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अधिनस्त महिला कर्मिक के साथ अश्लील आचरण करने के आरोपी है कुशीनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी

पूर्व मे गाजीपुर जनपद मे तैनात रहे जिला समाज कल्याण अधिकारी त्रिनेत्र कुमार सिंह पर लगा है अपने अधिनस्त महिलाकर्मिक के साथ अशोभनीय/ अश्लील आचरण प्रदर्शित करने, दूरभाष के जरिये महिला कर्मिक को अपने आवास पर आने के लिए दबाब बनाने और शासकीय सेवक के रुप मे पद की मर्यादा के विपरीत आचरण प्रदर्शित करने का आरोप। जांच मे प्रथम दृष्टया दोषी पाये जाने पर शासन ने किया था निलम्बित।

उपेंद्र कुशवाहा
पडरौना,कुशीनगर । अपने अधिनस्त महिला कर्मिक के साथ अशोभनीय व अश्लील हरकत करने व दूरभाष के जरिये महिलाकर्मी को अपने आवास पर आने के लिए दबाव बनाने के आरोप मे निलम्बित हुए त्रिनेत्र कुमार सिंह किस आधार पर जिला समाज कल्याण अधिकारी बने बैठे है अपने आप मे एक सवाल है ।
अधिनस्त महिला कर्मिक के साथ अश्लील आचरण करने के आरोपी है कुशीनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी
बताया जाता है कि जिलाधिकारी कुशीनगर के  समक्ष अपर निदेशक समाज कल्याण के पत्र का हवाला देकर वो कार्यभार ग्रहण किए है जबकि स्थानांतरण व तैनाती  मुख्यमंत्री सहमति के बिना सम्भव नहीं है। ऐसे मे समाज कल्याण विभाग के अपर निदेशक का वह पत्र  संदिग्ध के घेरे मे है । अपर निदेशक का वह पत्र अगर सही है तो यह समझने के लिए काफी है कि  सूबे की मुखिया योगी आदित्यनाथ का खौफ अधिकारियों पर नहीं है और अगर यह आदेश सिंह द्वारा कूटरचित है तो यह कहने की जरूरत नही है कि यह किसी गम्भीर अपराध से कम नहीं है।
गौरतलब है कि वर्तमान समय मे कुशीनगर जनपद मे कार्यरत जिला समाज कल्याण अधिकारी  त्रिनेत्र कुमार सिंह पर पूर्व मे गाजीपुर जनपद मे बतौर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर रहते हुए अपने अधिनस्त  महिला कर्मिक अधीक्षिका अनुसूचित जाति छात्रावास  के साथ अशोभनीय एव अश्लील आचरण प्रदर्शित करने, दूरभाष के जरिये उक्त महिला  कर्मिक को अपने आवास पर आने के लिए दबाव बनाने.कार्यालय के समय दूरभाष पर अशासकीय  वार्ता करने, शासकीय सेवक के रूप मे पद की मर्यादा के विपरीत आचरण प्रदर्शित करने एवं उ०प्र० सरकार सेवक आचरण नियमावली-1956 के नियम-(3)3ए के उल्घन करने के आरोप मे प्रथम दृष्टया त्रिनेत्र कुमार सिंह को दोषी पाये जाने के उपरान्त शासन ज्ञापसंख्या- 643/26-1-2018(28)/2017 दिनाक-05 जून-2018 द्वारा निलम्बित कर निदेशालय समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ से सम्बद्ध कर दिया गया । और त्रिनेत्र कुमार सिंह पर लगे आरोपो की जांच संयुक्त निदेशक उ०प्र० लखनऊ आर.के.सिंह को सौंपी गई।
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महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी  जांच प्रक्रिया पूरी भी  नहीं हुई थी कि श्री सिंह की पत्नी के अनुरोध पर शासन द्वारा नामित जांच अधिकारी आर.के.सिंह के जांच आख्या के बिना ही समाज कल्याण  अनुभाग-1संख्या- मंत्री 43/26-1-18-4(28)2017 दिनांक-29 जून-2018 को यह आदेश पारित किया गया कि ” त्रिनेत्र कुमार सिंह तत्कालिन जिला समाज कल्याण कुशीनगर सम्प्रति सम्बद्ध निदेशालय समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ अन्तरिम रूप से सेवा बहाल करते हुए श्री सिंह के विरुद्ध  संस्थित अनुशासनिक कार्यवाही  को पूर्ववत गतिमान रखे जाने की श्री राज्यपाल सहर्ष स्वीकार प्रदान करते है।
