Advertisements

स्तंभेश्वर भगवान शिव का मंदिर : यह मंदिर दिन में दो बार हो जाता है गायब, देखें वीडियो

Gujrat . भगवान शिव के मंदिरों में लोग पूजा करने के लिए तो जाते ही हैं वहीं कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी अनोखी खासियत की वजह से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इन मंदिरों को देखने के लिए देशी और विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है. हम आपको यहां इन्हीं में से एक खास मंदिर के बारे में बता रहे हैं जहां लोग पूजा करने के साथ ही इन मंदिर की अनोखी खासियत की वजह से यहां आते हैं. विदेशी पर्यटकों को तो ये मंदिर बहुत पसंद आता है. गुजरात के वड़ोदरा से कुछ दूरी पर जंबूसर तहसील के कावी कंबोई गांव में भगवान शिव का यह मंदिर दिन में दो बार गायब हो जाता है.

स्तंभेश्वर महादेव के इस मंदिर को लोग गायब होने वाले मंदिर के नाम से पहचानते हैं. जो पर्यटक यहां घूमने के लिए आते हैं वे ये देखकर हैरान रह जाते हैं कि कैसे सुबह और शाम कुछ पलों के लिए दिन में ये मंदिर देखते ही देखते उनकी आंखों से ओझल हो जाता है. कुछ समय बाद ये वापस उसी स्थान पर नजर आने लगता है.

स्तंभेश्वर महादेव का मंदिर गुजरात राज्य के भरूच जिले की जम्बूसर तहसील के कवि कम्बोई नामक गांव में स्थित हैं. यह स्थान गुजरात के वडोदरा से लगभग 60 कि.मी. दूर हैं. कवि कम्बोई नामक गांव में स्थित स्तंभेश्वर महादेव का मंदिर रहस्यमयी हैं. मंदिर के मुख्य पुजारी के अनुसार इस मंदिर में स्थित शिवलिंग का समुद्र दिन में दो बार जलाभिषेक करता हैं. ये परम्परा सदियों से चली आ रही हैं.

स्तंभेश्वर महादेव के मंदिर में 4 फीट लम्बा और 2 फीट व्यास वाला शिवलिंग स्थित हैं. ये मंदिर अरब सागर में खंभात की खाड़ी के किनारे कैम्बे तट पर स्थित हैं.

शिवपुराण में उल्लेख

भगवान शिव से जुड़े इस तीर्थस्थल का उल्लेख ‘शिवपुराण’ के रुद्रसंहिता भाग द्वितीय के अध्याय ग्यारह में भी मिलता हैं. इस मंदिर की खोज लगभग 150 साल पहले की गयी थी. तब से लेकर आज तक यहाँ पर हर दिन हजारों श्रद्धालु आते हैं. मंदिर के पीछे की तरफ अरब सागर होने की वजह से इस मंदिर के सौन्दर्य में चार चाँद लग जाते हैं. मंदिर हर दिन 2 बार लगभग समुद्र में गायब ही हो जाता हैं.

पौराणिक कथा

स्कंध पुराण के एक वृतांत अनुसार जन्म के छ दिन बाद भगवान शिव के बड़े बेटे कार्तिकेय को देवसेना के सेनापति के रूप में नियुक्त कर दिया गया. ये वो समय था जब देव, ऋषि-मुनि, आमजन और देवसेना ताड़कासुर नामक राक्षस के आतंक से भयभीत थे. जब ये बात कार्तिकेय को पता चली तो उन्होंने ताड़कासुर का वध कर दिया. ताड़कासुर के वध के बाद कार्तिकेय को ज्ञात हुआ कि ताड़कासुर भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. इससे उनका मन व्यथित हो गया. उन्होंने भगवान विष्णु को अपने मन की पीड़ा सुनाई तो विष्णु जी ने सलाह दी कि वधस्थल पर भगवान शिव का मंदिर बना दो. कार्तिकेय ने ऐसा ही किया. समस्त देवतागणों ने महिसागर संगम तीर्थ पर विश्वनंदक स्तंभ की स्थापना की. पश्चिम भाग में स्थापित स्तंभ में स्वयं भगवान शिव विराजित हुए. तब से ही इस तीर्थस्थल को स्तंभेश्वर कहा जाता हैं. इसी जगह पर नदी महिसागर का संगम अरब सागर से होता हैं.

गायब होने का रहस्य

कहानी के अनुसार इस मंदिर में स्वयं भगवान शिव रहते हैं तो उनका जलाभिषेक समुद्र स्वयं करता हैं. इस समुद्र में दिन में दो बार ज्वार आता हैं. ज्वार आने के समय सम्पूर्ण मंदिर लगभग गायब हो जाता हैं. ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर से दिखाई दे जाता हैं. मंदिर के पुजारियों के अनुसार उन्होने पर्चे बँटवा दिए हैं जिनमे ज्वार के आने का वक्त लिखा हैं. ऐसे में आने वाले श्रद्धालुओं को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता हैं. स्तंभेश्वर महादेव मंदिर में सागर द्वारा किया जाने वाला शिवशंभु का जलाभिषेक भी अलौकिक हैं.

Advertisements
Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.