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ये है होश उड़ा देने वाला असली ‘ठग ऑफ हिंदोस्तान’, जिसने बेच दिया था संसद, लालकिला और ताजमहल, पढ़े पूरी स्टोरी

आमिर खान फिल्म ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ के जरिए सिल्वर स्क्रीन पर व्यापारियो और अंग्रेजों को ठगने की कला दिखाते हुए दर्शकों का दिल जीतने की कवायद कर रहे हैं। फिल्म में गांव गोपालपुर जिला कानपुर अवध निवासी फिरंगी मल्लाह बने आमिर का एक डायलॉग धोखा स्वभाव है मेरा काफी सुर्खियां बटोर रहा है। यह फिल्म आजादी से पहले की कहानी दर्शाती हुए लोगों का मनोरंजन करती है, लेकिन अपने देश में एक ऐसा असली ठग रहा है, जिसने पुलिस-प्रशासन और व्यापारियों की नाक में वाकई दम कर रखा था। हम बात कर रहे हैं नटवरलाल के नाम से मशहूर मिथलेश कुमार श्रीवास्तव की।

इस ठग का दिमाग और हाथ-पैर 75 साल उम्र में भी इतनी तेजी से चलते थे कि पुलिसवालों के सामने ही वह गायब हो जाता था। वह खुद को रॉबिन हुड कहता था और उसे अपने आप पर इतना ज्यादा भरोसा था कि दावे के साथ जज को भी अपने पक्ष में फैसला सुनाने पर मजबूर कर सकता था। हम बात कर रहे हैं सदी के महाठगों में शुमार मिथलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल की, जिसने 8 राज्यों की पुलिस को छका के रख दिया था।

‘नटवर लाल’ मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव के 52 से ज्यादा ज्ञात नामों में से एक था। उसे ठगी के जिन मामलों में सजा हो चुकी थी, वह अगर पूरी काटता तो 117 साल की थी। 30 मामलों में तो सजा हो ही नहीं पाई थी। आठ राज्यों की पुलिस ने उस पर इनाम घोषित किया था। बिहार के सिवान जिले में नटवर लाल का जन्म हुआ था। नटवर लाल हमेशा बहुत नाटकीय तरीके से अपराध करता था। उससे भी ज्यादा नाटकीय तरीके से पकड़ा जाता था और उससे भी ज्यादा नाटकीय तरीके से फरार होता था।

लगभग 75 साल की उम्र में दिल्ली की तिहाड़ जेल से कानपुर के एक मामले में पेशी के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के दो जवान और एक हवलदार उसे लेने आए थे। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से लखनऊ मेल में उन्हें बैठना था। स्टेशन पर खासी भीड़ थी। पहरेदार मौजूद और नटवर लाल बैंच पर बैठा हाफ रहा था। उसने सिपाही से कहा कि बेटा बाहर से दवाई की गोली ला दो। मेरे पास पैसा नहीं हैं लेकिन जब रिश्तेदार मिलने आएंगे तो दे दूंगा।

यह बात अलग है कि उसके परिवार और रिश्तेदारों के बारे में सिर्फ इतना पता है कि परिवार ने उसे कुटुंब से निकाल दिया था, पत्नी की बहुत पहले मृत्यु हो गई थी और संतान कोई थी नहीं। सिपाही दवाई लेने गया, आखिर दो पहरेदार मौजूद थे। इनमें से एक को नटवर लाल ने पानी लेने के लिए भेज दिया। हवलदार बचा तो उसे कहा कि भैया तुम वर्दी में हो और मुझे बाथरूम जाना है। तुम रस्सी पकड़े रहोगे तो मुझे जल्दी अंदर जाने देंगे क्योंकि मुझसे खड़ा नहीं हुआ जा रहा। उस भीड़ भाड़ में नटवर लाल ने कब हाथ से रस्सी निकाली, कब भीड़ में शामिल हुआ और कब गायब हो गया, यह किसी को पता नही चलां।

 

नटवर लाल साठवीं बार फरार हो गया
तीनों पुलिस वाले निलंबित हुए और नटवर लाल साठवीं बार फरार हो गया। नटवर लाल को अपने किए पर कोई शर्म नहीं थी। वह अपने आपको रॉबिन हुड मानता था, कहता था कि मैं अमीरों से लूट कर गरीबों को देता हूं। उसने कहा कि मैंने कभी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया। लोगों से बहाने बनाकर पैसे मांगे और लोग पैसे दे गए। इसमें मेरा क्या कसूर है? आखिरी बार नटवर लाल बिहार के दरभंगा रेलवे स्टेशन पर देखा गया था।

