fbpx
jansandesh online,Hindi News, Latest Hindi news,online hindi news portal

मकर संक्रांति पर राशि अनुसार करेंगे दान तो मिलेगी बेशुमार धन-दौलत और यश-कीर्ति-सम्मान

मकर संक्रांति के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान करना अच्छा माना जाता है। कुछ लोग गंगा जी जाकर स्नान करते हैं तो जो नहीं जा पाते वे घरों में ही पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान कर मकर संक्रांति का पुण्य प्राप्त कर लेते हैं। इस दिन खिचड़ी का दान किया जाएगा। पूर्व उत्तरप्रदेश में इसे खिचड़ी संक्रांति भी कहते हैं। कहा जाता है कि जाड़े के दिनों में जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो माघ का महीना प्रारंभ हो जाता है। इस महीने उड़द की खिचड़ी एवं रेवड़ी-मूंगफली खाने से शरीर में ऊर्जा बढ़ती है।

इस प्रकार यह पर्व प्रकृति परिवर्तन के साथ शरीर का संतुलन बनाए रखने की ओर भी इशारा करता है। उत्तराखंड के लोग इसे घुघुतिया त्योहार भी कहते हैं जिसमें आटे को गुड़ या शहद में तैयार कर शकरपारे बनाए जाते हैं तथा सुबह स्नान करने के बाद श्काले कौआ काले पूस की रोटी माघ में खालेश् के नारे लगाते हुए छोटे-छोटे बच्चे घुघुत को कौआ को बुलाकर खिलाएंगे।

भगवान श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं समस्त प्रकृतियां, ऋतु एवं महीने सब मुझसे ही पैदा होते हैं। इसलिए भारतीय उपासना पद्धति में प्रत्येक ऋतु, मास, पक्ष, सप्ताह एवं दिन-रात परामात्मा के स्वरूप ही माने गए हैं। इसीलिए हमारी उपासना सनातन उपासना कहलाती है। हर दिन किसी न किसी देवता की उपासना से जुड़ा होने से नित उत्सव का आनंद लोगों को मिलता ही रहता है।

साथ ही किसी विशेष पर्व पर होने वाले धार्मिक उत्सव में तो सारा जनमानस एक-साथ आनंद में झूमने लगता है। इसी कड़ी में है लोहड़ी और मकर संक्रांति का पर्व जो हमें धार्मिक अनुष्ठान करते हुए प्रकृति से जुड़े रहने का संदेश देता है। इसकी धूम गांव, नगर, शहर हर जगह दिखाई देती है। ज्योतिषियों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन तिल का उपयोग 6 प्रकार से करना चाहिए। तिल का तेल जल में डालकर स्नान, तिल के तेल की शरीर पर मालिश करके स्नान, तिल का उपयोग हवन सामग्री में, तिलयुक्त जल का सेवन, तिल व गुडयुक्त मिठाई व भोजन का सेवन, तिल का दान करने से शारीरिक, धार्मिक व अन्य लाभ तथा पुण्य प्राप्त होते हैं।

मकर संक्रांति क्यों कहते हैं?
मकर संक्रांति पर्व मुख्यतः सूर्य पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। एक राशि को छोड़ के दूसरे में प्रवेश करने की सूर्य की इस विस्थापन क्रिया को संक्रांति कहते है, चूँकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है इसलिए इस समय को मकर संक्रांति कहा जाता है।

सूर्य उत्तरायण
इस दिन सूर्य दक्षिणायन से अपनी दिशा बदलकर उत्तरायण हो जाता है अर्थात सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगता है, जिससे दिन की लंबाई बढ़नी और रात की लंबाई छोटी होनी शुरू हो जाती है। भारत में इस दिन से बसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है। अतरू मकर संक्रांति को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है।


पतंग महोत्सव
पहले सुबह सूर्य उदय के साथ ही पतंग उड़ाना शुरू हो जाता था। पतंग उड़ाने के पीछे मुख्य कारण है कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना। यह समय सर्दी का होता है और इस मौसम में सुबह का सूर्य प्रकाश शरीर के लिए स्वास्थवर्धक और त्वचा व हड्डियों के लिए अत्यंत लाभदायक होता है।

तिल और गुड़
सर्दी के मौसम में वातावरण का तापमान बहुत कम होने के कारण शरीर में रोग और बीमारी जल्दी लगते हैं। इस लिए इस दिन गुड और तिल से बने मिष्ठान खाए जाते हैं। इनमें गर्मी पैदा करने वाले तत्व के साथ ही शरीर के लिए लाभदायक पोषक पदार्थ भी होते हैं। इसलिए इस दिन खासतौर से तिल और गुड़ के लड्डू खाए जाते हैं।

स्नान, दान, पूजा
माना जाता है की इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्याग कर उनके घर गए थे। इसलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का माना जाता है। और इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान, पूजा आदि करने से पुण्य हजार गुना हो जाता है। इस दिन गंगा सागर में मेला भी लगता है।
फसलें लहलहाने का पर्व
यह पर्व पूरे भारत और नेपाल में फसलों के आगमन की खुशी के रूप में मनाया जाता है। खरीफ की फसलें कट चुकी होती है और खेतो में रबी की फसलें लहलहा रही होती है। खेत में सरसो के फूल मनमोहक लगते हैं। पूरे देश में इस समय खुशी का माहौल होता है। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग स्थानीय तरीकों से मनाया जाता है। क्षेत्रो में विविधता के कारण इस पर्व में भी विविधता है। दक्षिण भारत में इस त्यौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे लोहड़ी कहा जाता है। मध्य भारत में इसे संक्रांति कहा जाता है। मकर संक्रांति को उत्तरायण, माघी, खिचड़ी आदि नाम से भी जाना जाता है।

मकर संक्रांति दान का पर्व है। इस दिन अगर अपनी राशि के अनुसार दान दिया जाए तो दान से मिलने वाला फल कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानें आपकी राशि के अनुसार कौन सा दान शुभ है…. !

मेष- चादर एवं तिल का दान करें तो शीघ्र ही हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

वृषभ- वस्त्र एवं तिल का दान करें तो शुभ रहेगा।

मिथुन- चादर एवं छाते का दान करें तो बहुत लाभदायक सिद्ध होगा।

कर्क- साबूदाना एवं वस्त्र का दान करना शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा।

सिंह – कंबल एवं चादर का दान अपनी क्षमतानुसार करें।

कन्या- तेल तथा उड़द दाल का दान करें।

तुला- रुई, वस्त्र, राई, सूती वस्त्रों के साथ ही चादर आदि का दान करें।

वृश्चिक- खिचड़ी का दान करें साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार कंबल का दान भी शुभ फलदायी सिद्ध होगा।

धनु- चने की दाल का दान करें तो विशेष लाभ होने की संभावना बनती है।

मकर- कंबल और पुस्तक का दान करें तो हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

कुंभ- साबुन, वस्त्र, कंघी व अन्न का दान करें।

मीन- साबूदाना,कंबल सूती वस्त्र तथा चादर का दान करें।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

%d bloggers like this:
 cheap jerseys