इसमें यह आदेश भी  निहित है कि सम्बद्धता बहाली के पश्चात भी  निदेशालय समाज कल्याण  उ०प्र० लखनऊ मे श्री सिंह अनवरत रहेंगे। ऐसे मे सवाल उठना लाज़िमी है कि फिर श्री सिंह किस आधार पर कुशीनगर जनपद का जिला समाज कल्याण अधिकारी बने बैठे है जबकि शासन के बहाली आदेश के अनुसार इनकी सम्बद्धता निदेशालय समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ मे अनवरत है। सूत्रो की माने तो सशर्त बहाली के बाद श्री सिंह ने जिलाधिकारी कुशीनगर के समक्ष अपर निदेशक समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ पीसी उपाध्याय का पत्र संख्या -693-96/सं०क०/स्था०-1/2016-19 दिनांक-29-06-2018 प्रस्तुत कर जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्य कर रहे है । इतना ही नहीं सूत्रो की माने तो जिले के उच्चाधिकारियो को अपने विश्वास मे लेकर त्रिनेत्र कुमार सिंह कई महीने तक जनपद के नेबुआ नौरंगिया व्लाक के खण्ड विकास अधिकारी  का प्रभार भी हथियाये हुए थे। जानकारो की माने तो शासन द्वारा निलम्बन के बाद स्थानांतरण एवं तैनाती मुख्यमंत्री उ०प्र० सरकार के सहमति के उपरान्त ही किया जाता है। ऐसे मे मुख्यमंत्री के बिना सहमति पर श्री सिंह के किए बहाली और तैनाती पर न सिर्फ सवाल उठना लाजमी है वल्कि आधिकारियो मे सूबे के मुखिया का तनिक भी  खौफ नहीं है यह प्रकरण इस बात की ओर भी इशारे करती है।
ऐसे  मे अपर निदेशक समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ श्री उपाध्याय का वह पत्र गम्भीर जांच का विषय है जिसके आधार त्रिनेत्र कुमार सिंह जिला समाज कल्याण अधिकारी का पूर्णकालिक चार्ज सम्भाले हुए है। अगर श्री उपाध्याय ने यह आदेश पत्र जारी किया है तो अपने उच्चाधिकारियो और सरकार को ठेगा दिखाते हुए नियम विरुद्ध आदेश जारी  किया  है और अगर अपर निदेशक श्री उपाध्याय ने वह आदेश जारी नहीं किया  है तो स्वभाविक है श्री सिंह  कूटरचित तरीके से फर्जी आदेश के तहत अधिकारियों को गुमराह कर न सिर्फ जिला समाज कल्याण अधिकारी का पद हथियाये बैठे है बल्कि गम्भीर आरोपो मे घिरे अपने कुकर्म पर पर्दा डालने का प्रयास भी किया है।
  •  मुख्यमंत्री के पोर्टल पर की गई है शिकायत
कुशीनगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी के इस प्रकरण को विशेषाधिकार समिति के सभापति व भाजपा विधान मण्डल के उपनेता सहित तीन लोगों ने मुख्यमंत्री के शिकायती पोर्टल पर आनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करायी है। क्रमशः शिकायती संख्या- 60000180039777 राघवेन्द्र सिंह समाज सेवी हिन्दू महासभा, 18157180158065 डा० यज्ञदत्त शर्मा सभापति विशेषाधिकार समिति व उपनेता भाजपा विधान मण्डल दल, एवं शिकायत संख्या-40018918020178 आदि शिकायती पत्रो मे मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए मामला की जांचकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया  है।

 

  • मामले को घुमाने का किया जा रहा प्रयास

मुख्यमंत्री पोर्टल पर की गई शिकायत के बाद अपर निदेशक समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ पीसी उपाध्याय ने पत्र संख्या-814-181/स०क०/स्था०-1वै०पत्रा०24/2018-19 जिलाधिकारी कुशीनगर को जांच करने का आदेश दिया। यह कहना होगा कि उक्त पत्र मे सबसे उपर प्रेषक- निदेशक समाज कल्याण उ०प्र० लखनऊ अंकित है जबकि नीचे हस्ताक्षर अपर निदेशक समाज कल्याण पीसी उपाध्याय का हस्ताक्षर दर्ज है। यह वह अपर निदेशक है जिनके  हस्ताक्षर युक्त पत्र का हवाला देकर त्रिनेत्र कुमार सिंह यहा जिला समाज कल्याण अधिकारी का कार्यभार सम्भाला हुए है। ऐसे  मे जिनके पत्रो की जांच की माँग की जा रही है और जांच निदेशालय से होना उसे जिलाधिकारी द्वारा जांच करने का मतलब क्या। यह सवाल अपने आप मे कुछ और इशारे करती है।

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