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श्रुत सेवा निधि न्यास का वार्षिक समारोह अक्षराभिषेकोत्सव का हुआ आयोजन

प्रो. नलिन के. शास्त्री की न देह थके न स्नेह थके...पंक्तियों पर बजीं तालियां कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे सेठ विजय कुमार जैन संस्थापक जैन विद्धान प्राचार्य नरेंद्र प्रकाश के जीवन पर डाला गया प्रकाश

फिरोजाबाद – श्रुत सेवा निधि न्यास, फिरोजाबाद (उ.प्र.) द्वारा बाईपास रोड स्थित फिरोजाबाद क्लब में वार्षिक समारोह अक्षराभिषेकोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेठ विजय कुमार जी जैन मथुरा रहे। विशिष्ट अतिथि कन्नौज के एमएलसी पुष्पराज जी जैन, सम्मानीय अतिथियों में डा. चित्रलेखा सिंह पूर्व डीन फैकल्टी आफ फाइनआर्ट आगरा एवं मंगलायतन विश्वविद्यालय अलीगढ़, न्यास गौरव नगर विधायक मनीष असीजा, सेठ महावीर जी जैन मुन्नाबाबू रहे l

 

कार्यक्रम के दौरान अक्षराभिषेकोत्सव कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट सम्मान में प्रो. नलिन के. शास्त्री बोधगया को श्रीमती शान्ति देवी गुप्त श्रुत
सेवा अलंकरण, 31000 रूपये की सम्मान राशि, शाॅल, माला, प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिन्ह, इन्द्रध्वज जी जैन शिकोहाबाद को परम गुरू भक्त सम्मान और प्रयंक जी जैन को उदीयमान प्रतिभा सम्मान से नवाजा गया। हालांकि वे कार्यक्रम में आ न सके उनका सम्मान उनके घर पहुंचाया जायेगा l

 

वहीं 84 वर्ष से निरन्तर प्रकाशित पाक्षिक जैन सन्देश के प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश जी जैन स्मृति अंक एवं विदुषी डा. विमला जैन के शोध प्रबन्ध अजन्ता के भित्त चित्रों में पशु पक्षी चित्रण के श्रीमती मधु धवन द्वारा अंग्रेजी में किये गये अनुवाद की नवीनतम कृति (2019) का लोकार्पण मंच पर किया गया। कार्यक्रम की भूमिका में संस्थापक जैन विद्धान प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश जी के जीवन पर वीरेंद्र कुमार जैन रैमजा ने प्रकाश डाला  l

 

मंगलाचरण पाण्डेय अशोक कुमार जैन फरिहा ने किया। इससे पूर्व मंच को संबोधित करते हुये प्रो. नलिन के. शास्त्री ने कहा कि हम जैसी आत्मा रखते हैं वैसे ही विचार होते हैं। भावना कर्म से बनती है। प्राणियों की अवहेलना न हो, ना ही निंदा हो। हिंसा न हो। मन की समति का अभ्यास होना जरूरी है। मन की शुद्धि होनी चाहिये। कोई बात पसन्द ना हो मुस्कुरा कर ना कर दें। जितनी जरूरत हो जरूरत रखें। आप सिर्फ मूरछा से बचें। संग्रहण की मूर्छा से बचें। महावीर ने तो 12 साल मौन रखा, ये भी प्रेरित किया कि हिंसा को कैसे कम किया जाये। जो जरूरत है उसी को अंगीकृत करें। समाज से जितना ले रहे हैं उतना ही देने की समति भी बनी रहनी चाहिये। फिर पंक्तियां न देह थके न स्नेह थके….जब पूरीं कीं तो क्लब प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अंत में उन्होंने अपनी वाणी को मुसाफिर हैं हम भी मुसाफिर हो तुम भी फिर किसी मोड़ पर हम मिलेंगे से विराम दिया। मंच का संचालन अनूप चंद्र जैन एडवोकेट ने किया l

न्यास संरक्षकों में स्व. बालकृष्ण गुप्त उप्र रत्न, एमएलसी कन्नौज पुष्पराज जैन, पीएनसी प्रदीप जैन, मुम्बई से आरके जैन, चेन्नई से श्रीमती सरिता जैन, गाजियाबाद से जम्बू प्रसाद जैन, न्यास गौरव दिल्ली के एमके जैन, मार्सन्स स्वरूपचन्द्र जैन, दिल्ली से मणीन्द्र जैन, नगर विधायक मनीष असीजा, फिरोजाबाद से सेठ महावीर जैन, न्यास परिवार से संस्थापक प्राचार्य स्व. नरेन्द्र प्रकाश जैन, अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद जैन (राजू), महामंत्री अजय कुमार जैन (एड), कोषाध्यक्ष प्रमोद जैन (सोनल), उपाध्यक्ष बौहरे विनोद जैन, मुकेश जैन (विभव नगर) आॅडीटर महावीर प्रसाद जैन (मामा), संयुक्त मंत्री अमित जैन (राजा बैंगिल)रहे।

अलावा सदस्यों में अनूप चंद्र जैन एडवोकेट, विजय कुमार जैन देवता, वीरेंद्र कुमार जैन रैमजा, जयप्रकाश जैन साहू, देवेंद्र कुमार जैन मामा, ललितेश जैन (दुर्गेश), प्रमोद कुमार जैन (राजा), विमल कुमार जैन (रेता), हरीकिशन जैन, डा. अनुपम जैन, सुभाष चंद्र जैन (गारमेण्टस), भुवनेन्द्र कुमार जैन, उपेंद्र कुमार जैन, जिनेन्द्र कुमार जैन, दीपक कुमार जैन (कटरा) एवं संजीव कुमार जैन (इसौली) आदि रहे। इसके अलावा प्रमुख उद्यमी प्रदीप गुप्ता, राहुल जैन सिटीजन, सतेन्द्र जैन सौली संग काफी संख्या में शहर के नागरिको की मौजूदगी रही l

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