Advertisements

रावण से जुड़े रहस्यों में है रोमांच ही रोमांच

राम जी को जब रावण को हराने के लिए समुद्र पार कर लंका जाना था, तब काम शुरू करने के एक रात पहले उन्होंने यज्ञ की तैयारी की और रामेश्वरम में भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया। इसमें रावण ही पुरोहित बना था।रावण को अपने दस सिरों की वजह से दशग्रीव कहा जाता है जो उसकी अद्भुत बुद्धिमता को दर्शाता है। रावण अपने समय का विज्ञान का बहुत बड़ा विद्वान भी था जिसका उदाहरण पुष्पक विमान था जिससे पता चलता है कि उसे विज्ञान की काफी परख थी। भारत के शास्त्रीय वाद्य यंत्र रुद्र वीणा की खोज रावण ने ही की थी।

रावण शिवजी का बहुत बड़ा भक्त था और दिन-रात उनकी आराधना करता रहता था। रावण के बहुत से नाम थे जिनमें दशानन सबसे लोकप्रिय नाम था। रावण एक आदर्श भाई और एक आदर्श पति था। एक तरह उसने अपनी बहन शूर्पणखा के अपमान का बदला लेने के लिए इतना बड़ा फैसला लिया जो उसकी मौत का कारण बना। दूसरा, वह अपनी पत्नी को बचाने के लिए उस यज्ञ से उठ गया जिससे वह राम जी की सेना को तबाह कर सकता था।

और पढ़ें
1 of 48

इसके अलावा जब कुंभकर्ण को ब्रह्मा जी से हमेशा के लिए नींद में सो जाने का वरदान मिला था, तब रावण ने वापस तपस्या करके इसकी अवधि को 6 महीने किया था। इससे पता चलता है कि उसको अपने भाई-बहनों और पत्नी की कितनी फिक्र थी। कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि लाल किताब का असली लेखक रावण ही था। ऐसा कहा जाता है कि रावण अपने अहंकार की वजह से अपनी शक्तियों को खो बैठा था और उसने लाल किताब का प्रभाव खो दिया था जो बाद में अरब में पाई गई थी। इसे बाद में उर्दू और फारसी में अनुवादित किया गया था।

रावण बाली से एक बार पराजित हो चुका था। कहानी इस प्रकार है कि बाली को सूर्यदेव का आशीर्वाद प्राप्त था और रावण शिवजी से मिले वरदान के अहंकार से बाली को चुनौती दे बैठा। बाली ने शुरुआत में ध्यान नहीं दिया, लेकिन रावण ने जब उसको ज्यादा परेशान किया तो बाली ने रावण के सिर को अपनी भुजाओं में दबा लिया और उड़ने लगा। उसने रावण को 6 महीने बाद ही छोड़ा ताकि वह सबक सीख सके। राम जी को जब रावण को हराने के लिए समुद्र पार कर लंका जाना था, तब काम शुरू करने के एक रात पहले उन्होंने यज्ञ की तैयारी की और रामेश्वरम में भगवान शिव की आराधना करने का निश्चय किया।

अब जब वे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से युद्ध करने को जा रहे थे तो यज्ञ के लिए भी उनको एक विद्वान पंडित की आवश्यकता थी। उन्हें जानकारी मिली कि रावण खुद एक बहुत बड़ा विद्वान है। राम जी ने रावण को यज्ञ के लिए न्योता भेजा और रावण शिवजी के यज्ञ के लिए मना नहीं कर सकता था। रावण रामेश्वरम पहुंचा और उसने यज्ञ पूरा किया। इतना ही नहीं, जब यज्ञ पूरा हुआ तब राम जी ने रावण से उसी को हराने के लिए आशीर्वाद भी मांगा और जवाब में रावण ने उनको तथास्तु कहा था। लंका का निर्माण विश्वकर्मा जी ने किया था। उस पर रावण के सौतेले भाई कुबेर का कब्जा था।

जब रावण तपस्या से लौटा, तब उसने कुबेर से पूरी लंका छीन ली थी। ऐसा कहा जाता है कि उसके राज में गरीब से गरीब का घर भी उसने सोने का कर दिया था जिसके कारण उसकी लंका नगरी में खूब ख्याति थी। दक्षिणी भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के कई हिस्सों में रावण की पूजा की जाती है और अनेक संख्या में उसके भक्त हैं।

Advertisements
Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. AcceptRead More