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अनिल अंबानी को रखें जेल में,  इस कंपनी ने की मांग, बताई ये बड़ी वजह

कर्ज से परेशान अनिल अंबानी को आज बड़ा झटका लगा है। बंबई हाईकोर्ट ने आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल की और से उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आर-कॉम) पर कंपनी की संपत्तियों को बेचने और ट्रांसफर करने पर लगाई रोक को हटाने से इनकार कर दिया है। कंपनी ने राहत पाने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को आरकॉम को इसकी अनुमति के बिना किसी भी संपत्ति को स्थानांतरित या बेचने से रोक दिया था।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनी एरिक्सन ने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी से बकाया राशि वसूल करने की याचिका दायर की थी। बंबई हाईकोर्ट के इस आदेश को आरकॉम के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है, जिसने अपने कर्ज को कम करने के लिए दिसंबर, 2017 में अपने एसेट्स रिलायंस जियो को बेचने का एक प्लान पेश किया था। आरकॉम पर मार्च, 2017 तक बैंकों का 7 अरब डॉलर (लगभग 45 हजार करोड़ रुपए) का कर्ज था, जब उन्होंने अपने कर्ज के आंकड़े सार्वजनिक किए थे।

अब टेलीकॉम उपकरण बनाने वाली कंपनी एरिक्सन ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के चेयरमैन अनिल अंबानी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी दूसरी अवमानना याचिका दायर की है. इस याचिका में कहा गया है उन्हें तब तक सिविल जेल में बंद कर दिया जाए और विदेशों में यात्रा से रोक दिया जाए, जब तक कि वह स्वीडिश कंपनी के 550 करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित नहीं करत। आरकॉम ने दूरसंचार विभाग के खिलाफ शीर्ष अदालत में अवमानना कार्यवाही शुरू की, और उसे स्पेक्ट्रम बिक्री में देरी के लिए दोषी ठहराया।

अंबानी ने एरिक्सन को 550 करोड़ रुपये के जल्द भुगतान की निजी गारंटी दी थी. स्वीडिश कंपनी ने कहा कि अंबानी को देश छोड़ने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और गुरुवार को अदालत में उल्लेख की गई याचिका में कहा कि जब तक कि बकाया राशि को मंजूरी नहीं दी जाती, तब तक वह नागरिक जेल में अपनी हिरासत की मांग करेंगे।

स्वीडिश उपकरण निर्माता ने अदालत से आरकॉम के ऋणदाताओं को ब्याज सहित देय राशि का भुगतान करने का निर्देश देने के लिए कहा. इसने अपीलीय न्यायाधिकरण के पहले के आदेश के अनुसार, परिसंपत्तियों की आगे की बिक्री और पहले से ही पूर्ण किए गए लेन-देन के एक बदलाव पर रोक लगाने की मांग की।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने पहले आरकॉम के खिलाफ एक इनसॉल्वेंसी याचिका दाखिल की थी. यह दूसरी बार है जब आरकॉम ने एरिक्सन का भुगतान करने में देरी की है. 30 सितंबर की पहली समय सीमा समाप्त होने के बाद स्वीडिश कंपनी ने अक्टूबर में अंबानी के खिलाफ एक अवमानना याचिका दायर की. उस समय सुप्रीम कोर्ट ने एरिक्सन को भुगतान करने के लिए आरकॉम को 15 दिसंबर तक का अधिक समय दिया था।

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