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खाकी और खादी के गठजोड़ से चल रही है ‘मौत की मधुशाला’ ?

लखनऊ। यूपी और उत्तराखंड के खादर इलाकों में अवैध शराब बनाने की भट्ठियां खुलेआम धधकती हैं। शामली में पांच लोगों की मौत के बाद खुफिया विभाग भी प्रशासन और आबकारी विभाग को चेता चुका था। दोनों राज्यों की सीमा पर मौत के सौदागर सक्रिय रहते हैं।

यूपी और उत्तराखंड में जहरीली शराब के कारण 82 लोगों की मौत के बाद अब इस मामले की गहन जांच की जा रही है। एजेंसियों के अधिकारी अब इस बात का पता लगाने में जुटे हुए हैं कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जहरीली शराब की सप्लाई किन इलाकों से कराई जा रही है।

जहरीली शराब -demo pic.

पहले भी यूपी और अन्य राज्यों में जहरीली शराब कहर मचा चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यूपी और उत्तराखंड में जहरीली शराब कहां से आती है और पुलिस की नाक के नीचे यह गरीब लोगों तक कैसे पहुंचती है?

सूत्रों से यह बात सामने आयी है कि जहरीली शराब से मौत के मामले में शुरुआती पड़ताल में कुशीनगर और सहारनपुर में शराब की खेप बिहार और उत्तराखंड से आने की बात पता चली है। कुशीनगर से डीजीपी मुख्यालय को जानकारी दी गई है कि इस बात के पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं कि बिहार के गोपालगंज से जहरीली शराब कुशीनगर आई थी। डीजीपी ओपी सिंह ने बताया है कि उत्तराखंड के रुड़की के एक इलाके से सहारनपुर में जहरीली शराब की सप्लाई की गई थी।

अगर खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो 22 अगस्त, 2018 को शामली जिले में पांच लोगों की शराब पीने से मौत के बाद एक रिपोर्ट अफसरों को दी गई थी कि सर्दी के वक्त अवैध शराब की खपत बढ़ जाती है। इस सस्घ्ती शराब को गरीब और मजदूर लोग पीते हैं। धंधा करने वालों के निशाने पर गांव के साथ शहरी क्षेत्र के बाहरी बस्ती में रहने वाले मेहनतकश लोग रहते हैं। इस गिरोह को असरदार लोगों का संरक्षण रहता हैं। कुछ पुलिसवालों की मिलीभगत भी रहती है।

वेस्ट यूपी में अवैध शराब के धंधे को संचालित करने वाले महिलाओं का सहारा लेते हैं। मेरठ के टीपीनगर इलाके में तो 22 महिलाएं पुलिस रेकॉर्ड में अवैध शराब का धंधा करने के मामले में नामजद हैं। कई बार ये महिलाएं गिरफ्तार हो चुकी हैं, लेकिन कमजोर धारा लगने का फायदा उठाकर थाने से या फिर चंद घंटे बाद कोर्ट से इन्घ्हें जमानत मिल जाती है।

अवैध शराब का धंधा करने वाले सेफ प्लान से चलते हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए वह ऐम्घ्बलेंस और लक्जरी वाहनों का इस्तेमाल भी करते हैं। रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक नरेश कुमार बताते हैं कि ये लोग वाहनों में शराब रखने के लिए खास जगह भी बना लेते हैं ताकि तलाशी होने पर भी पुलिस इनके बारे में न जान पाए। इसके अलावा वे दूध बेचने वालों को भी लालच देकर शराब लाने और ले जाने के लिए तैयार कर लेते हैं। शहर में दूध बेचने के बाद उनके डिब्बों में शराब भरकर गांव-गांव भिजवा दी जाती है।

बता दें कि इस मामले में कुशीनगर के इंस्पेक्टर तरयासुजान विनय पाठक, एसआई भीखूराम, कॉन्स्टेबल अनिल कुमार यादव और कमलेश यादव को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा आबकारी निरीक्षक हृदय नारायण पांडेय, प्रधान आबकारी निरीक्षक प्रह्लाद सिंह, राजेश कुमार तिवारी, कॉन्स्टेबल रवींद्र कुमार और ब्रह्मानंद श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। सीओ तमकुहीराज रामकृष्ण तिवारी के खिलाफ शिथिल पर्यवेक्षण के चलते खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। मामले की जांच एसपी उत्तरी गौरव बंसवाल को सौंपी गई है।

वहीं सहारनपुर में एसएसपी ने इंस्पेक्टर नागल हरीश कुमार, एसआई अश्विनी कुमार, अयूब अली, प्रमोद जैन, कॉन्स्टेबल बाबूराम, मोनू राठी, विजय तोमर, संजय त्यागी, नवीन व सौरभ को निलंबित कर दिया गया है। आबकारी विभाग में निरीक्षक गिरीश चंद्र और दो सिपाहियों को निलंबित किया गया है। क्या आबकारी विभाग की तरफ से घटना वाले इलाकों में अवैध शराब की बिक्री से जुड़ी सूचनाएं पुलिस से साझा की गई थीं? अगर की गई थीं तो पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

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