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जानिये कौन बनेगा सीएम सचिन पायलट या गहलोत ?

जयपुर. राजस्थान विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना त्यागपत्र राज्यपाल कल्याण सिंह को सौंप दिया है. इस्तीफा सौंपने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वसुंधरा ने कहा कि हम अच्छे विपक्ष की भूमिका निभाएंगे. विपक्ष में रहकर जनता की आवाज उठाएंगे. मैं कांग्रेस को बधाई देती हूं. मैं इस जनादेश को स्वीकार करती हूं. बीजेपी ने पिछले पांच सालों के दौरान काफी काम किया. मुझे उम्मीद है कि अगली सरकार इन कामों और नीतियों को आगे बढ़ाएगी. राजे ने कहा, ‘मैं सभी भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देती हूं।

राजभवन के प्रवक्ता ने बताया, ‘राजे ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपा.’ विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ भाजपा को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा है.उधर, चुनाव में जीत के साथ कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर दावेदारी शुरू हो गई है राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की दावेदारी है. बुधवार को होने वाली विधायक दल की बैठक में इन दोनों नामों पर विधायकों पर चर्चा की जाएगी. बैठक में हिस्सा लेने के लिए पर्यवेक्षक के तौर पर केसी वेणुगोपाल जयपुर पहुंच गए हैं. राजस्थान के प्रभारी अविनाश पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम पर सभी विधायकों से चर्चा कर निर्णय किया जाएगा।

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राजस्थान में कांग्रेस हाई कमान को सरकार बना लेने का पूरा भरोसा है। हालांकि अभी सभी सीटों का चुनाव परिणाम नहीं आ सका है, लेकिन राज्य में अगले मुख्यमंत्री के लिए अटकलें तेज हो गई हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट और पूर्व मु्रख्यमंत्री अशोक गहलोत में कड़ा मुकबला होता दिखाई दे रहा है। अशोक गहलोत भले ही सार्वजनिक तौर पर खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए महत्वाकांक्षी न बताएं, लेकिन अंदरखाने में उनके समर्थक लगातार इस पद के लिए सक्रिय है। गहलोत ने राज्य विधानसभा चुनाव में अपनी कुछ बातों को मनवाने के लिए यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी का सहारा भी लिया था।

गहलोत के करीबी जयपुर के सूत्र का कहना है कि गहलोत लोकसभा चुनाव तक मुख्यमंत्री बनने के पक्ष में हैं। इसके पीछे गहलोत के समर्थकों का तर्क 2019 का लोकसभा चुनाव है। बताते हैं अगले कुछ महीने में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगेगी।
गहलोत समर्थकों का दावा है कि इस लड़ाई को सचिन पायलट के भरोसे नहीं जीता जा सकता। राजस्थान में भाजपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर जीत हासिल कर ली थी। गहलोत के समर्थकों का कहना है कि यदि सबकुछ ठीक रहा और विधानसभा चुनाव की तर्ज पर कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव का चैसर बिछाया को 20 से अधिक सीटें कांग्रेस के पक्ष में आना तय है।

सचिन पायलट युवा हैं। केन्द्र सरकार में मंत्री रहे हैं। राजस्थान के गुर्जर समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से अच्छी निभती है। विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें अपने पिता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. राजेश पालट की छाया में ही देखा जाता था। वह राजेश पायलट की परंपरागत सीट से लोकसभा का चुनाव लड़कर भी जीते थे।

एक तरह से कहा जाय तो सचिन पायलट दौसा क्षेत्र तक सिमटे हुए नेता थे, लेकिन पिछले डेढ़ सालों में उन्होंने राजस्थान की फिजां बदल डाली। पूरे राजस्थान का न केवल तूफानी दौरा किया, बल्कि हर समाज, वर्ग में पकड़ बनाई। वसुंधरा सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी की नब्ज टटोली। क्षेत्र से बाहर निकले और पूरे राजस्थान में फैल गए। राजस्थान में हुए लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव में पायलट ने अपनी मेहनत का एहसास भी कराया।
राजस्थान की राजनीति के जानकार बताते हैं कि लेकिन सचिन इस इंतहान को आसानी से पास कर लिया। अपने कठिन और स्मार्ट मूव से पायलट ने राहुल गांधी का भी विश्वास जीत लिया। दूसरी तरफ गुजरात के प्रभारी के तौर पर गहलोत ने भी राहुल गांधी का विश्वास हासिल करने में सफलता पा ली। इसके बाद गहलोत सचिन के साथ तालमेल बनाने में जुट गए।

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