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तमकुहीराज के आसपास अब भी हो रहा कच्ची का खेल

रिपोर्ट उपेंद्र कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर। तमकुहीराज का इलाका कच्ची के कारोबार को लेकर बीते दो दशक से सुर्खियों में रहा है। कच्ची पीने से हुई मौतों के बाद कच्ची के खिलाफ पुलिस का अभियान परवान चढ़ गया है। पूरा क्षेत्र शांत है, लेकिन तस्वीर अब भी वहीं है। जानकर बताते है कि जो चेहरे पहले पुलिस के सामने बैठकर क्षेत्र के हर मामलों में दखल दिया करते थे, आज वहीं उनके लिए मुखबिरी कर रहे है। ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि पुलिस जिस कच्ची के खिलाफ अभियान चला रही है, अब उसी के मुखबिरी के सहारे किस मुकाम को हासिल करना चाहती है। आखिर क्या कारण है कि पुलिस कर्मी जिसपर कारोबार पर अंकुश लगाना चाहती है, उसी का सहारा ले रही है।

कुछ समाजिक लोगो का तर्क है कि पुलिस अगर ईमानदारी से ऐसा कर रही है, तो वह इस कारोबार के शहंशाह तक पहुँचना चाहती है, ताकि इसको जड़ से उखाड़ दिया जाय। तो वही कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि इसके जड़ को पुलिस बहुत पहले से जानती है, लेकिन स्प्रिट सप्लायर के प्रभाव व ताकत के सामने वह बौना साबित हो रही है। जबकि कुछ लोग यह भी तर्क दे रहे है कि शासन और सरकार ने प्रशासन को पूरी छूट दे रही कि वह चाहे कोई हो इस बार कोई समझौता नही होगा। पुलिस अपने अभियान को अमली जामा पहनाने के लिए स्थानीय कारोबारियों को प्रभाव में लेकर उनसे संपर्क में है, उसे पता है कि ये कभी भी उसके गिरफ्त में आ सकते है। जानकर यह भी बताते है कि पुलिस अपने ढंग से इस खेल को निपटना चाहती है।
जो भी हो कच्ची के खेल में लगे पुराने खिलाड़ी भी कम छलक नही है, वे भी पुलिस के इसी दरियादिली का लाभ उठाकर अपने अड्डो पर रखे स्प्रिट को आसानी से हटाने में कामयाब होते दिख रहे है। सूत्रों की माने तो दो दिन पहले क्षेत्र के पाण्डेयपट्टी गांव के एक व्यक्ति को तमकुहीराज पुलिस चौकी के प्रभारी ने पकड़ा था, लेकिन उसके खिलाफ बिना किसी कार्यवाही को आजाद कर दिया गया। जिसको लेकर चर्चा गम्भीर है, लोग मायने भी निकाल रहे हैं, और साहब साफ तौर पर ऐसे किसी तरह के व्यक्ति के पकड़ने से इनकार कर रहे है। तभी तो जनता स्प्ष्ट तौर पर यह कहने से गुरेज नही कर रही कि पुलिस का अब भी कच्ची के कारोबारियों से मोह भंग नही हो रहा है।
तमकुहीराज कस्वे के कुछ चेहरे भी इस कारोबार को लेकर चर्चा में थे, पुलिस ने उनके खिलाफ मुकदमा भी लिखा था, एक बार गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन आरोपी होने के बाद भी वह थाने से गायब हो गया था। तब भी पुलिस के कार्यवाही को लेकर खूब चर्चा हुई थी। आला अधिकारियों के स्थानीय पुलिस के खिलाफ बड़ी कार्यवाही के बाद भी जो तस्वीर दिख रही है, उसको देखकर लोग सवाल पर सवाल दाग रहे है। जो भी हो पुलिस जिस भी भूमिका में आये। लेकिन यह कारोबार बंद होना चाहिए। पुलिस को जनता में अपने विश्वास को कायम करना होगा। अन्यथा जनता में कच्ची के कारोबारियों का भय बना रहेगा। कारण यही वे चेहरे है जो पहले पुलिस के सबसे खास थे, उन्ही के इसारे पर क्षेत्र के मामलों का निपटारा हुआ करता था, और जनता निरीह पुलिस को निहारती रहती थी। आज हर व्यक्ति पुलिस के इस अभियान के साथ है, अब देखना यह है कि पुलिस जनता में पुनः अपना विश्वास कायम कर पाती है, यार उसका यह अभियान छलावा ही साबित होता है।

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