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अब आपकी रोटी होगी रंग-बिरंगी, बचाएगी इन जानलेवा बीमारियों से !

मोहाली। देश में अब गेहूं केवल भूरे रंग की नहीं होगी। अब आपकी चपाती, केक एवं ब्रेड रंग-बिरंगी होगी। इसके साथ ही यह अधिक पौष्टिक भी होगी। यह संभव होगा रंग-बिरंगे गेहूं से। इस गेहूं का बीज तैयार किया है । पंजाब के मोहाली में मौजूद नैशनल एग्री-फूड बायॉटेक्नॉलॉजी इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने 8 साल की रिसर्च के बाद गेहूं की तीन रंग- पर्पल, ब्लैक और ब्लू- की किस्में तैयार की हैं। इन्हें फूड सेफ्टी ऐंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मानवीय उपभोग के लिए अपनी स्वीकृति दे दी है।

डॉ. मोनिका गर्ग ने बताया कि इस गेहूं में ब्लूबैरी व जामुन जैसे फलों में पाए जाने वाले रंगद्रव्य एंथोसाइनिन भरपूर मात्रा में होंगे। सामान्घ्य गेहूं की तुलना में यह बच्चों से लेकर बड़ों सभी के स्वास्घ्थ्य के लिए बेहद स्वास्थ्यवर्द्धक होगा। इस गेहूं की रोटी से डायबिटीज का खतरा दूर होगा। यह मधुमेह (डायबिटीज) के विकार लोगों के लिए वरदान की तरह होगा।

सबसे खास बात यह है कि इस गेहूं की हर मौसम में खेती हो सकेगी। इस रंगीन गेहूं में प्रोटीन के संग कार्बोहाइड्रेट्स एवं आहार फाइबर का महत्वपूर्ण अनुपात भी होगा। इसका इस्तेमाल सामान्य गेहूं की तरह ही सुगमता से भंडारण व प्रतिदिन उपयोग के लिए किया जा सकता है। अभी यह रंगीन गेहूं न्यूजीलैंड, कनाडा व यूरोप में कई देशों में व्यावसायिक रूप से बेचा जाता है।

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रंगीन गेहूं में कारोबार करने के लिए अभी तक 10 एग्री कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि, रंगीन गेहूं से बने प्रॉडक्ट्स के मार्केट को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। सामान्य गेहूं की तुलना में रंगीन गेहूं की यील्ड भी कम है। इस वजह से इसे अधिक कीमत पर बेचना होगा। सामान्य गेहूं की यील्ड प्रति एकड़ 24 क्विंटल की होती है। रंगीन गेहूं की यील्ड प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल है। इसमें भी ब्लैक वेराइटी की यील्ड 17-18 क्विंटल प्रति एकड़ के साथ सबसे कम है।

डॉ. गर्ग ने पेटेंट फाइल करके अपने आविष्कार को पहले ही सुरक्षित कर लिया है। वह ऐसे बहुत से तरीकों को भी खोज रही है जिससे रंगीन गेहूं हमारे नियमित आहारों में शामिल हो सके। नाबी ने इस गेहूं के बीज की उपलब्घ्धता के लिए पंजाब व हरियाणा आधारित कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। उम्मीद है कि और अधिक समझौता ज्ञापनों से भारत के विभिन्न भागों में रंगीन गेहूं को पहुंचाने में मदद मिलेगी।

नावी के वैज्ञानिकों का दावा है कि एंटीऑक्सिडेंट की प्रचुर मात्रा वाले गेहूं से ह्रदय रोगों, डायबिटीज और मोटापे की आशंका कम हो जाती है। रंगीन गेहूं से बच्चों में कुपोषण की समस्या से भी निपटा जा सकता है। गर्ग ने कहा, श्एंथोक्यानिन एक अच्छा एंटीऑक्सिडेंट है, जो हमें सेहतमंद बनाता है। इससे ह्रदय रोगों और मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है। हमने चूहे पर इसका प्रयोग किया है और यह पाया गया है कि रंगीन गेहूं खाने वालों का वजन बढ़ने की संभावना कम होती है

नाबी कार्यकारी निदेशक डॉ. टीआर शर्मा ने रंगीन गेहूं के विभिन्न लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह बच्चों एवं बड़ों के लिए सफेद गेहूं व आटे के उत्पादों की तुलना में स्वास्थ्यप्रद उत्पाद होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि नाबी का यह उत्पादन कृषकों की आय दोगुनी करने में सहायक सिद्ध होगा। यह राष्ट्रीय पोषण समस्या को समाप्त करने की ओर एक कदम भी साबित होगा।

इसके पेटेंट को लेकर लखनऊ की एक कंपनी से समझौता भी किया गया है। गोल्डन एग्रीजेनेटिक इंडिया लिमिटेड के साथ किए गए समझौते के तहत यह कंपनी किसानों की सहायता से रंगीन गेहूं की खेती करेगी। कंपनी ने निदेशक राहुल सिंह ने आगामी रबी सीजन के दौरान इस विशिष्ट गेहूं की पैदावार और वितरण की अपनी योजनाओं के बारे में बताया।

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