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जब केंद्रीय मंत्री ने आदिवासियों को प्रेरित करने के लिए कहा, ‘विजय माल्या जैसे स्मार्ट बनो‘

हैदराबाद । केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल उरांव ने आदिवासियों को प्रेरित करने के लिए देश के भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या से प्रेरित होने की सलाह दी है। शुक्रवार को जुएल उरांव एक कार्यक्रम में आदिवासियों को संबोधित करते हुए उन्हें उद्यमिता के प्रति प्रोत्साहित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने जनजातीय लोगों से कहा, सिर्फ हार्ड वर्कर मत बनो, स्मार्ट वर्कर बनो।

इस दौरान मंत्री जी ने लोगों के प्रेरित करने के लिए भारतीय बैंकों के हजारों करोड़ रुपये लेकर भागे शराब कारोबारी विजय माल्या का उदाहरण पेश किया। उरांव ने कहा कि विजय माल्या ने गलत कामों में फंसने से पहले अपने बिजनेस को सफल बनाया था। उसकी उस सफलता से प्रेरित होना चाहिए।

जुएल उरांव हैदराबाद में आयोजित पहली राष्ट्रीय जनजातीय उद्यमी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने अपने भाषण में कहा, आप विजय माल्या को गाली देते हैं। लेकिन कौन है विजय माल्या? वह एक कुशल (स्मार्ट) व्यक्ति है। उसने कुछ बुद्धिमान लोगों को काम पर रखा और फिर बैंकों, राजनीतिज्ञों, सरकार… को अपने प्रभाव में लिया। ऐसा करने (स्मार्ट बनने से) से आपको कौन रोकता है? आदिवासियों से किसने कहा है कि सिस्टम पर अपना प्रभाव मत दिखाओ। आपको किसने रोका है कि आप बैंकों को प्रभावित मत करो।

इस सम्मेलन में उन्होंने आदिवासियों को बताया कि अगर आदिवासी होने का कुछ नुकसान है, तो इसके कुछ फायदे भी हैं। जैसे आदिवासियों के लिए शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सुविधा है। वे इसका लाभ उठा कर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

उरांव के मुताबिक, आदिवासी होने का नुकसान यह है कि अगर कोई आदिवासी अपने जीवन में सफल भी होता है, तो उसे वह पहचान नहीं मिलती, जिसका वह हकदार है। उनकी कामयाबी को भी लोग आरक्षण से जोड़कर देखते हैं और इस नजरिए के कारण उनके साथ अलग व्यवहार करते हैं। इसके कारण ज्यादातर आदीवासी खुद के साथ भेदभाव महसूस करते हैं। उरांव ने कहा कि इस कारण कई आदिवासी अपना सरनेम भी छिपाने लगे हैं।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उरांव ने कहा, श्हमें उद्यमी बनना चाहिए, हमें इंटेलिजेंट बनना चाहिए। हमें स्मार्ट बनना चाहिए। हमें जानकारियां प्राप्त करनी चाहिए। जानकारी ही ताकत है। जिसके पास सही जानकारी है, उसी के पास ताकत है। बता दें इस कार्यक्रम में 1000 से ज्यादा आदिवासाी उद्यमी मौजूद थे।

इस कार्यक्रम में तेलंगाना के वित्त मंत्री इटाला राजेंद्र भी मौजूद थे। इस मौके पर इटाला ने कहा कि बैंक भी आदिवासियों के साथ भेदभाव करते हैं। आदिवासियों को ऋण देने में वह आनाकानी करते हैं उन्हें अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए। उन्होंने भी माल्या का उदाहरण देते हुए कहा कि बैंक माल्या जैसे कारोबारी को हजारों करोड़ का ऋण देते हुए कुछ नहीं सोचते, लेकिन ईमानदार आदिवासी को वह 1 करोड़ का ऋण देने में भी हिचकिचाते हैं। बैंकों को अपना रवैया बदलना चाहिए।

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