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बेरहम माँ ने दी नाजायज औलाद की आहुति

बांस की झाड़ी के नीचे मिला नवजात शिशु शादी से पहले किये गए पाप के डर से नवजात बच्चे को तालाब में फेका

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विकास कुमार गौतम
कौशाम्बी – करारी थाना क्षेत्र के लहना गांव में दिल को झकझोर देने और समाज को कलंकित करने वाला मामला प्रकाश में आया है।जहां पर अपने पाप को छिपाने व लोकलाज के भय से एक बेरहम माँ ने शादी से पहले जन्मे एक नवजात बच्चे को तालाब में फेक दिया।बच्चे के रोने की आवाज से पड़ोसियों ने तालाब से बच्चे को निकाला।घण्टो पानी के ऊपर कचड़े में पड़े रहने के बाद भी बच्चा पूरी तरह से शकुशल था।
जाको राखे साईंया मार सके न कोय!! यह दोहा इस बच्चे के ऊपर सटीक बैठती है। बच्चे को तालाब से निकालने के बाद गांव की निर्मला देवी ने हूबहू माँ का दायित्व निभाते हुए बच्चे की साफ़ सफाई की और नम आँखों से खूब ममता लुटाई और बच्चे को पालने की पेशकश ग्रामीणों के समक्ष रख दिया।निर्मला देवी के इस निर्णय से सभी ग्रामवासियों ने सराहना किया लेकिन अचानक बच्चे की तबियत बिगड़ने लगी।आनन फानन में ग्रामीणों ने 108 एम्बुलेंस बुलाकर बच्चे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।जहां इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गयी।बच्चे की मौत का कारण डॉक्टरों ने अंदरुनी चोट और ठण्ड बताया।बच्चे की मौत की सूचना से निर्मला देवी सरोज काफी आहत है।
बहरहाल लहना गांव व आस पास के क्षेत्रों में समाज को कलंकित करने वाला यह घिनौना कृत्य चर्चा का विषय बना हुआ है।एक ओर जहां लाखों माँओं की गोद सूनी है और वो गोद भरने के लिए डॉक्टर हकीम और देवस्थानों आदि के चौखट पर दिन रात हाजिरी लगाती नजर आती हैं तो वहीं दूसरी ओर समाज में ऐसे भी निर्लज्ज माएं भी हैं जो शादी के पहले कामना के आवेश में आकर सभी सावधानियों को ताक पर रखकर ब्यभिचार तो करती हैं लेकिन बाद में परिणाम भुगतने के समय वो अपने करतूत को छिपाने के लिए अपने ही नाजायज औलाद की आहुति दे देती हैं।
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