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गरीबो और असहायों की सेवा ही पुलिस का धर्म-कोतवाल

आखिर खांकी वर्दी के पीछे भी होता है इंसान का दिल

क्राइम रिपोर्टर-मन्नान अहमद लारी
देवरिया  । ” जब भी देखता हूँ  किसी गरीब को हँसते हुए तो यकीन आ जाता है की खुशियो का ताल्लुक दौलत से नहीं होता है। बल्कि उन्हें तो बस प्यार के दो लफ्ज बोल के देखिये उनकी खुशी का राज मिल जायेगा “।
क्त बातें प्रकाश पर्व दीपावली के दिन शहर के राजकीय बाल गृह में रह रहे बच्चों को मिठाई,खेल कूद के सामन,कम्बल व पटाखा वितरित करते हुए शहर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद ने व्यक्त की। उन्होंने कहा कि असली खुशी तो आज इन बच्चों के साथ मिली है,आज इनके चेहरे पर जो ख़ुशी मिली है उसे दुनिया की कोई दौलत पूरी नही कर सकती ।
जब भी मौका मिलेगा हम यहां आते रहंगे। कोतवाल विजय नारायण ने कहा पुलिस अधीक्षक की भी मंशा है कि किसी गरीब के साथ कोई अन्याय न हो ।वही कोतवाली में तैनात पुलिसकर्मी सूबेदार विश्वकर्मा ने कहा कि आज जब हम इन बच्चों के बीच आये तो इनसे कोई रिश्ता न था लेकिन देखते ही देखते ये बाच्चे हम लोगो से ऐसे घुल मिल गए जैसे कि ये हमे कितने अर्से से जानते है।और उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इस अवसर पर एडवोकेट अजय शर्मा,अमर सिंह,प्रणव शुक्ला,समाजसेवी अबरार खान सहित बालगृह के कर्मचारी मौजूद रहे।
आखिर खांकी वर्दी के पीछे भी होता है इंसान का दिल
 दीपावली के अवसर पर शहर कोतवाल विजय नारायण प्रसाद जब शहर के राजकीय बालगृह के बच्चो को मिठाई,पटाखा,खिलौने व कम्बल बांटने पहुंचे तो बच्चों की ख़ुशी का ठिकाना न था जैसे मानो उनके बीच कोई फरिश्ता पहुँच गये हो।बच्चों की इस खुशी को देख शहर कोतवाल की आँखे नम हो गयी। और उन बच्चो की ख़ुशी में शामिल हो गए।

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