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चार राज्यों का एक्जिट पोल : मोदी के कमल पर राहुल का पंजा पड़ सकता है भारी…?

NEW DELHI. आने वाले लोकसभा के चुनावों में नरेन्द्र मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनकर भाजपा को 2014 की तरह 543 में से ऐतिहासिक 282 सीटें जिता पायेंगे या नहीं उसका राजनीतिक समीकरण आज संपन्न हुए चार राज्यों के नतीजों पर आधारित है तब राजनीतिक विशेषज्ञों द्वारा राजनीतिक शतरंज की बाजी बिछाकर आकलन किये जा रहे हैं। 2014 तक का भारत और 2014 से लेकर 2018 तक का मोदी के भारत के बीच जमीन आसमान का फर्क दिखने को मिल रहा है। उस वक्त उन्होंने दिये चुनावी वादे चार साल के बाद उनके सामने विविध माध्यमों के द्वारा मौन पसारे सामने आ गये हैं।
ओर मानो कि वे पूछ रहे हैं कि रोजगारी, राम मंदिर, कश्मीर के लिये धारा 370, समान नागरिक आचार संघिता, आतंकवाद, नक्सलवाद, कश्मीर में शांति, महिला सुरक्षा के लिए दिये गये वादे में से कितने पूरे हुए। मानो उसका जवाब तलाश कर रहे है। हांलाकि उसके जवाब प्रधानमंत्री मोदी दे उससे पहले ही चार साल में भाजपा और उसके नेतृत्व के तहत गठित केन्द्र सरकार में वादे के मुताबिक नहीं किये यह कार्य और जो नहीं करना चाहते थे ऐसे कार्य जैसे की नोटबंदी, जीएसटी, मंदी, सभी मुद्दों को देखते हुए चार राज्यो के चुनावों में राजनीतिक चित्र जो कुछ बनकर उभर कर आ रहा है वह दिखा रहा है की भाजपा और नरेन्द्र मोदी के लिये कुछ अच्छे संकेत नहीं दिखा रहे हैं।

मध्य प्रदेश, राजस्थान छत्तीसगढ़ तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है। एक्जिट पोल के मुताबिक तीनों राज्यो में सत्ता परिवर्तन की लहर नजर आ रही है। कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करती दिख रही है। मध्य प्रदेश में इस एक्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस को 45 प्रतिशत वोट शेयर मिल रहे हैं, तो वहीं बीजेपी को 41 फीसदी और अन्य के खाते में 14 फीसदी वोट शेयर जाते दिख रहे हैं। मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं, इसलिए बहुमत पाने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 116 सीटों पर जीत हासिल करनी ही होगी।


मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं, इसलिए बहुमत पाने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 116 सीटों पर जीत हासिल करनी ही होगी। एक्जिट पोल के मुताबिक सीटों के मामले में भी कांग्रेस यहां बीजेपी को पछाड़ते हुए दिख रही है। इस एक्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश में कांग्रेस बहुमत का आंकड़ा छू सकती है। कांग्रेस के हिस्से में 113 से 118 सीटें जाते दिख रही हैं। वहीं बीजेपी 102 से 106 सीटों पर ही सिमटते दिख रही है। इसके अलावा 9 से 11 सीटों पर अन्य का कब्जा हो सकता है। इस एक्जिट पोल के मुताबिक आगामी विधानसभा में बीजेपी को कांग्रेस से बड़ा झटका मिल सकता है।
मध्य प्रदेश में अगर लोकसभा चुनाव को लेकर बात की जाए तो यहां बीजेपी के हिस्से में ज्यादा वोट शेयर जाते दिख रहे हैं। एक्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी को 41 फीसदी वोट शेयर, कांग्रेस को 45 फीसदी और अन्य को 14 फीसदी वोट शेयर मिल सकते हैं। अगले साल 2019 में होने लोकसभा चुनाव से पहले हुये मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। एक्जिट पोल के अनुसार तीनों राज्यों में बीजेपी के हाथों से सत्ता खिसकती हुई नजर आ रही है। जबकि कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार में वापसी कर रही है।
मध्य प्रदेश में बीजेपी पिछले 15 साल से सत्ता में है, लेकिन एक्जिट पोल के मुताबिक इस बार राज्य का सियासी मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है, लेकिन शिवराज के हाथों से सत्ता खिसकती रही है। हालांकि बीजेपी पर कांग्रेस चार प्रतिशत वोट के साथ बढ़त बनाती दिख रही है। अन्य के हिस्से 14 फीसदी वोट मिलता दिख रहा है।

छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी पिछले 15 साल से सत्ता पर काबिज है। एक्जिट पोल के मुताबिक मध्य प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ की सत्ता भी बीजेपी के हाथों से जाती दिख रही है। हालांकि कांग्रेस और बीजेपी के बीच महज तीन फीसदी वोट का अंतर है, उसे देखते हुए शायद अजित जोगी और मायावती कि पार्टी कांग्रेस का खेल बिगाड़ कर रमनसिंघ को फायदा करा सकते है, लेकिन उसकी संभावना बहुत कम है।