पुलिस में पुराने थानेदार ने जो सिपाही के जमाने से नटवर लाल को जानता था, उसे पहचान लिया। नटवर लाल ने भी देख लिया कि उसे पहचान लिया गया है। सिपाही अपने साथियों को लेने थाने के भीतर गया और नटवर लाल गायब था। यह बात अलग है कि पास खड़ी मालगाड़ी के डिब्बे से नटवर लाल के उतारे हुए कपड़े मिले और गार्ड की यूनीफॉर्म गायब थी। इसके बाद नटवर लाल का नाम 2004 में तब सामने आया, जब उसने अपनी वसीयतनुमा फाइल एक वकील को सौंपी। बलरामपुर के अस्पताल में भर्ती हुआ और इसके बाद एक दिन अस्पताल छोड़ कर चला गया। डॉक्टरों का कहना था कि जिस हालत में वह था, उसमें उसके तीन चार दिन से ज्यादा बचने की गुंजाइश नहीं थी। नटवर लाल के जो ज्ञात अपराध हैं, अगर सबको मिला लिया जाए तो भी यह रकम 50 लाख तक नहीं पहुंचती।

कई फर्जी डिग्रियां हासिल कर ली थीं
नटवरलाल के गांव के लोग बताते हैं कि वह पढ़ाई में बहुत अच्छा नहीं था लेकिन उसने एलएलबी की डिग्री हासिल कर ली थी। हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाएं भी वह जानता था। लोग ये भी बताते हैं कि उसने कई फर्जी डिग्रियां भी हासिल कर ली थीं। जितनी अंग्रेजी वह बोल लेता था, उतनी ही उसका काम चलाने के लिए काफी थी। उसके शिकारों में ज्यादातर या तो मध्यम दर्जे के सरकारी कर्मचारी होते थे या फिर छोटे शहरों के बड़े इरादों वाले व्यापारी, जिन्हें नटवर लाल ताजमहल बेचने का वायदा भी कर देता था।

देश के बड़े-बड़े ऐतिहासिक धरोहरों तक को बेच डाला
ठगी में नटवर लाल इतने शातिर था कि उसने 3 बार ताजमहल, दो बार लाल किला, एक बार राष्ट्रपति भवन और एक बार संसद भवन तक को बेच दिया था. राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के फर्जी साइन करके नटवर लाल ने संसद को बेच दिया था. जिसे समय संसद को बेचा था, उस समय सारे सांसद वहीं मौजूद थे. कहते हैं कि नटवर लाल के 52 नाम थे, उनमें से एक नाम नटवर लाल था. सरकारी कर्मचारी का भेष धरकर नटवर लाल ने विदेशियों को ये सारे स्मारक बेचे थे. इनकी ठगी पर ‘मिस्टर नटवर लाल’ फिल्म भी बन चुकी है. जिसमें अमिताभ बच्चन ने इनका रोल निभाया है।

गजब का हुनर  रखने वाला सदी का सबसे शातिर ठग 
वादा करने की शैली कुछ ऐसी होती थी कि उस वायदे पर लोग ऐतबार भी कर लेते थे। खुद नटवर लाल ने एक बार भरी अदालत में कहा था कि सर अपनी बात करने की स्टाइल ही कुछ ऐसी है कि अगर 10 मिनट आप बात करने दें तो आप वही फैसला देेंगे जो मैं कहूंगा। नटवर लाल नहीं होता तो आप इसे अति आत्मविश्वास कह रहे होते। गजब का हुनर रखने वाला सदी का सबसे शातिर ठग मिथलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल की मौत का रहस्य आज तक नहीं सुलझ पाया है। पिछले दिनों यूपी के कानपुर में नटवरलाल के अधिवक्ता ने एसीएमएम-9 की कोर्ट में अर्जी देकर मुकदमे खारिज करने और पुलिस से मौत कैसे हुई की रिपोर्ट मांगी थी।

नहीं सुलझ पाया उसकी मौत का रहस्य
शातिर ठग मिथलेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ नटवरलाल की मौत साक्ष्य न होने के कारण साबित नहीं हो पा रही है। अदालत में अभी भी उसके खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। 20 दिसंबर 2017 को नटवरलाल के अधिवक्ता ने एसीएमएम-9 की कोर्ट में अर्जी दी थी कि बेकनगंज पुलिस से मृत्यु पर आख्या मांगकर मुकदमे खारिज किए जाएं। ये बात एक ठग ने पुलिस वालों को कही थी. जब वो उनकी गिरफ्त में था।

एक ऐसा ठग जिसने वेश्याओं तक को नहीं छोड़ा. वो हर रोज वेश्याओं के पास जाता और उनको जहरीली शराब पिलाकर उनके पैसे और गहने लूट लेता था. एक पढ़ा-लिखा इंसान, जिसने वकालत की पढ़ाई करने के बाद ठगी को अपना पेशा बनाया. 8 राज्यों में 100 से ज्यादा मामलों में पुलिस इस ठग को ढूंढ रही थी. 8 बार वो अलग-अलग जेलों से फरार हो चुका था. एक ऐसा ठग जिसने ठगी के लिए राजीव गांधी से लेकर राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के नाम तक का इस्तेमाल किया।

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