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मुख्यमंत्री ने एमपीपीजी मे समावर्तन संस्कार समारोह का किया उद्घाटन

विभिन्न प्रकल्पों सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर में निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र व पुरस्कार वितरित किया

वार्षिक पत्रिका समावर्धन, लोक भाषा संवर्धन, नाथ पंथ का योगदान, आधुनिकता से उत्तर आधुनिकता तथा राणा कालीन नेपाल का इतिहास का विमोचन किया।

गोरखपुर  । प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को महाराणा प्रताप स्नाकोत्तर महाविद्यालय जंगल घूषण में आयोजित समावर्तन संस्कार समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने 4 पुस्तकों वार्षिक पत्रिका समावर्धन, लोक भाषा संवर्धन, नाथ पंथ का योगदान, आधुनिकता से उत्तर आधुनिकता तथा राणा कालीन नेपाल का इतिहास का विमोचन किया। विभिन्न प्रकल्पों जैसे सिलाई कढ़ाई, कंप्यूटर में निशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र/पुरस्कार वितरित किया।
समावर्तन संस्कार समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं के प्रति अपनी शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।  कहाकि व्यक्ति के जीवन में परिश्रम एवं पुरूषार्थ का कोई विकल्प नहीं होता है। महाविद्यालय से जो अच्छे गुण आपने सीखा है उसे अंगीकृत करते हुए अपने जीवन को उन्नत की ओर आगे बढ़ायें। सुख-दुख लाभ हानि की चिन्ता किये बगैर जब व्यक्ति जीवन संघर्ष में आगे बढ़ता है तो उसे निश्चित रूप से सफलता मिलती है। जीवन में सरलता का रास्ता अपनाकर हासिल की जाने वाली सफलता लम्बे समय तक काम नहीं दे पाती है। तत्कालिक सफलता का सुख तो मिलता है लेकिन वह सुख यशस्वी नहीं बना पायेगा। हम सभी को जीवन में परिश्रम एवं पुरूषार्थ को समझना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहाकि शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने की नहीं बल्कि सर्वांगीण विकास का माध्यम बने इस दिशा में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद कार्य कर रहा है। आजादी के बाद से 2017 तक 70 वर्षों में पूर्वी उप्र की अधिकांश आबादी में वोटिंग का अधिकार नहीं था और वे लोग खानाबदोश की ज़िन्दगी जी रहे थे। यहां के 54 वनटांगियां गांव है जिन्हें कोई शासकीय लाभ नही मिल रहा था। उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने हेतु वन टांगिया गांव को राजस्व गांव का दर्जा भी प्रदेश सरकार द्वारा दिया गया है और उन्हें शासकीय सुविधा मिलनी प्रारम्भ हो गयी है।

ग्रामीण स्वावलम्बन के लिए यह महा विद्यालय गांव एंव शहर का संगम स्थल है, यहां शिक्षा के साथ साथ अन्य प्रशिक्षण एवं रचनात्मक गतिविधियों का केन्द्र स्थापित है। कहाकि शिक्षा कर्तव्यों के साथ संवेदनाओं को जोड़ने की प्रेरणा देती है। मनुष्य में संवेदना का होना आवश्यक है अन्यथा वह पशु के समान होता है। डिग्री केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आत्मनिर्भरता से मजबूत होना चाहिए।
बतौर मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री भारत सरकार जेपी नड्डा ने कहाकि शिक्षा का मूल आधार हमारी संस्कृति होनी चाहिए ताकि राष्ट्र मजबूती से बढ़े, हमें अपने संस्कारों को सर्वदा याद रखना तथा उसका अनुपालन करना चाहिए। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद इस दिशा में निरन्तर कार्य कर रहा है। वर्तमान में इस शिक्षण संस्थान की 42 शाखाएं जिसमें लगभग 25 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे है। सरकार की प्राथमिकता है कि शिक्षा में अमूल परिवर्तन लाना है।
उन्होंने कहाकि केन्द्र व प्रदेश सरकार विकास की ओर निरन्तर अग्रसर है, केन्द्र सरकार के साढ़े चार के कार्यकाल में 22 एम्स बनकर तैयार है और 13 एम्स जिसमें गोरखपुर भी शामिल है खुलने के कगार पर है एंव 13 नये मेडिकल कालेज भी दिये गये है। हम अपने संस्कारों को पहचानते हुए आगे बढ़े ताकि देश मजबूत हो एवं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व कुलपति एवं अध्यक्ष प्रबंध समिति प्रो उदय प्रताप सिंह ने समावर्तन उपदेश एंव संकल्प दिलाया। प्राचार्य डॉ प्रदीप कुमार राव ने अतिथियों का स्वागत आभार एंव प्रस्ताविकी प्रस्तुत किया। संचालन सुबोध कुमार मिश्र द्वारा किया गया। इस मौके पर अभिभावक संघ अध्यक्ष विपिन कुमार यादव तथा पुरातन छात्र परिषद अध्यक्ष दीपेन्द्र प्रताप सिंह एवं अन्य जन उपस्थित रहे।

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