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क्या दशानन के दस सिर नहीं थे, जानिए रावण से जुड़ी ये रहस्यमयी बातें !

नई दिल्ली. दशहरा भारत में धूमधाम से मनाया जाएगा। देश में दशहरे को लेकर कई मैदानों में अभी से रावण खड़े कर दिए गए है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था। जिसकी खुशी में दशहरा मनाया जाता है। भगवान रावण को लेकर ग्रंथों में कई बातें लिखी [...]

नई दिल्ली. दशहरा भारत में धूमधाम से मनाया जाएगा। देश में दशहरे को लेकर कई मैदानों में अभी से रावण खड़े कर दिए गए है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध किया था। जिसकी खुशी में दशहरा मनाया जाता है। भगवान रावण को लेकर ग्रंथों में कई बातें लिखी गई है। आज हम आपकों रावण से जुड़ी कई रहस्यमयी बाते बताने जा रहे है।

Rawan

विद्वानों के अनुसार रावण के दस सिर नहीं थे किंतु वह दस सिर होने का भ्रम पैदा कर देता था इसी कारण लोग उसे दशानन कहते थे। जैन शास्त्रों में उल्लेख है कि रावण के गले में बड़ी-बड़ी गोलाकार नौ मणियां होती थीं। उक्त नौ मणियों में उसका सिर दिखाई देता था जिसके कारण उसके दस सिर होने का भ्रम होता था। रावण को वेद और संस्कृत का ज्ञान था। वो साम वेद में निपुण था। उसने शिवतांडव, युद्धीशा तंत्र और प्रकुठा कामधेनु जैसी कृतियों की रचना की। साम वेद के अलावा उसे बाकी तीनों वेदों का भी ज्ञान था।

Dussehra

यह भी कहा जाता है कि मेघनाथ के जन्म से पहले रावण ने ग्रह नक्षत्रों को अपने हिसाब से सजा लिया था, जिससे उसका होना वाला पुत्र अमर हो जाए। लेकिन आखिरी वक़्त में शनि ने अपनी चाल बदल ली थी। रावण इतना शक्तिशाली था कि उसने शनि को अपने पास बंदी बना लिया था।

थाइलैंड में जो रामायण है उसके अनुसार सीता रावण की बेटी थी, जिसे एक भविष्यवाणी के बाद रावण ने ज़मीन में दफ़ना दिया था। भविष्यवाणी में कहा गया था कि ‘यही लड़की तेरी मौत का कारण बनेगी’। बाद में देवी सीता जनक को मिलीं। यही कारण था कि रावण ने कभी भी देवी सीता के साथ बुरा बर्ताव नहीं किया था।

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