Jan Sandesh Online hindi news website

नील गायों की उत्पात से किसान परेशान, किसानों की हजारों एकड़ फसले बर्बाद

संवाददाता-विवेक चौबे

कांडी(गढ़वा) : प्रखंड क्षेत्र में नील गायों की उत्पात से किसान खूब परेशान हैं।नीलगायों से फसल बचाने के लिए किसान दिन-रात मेहनत करते हैं।जबकि उनका मेहनत बेकार चला जा रहा है।खून पसीने एक करके किसान खेतों में अन्न उगाते हैं,इस विश्वाश के साथ की उनके परिवार का पालन-पोषण हो सके।किसान को मात्र एक आशा है मेहनत से उगाए गए फसल।प्रखण्ड क्षेत्र के कई पंचायत के किसानों को प्रत्येक वर्ष नीलगायों से परेशानियों का सामना करना पड़ता है।फसल बर्बादी को लेकर नौजवान संघर्ष मोर्चा के युवा नेता- छोटन उपाध्याय ने कांडी में स्थित पेट्रोल पंप के समीप ग्रीन लैंड पब्लिक स्कूल के प्रांगण में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।

और पढ़ें
1 of 41

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि इस सत्र में भानु प्रताप शाही के द्वारा विधान सभा में भी आवाज उठाया गया है।वन विभाग के पदाधिकारी द्वारा लगातार लापरवाही बरती जा रही है।विगत 50 वर्षों से नील गायो द्वारा हजारों एकड़ भूमि में लगे फसल को बर्बाद किया जा रहा है।फसल बर्बादी को देखते हुए छोटन उपाध्याय ने जागरूकता के लिए गांव-गांव जाकर लोगों के बीच जनसंपर्क अभियान चलाएंगे।उन्होंने बताया कि आचार संहिता के बाद 23 मई से चरणबद्ध आंदोलन भी किया जाएगा।

आंदोलन छेड़ने का उद्देश्य है नीलगाय से निजात के उपाय प्रशासन द्वारा लाया जाए।या बर्बाद फसल का मुआवजा किसानों को भुगतान किया जाए। सरकार व वन विभाग इन समस्याओं का समाधान शीघ्र करे,वरना जन आंदोलन जोरदार व धारदार होगा।प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि किसानों के हक व हकूक के लिए मैं हर समय तत्पर हूं।किसान खेती कर रहे हैं,परंतु वे अनाज घर पर ला नहीं पा रहे हैं।जंगली पशु हजारों हेक्टेयर में लगे फसल को बर्बाद करके चले जाते हैं।इस पर किसी भी अधिकारी व पदाधिकारी का ध्यान आकृष्ट नहीं हो रहा है।प्रेस कांफ्रेंस में चंद्रेश मिश्रा,लाला पांडेय, सचिन पांडेय,अजय यादव, रीशु रंजन, मुरलीधर पांडेय, सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह jansandeshonline@gmail.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।

Comments are closed.