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कब्ज व एसिडिटी से मुक्ति चाहते है तो करें वज्रासन का अभ्यास

वज्रासन का अभ्यास करने के लिए पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए बैठ जाएं। याद रखें कि आपका भार एड़ियों पर हों। इस दौरान दोनों पंजों के अंगूठे को मिलाकर रखें तथा आपकी कमर एकदम सीधी हो। हाथों को जांघों के उपर रखें तथा उस पर किसी प्रकार का दबाव न डालें। योगाभ्यास के लाभ आज के समय में किसी से छिपे नहीं है। हर आसन की अपनी खूबियां व लाभ होते हैं।

लेकिन बहुत से योगाभ्यास ऐसे होते हैं जिसका अभ्यास हर कोई नहीं कर पाता। लेकिन अगर आप एक आसान आसन की मदद से खुद को हेल्दी रखना चाहते हैं वज्रासन का अभ्यास करें। यह एक ऐसा आसन है, जिसका अभ्यास कभी भी किया जा सकता है। यहां तक कि भोजन के बाद भी इसका अभ्यास करना लाभदायी होता है।

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तो चलिए जानते हैं व्रजासन करने का तरीका व इसके लाभों के बारे में. ऐसे करें वज्रासन

वज्रासन का अभ्यास करने के लिए पैरों को घुटनों से मोड़ते हुए बैठ जाएं। याद रखें कि आपका भार एड़ियों पर हों। इस दौरान दोनों पंजों के अंगूठे को मिलाकर रखें तथा आपकी कमर एकदम सीधी हो। हाथों को जांघों के उपर रखें तथा उस पर किसी प्रकार का दबाव न डालें। साथ ही सामने की ओर देखें। अब कुछ देर गहरी लंबी सांस लेते हुए इसी पॉश्चर में रहें। अंत में वापिस आने के लिए दोनों हाथों को नीचे रखें तथा दोनों पैरों को सीधा आगे की ओर खोलें। वैसे तो इस आसन का अभ्यास हर व्यक्ति आसानी से कर सकता है लेकिन अगर किसी को घुटनों में शिकायत रहती है, वह जमीन के स्थान पर तकिए के उपर इसका अभ्यास करें।

वहीं अर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्ति को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए। पाचन तंत्र के लिए लाभदायी वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है, जिसे भोजन करने के तुरंत बाद भी किया जा सकता है। साथ ही इससे पैरों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पाचनतंत्र सुचारू रूप से कार्य करता है। अगर इस आसन का अभ्यास प्रतिदिन किया जाए तो इससे कब्ज, अल्सर, एसिडिटी व अन्य तरह की डाइजेशन संबंधी सभी तरह की समस्याओं को दूर किया जा सकता है।कमर दर्द से राहत चूंकि इस आसन का अभ्यास करते समय कमर को एकदम सीधा रखा जाता है।

इसलिए इसके नियमित अभ्यास से कमर दर्द से भी राहत पाई जा सकती है। महिलाओं के लिए फायदेमंद वज्रासन का अभ्यास महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभदायी है। दरअसल, जो महिलाएं इसका नियमित अभ्यास करती हैं, उन्हें माहवारी के दौरान अपेक्षाकृत काफी कम दर्द होता है। इतना ही नहीं, यह प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करने का काम करता है।

यह आसन श्रोणि की मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करने का काम करता है।   मेडीटेशन इस आसन के अभ्यास से मनुष्य का शरीर ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क भी संतुलित हो जाता है। इसलिए इस आसन में बैठकर प्राणायाम व मेडीटेशन आदि करना काफी छा माना जाता है। (नोट: अपने डाक्टर से सलाह अवश्य लें।)

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