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पश्चिम बंगाल में 700 डॉक्टरों का इस्तीफा, पूरा हेल्थ सिस्टम ठप, आंदोलन तेज

हड़ताल खत्म करने के लिए डॉक्टरों ने रखी 6 शर्तें

19 states Doctors Together 17 announced the pan-India strike

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दो जूनियर डॉक्टरों पर हुए हिंसक हमले के बाद से छिड़ा आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। शुक्रवार को बंगाल के बाहर भी कई राज्यों में डॉक्टरों को समर्थन मिला और दिल्ली, मुंबई समेत तमाम शहरों के बड़े अस्पताल बंद रहे।

हालांकि पश्चिम बंगाल में यह समस्या लगातार बढ़ रही है और पूरा हेल्थ सिस्टम ही चरमराया नजर आ रहा है। एक ही दिन में 700 डॉक्टरों का इस्तीफा देना अप्रत्याशित है। असल में डॉक्टरों का गुस्सा गुरुवार को ममता बनर्जी की ओर से दिए गए उस बयान के चलते भड़का, जिसमें उन्होंने कहा था कि डॉक्टर या तो 4 घंटे में काम पर लौटें या फिर ऐक्शन के लिए तैयार रहें। ममता की धमकी से बेपरवाह जूनियर डॉक्टरों ने अपने आंदोलन को तेज कर दिया और धीरे-धीरे तमाम सीनियर डॉक्टर्स भी उनके समर्थन में आ गए।

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इसके बाद तो इस्तीफों का दौर ही चल पड़ा। आंदोलन को धार देते हुए मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल के 100 डॉक्टरों ने पद छोड़ दिया, जबकि एसएसकेएम के 175 डॉक्टरों ने भी इस्तीफा दे दिया। चितरंजन नैशनल मेडिकल कॉलेज के 16 डॉक्टरों ने पद छोड़ दिया। इसके अलावा हिंसा का शिकार हुए डॉक्टरों के हॉस्पिटल एनआरएस मेडिकल कॉलेज के भी 100 चिकित्सकों ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

स्कूल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन के भी 33 छात्रों ने पद छोड़ दिया। कई विभागों के प्रमुखों ने भी डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के विरोध में पद छोड़ दिया। हिंसा के शिकार साथियों के प्रति समर्थन जताते हुए बंगाल के 700 सरकारी डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। इस मामले से निपटने को लेकर सरकार शुक्रवार को दिशाहीन नजर आई।

उसी दिन एनआरएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कॉलेज ऑफ मेडिसिन ऐंड सागर दत्त हॉस्पिटल के भी 21 सीनियर डॉक्टरों ने अपनी नौकरी छोड़ दी। शुक्रवार को आरजी कर मेडिकल कॉलेज के 107 डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे के साथ एक बार फिर से विरोध को तेज कर दिया। गुरुवार को एसएसकेएम हॉस्पिटल का दौरा करने वाली ममता बनर्जी पूरी तरह शांत रहीं।

इस बीच, ज्यादातर डॉक्टरों ने काम पर वापस लौटने के लिए सीएम ममता बनर्जी की ओर से माफी मांगे जाने की भी शर्त रखी है। यही नहीं, दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की असोसिएशन ने भी ममता सरकार को दो दिन का अल्टिमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि यदि दो दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार ने मांगें स्वीकार नहीं की तो फिर एम्स में भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।

हालांकि शुक्रवार की शाम तक हालात कुछ बदलने लगे और तृणमूल के नेताओं के तेवर खासे नरम हो गए। मंत्री पार्थ चटर्जी और फिरहाद हाकिम ने डॉक्टरों के समर्थन में बयान देते हुए हिंसा की निंदा की। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरों से काम पर वापस लौटने की भी गुहार लगाई।

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