एक्जिट पोल के मुताबिक मुख्यमंत्री रमन सिंह की सत्ता से विदाई नजर आ रही है। अजीत जोगी का कांग्रेस से बगावत करना भी बीजेपी के लिए फायदा नहीं दिला पा रहा है। 2013 के नतीजों के नजरिए से देखें तो बीजेपी को नुकसान और कांग्रेस को फायदा हो रहा है। इस तरह से कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी कर सकती है।
एक्जिट पोल के मुताबिक छत्तीसगढ़ में भी बीजेपी कांग्रेस से पिछड़ती हुई दिख रही है। यहां बीजेपी को 39 फीसदी वोट शेयर मिल रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस को 42 और अन्य को 19 फीसदी वोट शेयर मिल रहे हैं। इसके अलावा अगर सीटों को लेकर बात की जाए तो छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटें हैं, जिनमें से कांग्रेस के हिस्से में 44 से 50, बीजेपी के हिस्से में 36 से 39 और अन्य के हिस्से में 4 से 7 सीटें मिलती दिख रही हैं।

राजस्थान में एक बार कांग्रेस और एक बार बीजेपी की परंपरा इस बार भी दिख रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन की लहर नजर आ रही है। कांग्रेस पांच साल के बाद फिर सत्ता में वापसी कर रही है। जबकि वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली बीजेपी को काफी बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।


राजस्थान में भी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तरह कांग्रेस ही बढ़त बनाते हुए दिख रही है। एक्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस को जहां 49 फीसदी वोट शेयर मिल सकता है तो वहीं बीजेपी 38 फीसदी वोट शेयर पर ही सिमटती दिख रही है। अन्य को 13 फीसदी वोट शेयर मिल सकते हैं। अगर सीटों के हिसाब से बात करें तो 200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के हिस्से में 117 से 120 सीटें जाते दिख रही हैं। वहीं बीजेपी 71 से 77 सीटों पर ही सिमटते दिख रही है। इसके अलावा 6 से 9 सीटें अन्य के हिस्से में जाते दिख रही हैं।

तेलंगाना में टीआरएस विफल, कांग्रेस-टीडीपी की सरकार बनने के आसार..?

बड़े राज्य आंध्रप्रदेश का विभाजन कर नए बने तेलंगाना में विधानसभा चुनाव में ७ दिसम्बर को मतदान के बाद जो राजनीतिक चित्र उभरकर सामने आ रहा है उसे देखते हुए कांगेस –टीडीपी और सीपीआई की मिली जुली सरकार बनाने की संभावना है। इन तीनों दलों को करीब 67 सीटें मिल सकती है। जिसमे कोंग्रेस को 45 से ४८ और टीडीपी को 15 से 17 सीटें मिल सकती है। दोनो ही पार्टी प्रीपोल एलायन्स होने के वजह से दोनो को मिलाकर 62 से 65 होती है जो बहुमत के लिये जरूरी 60 से ज्यादा है अगर ऐसा होता है तो टीआरएस को पांच साल प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने की नौबत आ सकती है।


आज ७ दिसम्बर को राजस्थान के साथ तेलंगाना में भी वोटिंग हुई। इस वक्त 119 सीटों वाली विधानसभा में टीआरएस की सरकार है। मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने जल्द चुनाव कराने की जल्दबाजी तो की लेकिन फिर से सरकार बनाने की उनकी उम्मीद सफल होती दिखाई नहीं पड़ रही। जो रुझान मिल रहे है उसे देखते हुए ऐसे आसार है की केसीआर की कार तो अब उनके घर की ओर मुड गई। लाल बिरादर के साथ टीडीपी की साइकिल पर बैठ पंजें के नेता सरकार बनाने जा रहे है।
जो रुझान है उसे मानते हुए कांगेस को 45 से 48 सीट, साइकिल वाले टीडीपी को करीब 15 से 17 और लाल बिरादर को 2 सीट मिल सकती है। अन्य दलों की राजनीतिक स्थिति को देखे तो टीआरएस को 38 से 43, बीएसपी को कम से कम १, बीजेपी को सिर्फ ५ और अकबर औवेसी की पार्टी ओल इण्डिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम को 4 सीटें मिल सकती है। बीजेपी ने वैसे तो केसीआर के साथ मिलकर सरकार बनाने की रणनीति बनाई थी और उसी के तहत केसीआर ने समय से पहले चुनाव कराने सुबह सुबह तडके मंत्रिमंडल की मीटिंग बुलाकर विधानसभा भंग की थी। चार राज्यों के साथ तेलंगाना के भी चुनाव कराने में निर्वाचन सदन ने भी साथ दिया लेकिन रुझान को देखते हुए लोगों को जल्द चुनाव की केसीआर बात कुछ हजम नहीं हुई।
११ दिसम्बर को वोटों की गिनती के साथ ये साफ़ हो जायेगा की केसीआर की कार किस ओर मुडती है और कांग्रेस-टीडीपी को क्या जनादेश मिला है। तेलंगाना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कितना जादू चला ये भी तय हो जायेगा। साभार:gns

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