैं। आखिर आतंकियों की घेरेबंदी के दौरान सेना के काम में खलल डालने और यहां तक कि उस पर पत्थर बरसाने वाले आम नागरिक की परिभाषा में कैसे आ सकते हैं? क्या इससे बड़ी विडंबना और कोई हो सकती है कि सैन्य अधिकारी जिन तत्वों को आतंकियों का समर्थक मानते हैं उन्हें कांग्रेसी नेता आम नागरिक बता रहे हैं? यह तो एक तरह से पत्थरबाजों की वैसी ही हिमायत है जैसी मुख्यमंत्री रहते समय महबूबा मुफ्ती करती रहती थीं। यह बाॅत कांग्रेस भी अच्छी तरह से जानती है कि पाकिस्तान को लेकर भारत की जनता में भारी आक्रोष है। उसकी नापाक हरकते लगातार जारी है।

ऐसे में क्या जनता की मंशा के विपरीत बयान देकर कांग्रेसी नेता जनता से नजर मिला पाएगे।इसमें दोराय नहीं कि कश्मीर में आतंकियों की घेरेबंदी के दौरान अथवा उनका मुकाबला करते समय यदा-कदा आम नागरिक भी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आ जाते हैं। जैसे गत दिवस अनंतनाग में चार आतंकियों को ढेर करते वक्त एक व्यक्ति क्रास फायरिंग में मारा गया, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि सेना आम लोगों की चिंता नहीं करती। कम से कम गुलाम नबी आजाद को तो यह जानकारी होनी ही चाहिए कि सुरक्षा बलों को किस तरह उग्र भीड़ के जमावड़े के कारण अपने अभियान स्थगित करने पड़ते हैं। उन्हें इससे भी अवगत होना चाहिए कि यह भारतीय सेना ही है जो आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान उनके परिजनों को बुलाकर उनसे यह एलान कराती है कि वे हथियार डाल दें। कश्मीर को तबाह कर रहे आतंकियों के खिलाफ नरमी बरतने का कोई मतलब नहीं।

यह अच्छा हुआ कि कश्मीर में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का एक दस्ता इस इरादे से भेजा गया है ताकि आतंकियों से मुठभेड़ के वक्त कम से कम जनहानि हो। यदि कांग्रेसी नेता राष्ट्रीय हितों की पैरवी नहीं कर सकते तो फिर उन्हें आतंकियों से जूझते सुरक्षा बलों का मनोबल गिराने वाला काम करने से तो बचना ही चाहिए। बाकी मामलों में दिये गए कांग्रसियों के बयान को राजनैतिक प्रतिस्पर्धा मान भी लिया जाए तो राष्ट्र हित के मामले में इस तरह से खुले आम आतंकियों की वकालत करने वाले बयान कांग्रेस के लिए चिन्ता की बाॅत है। एक तरफ जहाॅ वह 2019 की तैयारी कर रही है वही इस तरह के बयान उसके लिए आत्मघाती साबित हो सकते है।

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