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मोदी सरकार ने बनाई है योजना सरकारी संपत्तियों से धन जुटाने की

नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट भाषण में इस बात का जिक्र करते हुए कहा, ‘देशभर में केंद्रीय मंत्रालयों एवं सरकारी कंपनियों की जमीनों पर बड़े-बड़े पब्लिक इन्फ्रस्ट्रक्चर्स के निर्माण होंगे। जॉइंट डिवेलपमेंट एवं कॉन्सेशन जैसे इनोवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के जरिये पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और अफोर्डेबल हाउजिंग का निर्माण किया जाएगा।’

इन मॉडलों में इस्तेमाल नहीं हो रही जमीनों को अफोर्डेबल हाउजिंग कॉम्प्लेक्स के लिए प्राइवेट डेवलपरों को लीज पर देना और बाकी बची जमीनों को वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए डिवेलप करना है। एक अन्य मॉडल में खाली जमीन के लोकेशन को देखते हुए उन्हें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स सहित अन्य पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के रूप में डिवेलप करना है।

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केंद्र में सत्तासीन मोदी सरकार 2.0 ने सरकारी संपत्तियों से पैसे जुटाने के लिए एक व्यापक सर्वे शुरू किया है। जिन सरकारी संपत्तियों जैसे रिहायशी मकानों, जमीनों और इमारतों का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है, सरकार उसे लीज पर देकर पैसे जुटाने की योजना पर काम कर रही है।

सर्वेक्षण का काम मंत्रिमंडल सचिवालय द्वारा 12 जून को लिखे एक पत्र के साथ ही शुरू हो गया है। इस पत्र में सभी विभागों को उनके पास मौजूद इमारतों (रिहायशी सहित) और जमीनों की अलग-अलग सूची कैबिनेट सचिवालय को भेजने का निर्देश दिया गया है। इकनॉमिक टाइम्स (ईटी) ने भी इस पत्र को देखा है। पत्र के मुताबिक, ‘सभी मंत्रालय/विभाग, पीएसयू तथा स्वायत्तशासी संस्थानों को उनके पास मौजूद जमीनों और इमारतों (रिहायशी सहित) का ब्योरा जुटाना है, जिसका मकसद इस्तेमाल न हो रही संपत्तियों को लीज पर देकर उससे राजस्व जुटाना है।’

संपत्तियों का अलग-अलग ब्योरा देने के लिए तमाम मंत्रालयों को दो प्रोफॉर्मा भेजे गए हैं। इन प्रोफोर्मा में विभागों से उनकी इमारतों की लोकेशन, इमारत रिहायशी है या कार्यालय या मिक्स्ड लैंड यूज, स्क्वायर मीटर में बिल्टअप एरिया, फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर), इमारत का पूरा इस्तेमाल हो रहा है या नहीं और अगर नहीं तो बचे हुए हिस्से का पूरा विवरण देना है।

सूत्रों का कहना है कि सर्वेक्षण का उद्देश्य सरकारी इमारतों और जमीनों का सही ढंग से इस्तेमाल हो और जिन हिस्सों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उनसे राजस्व जुटाना सुनिश्चित करना है। अगर सरकारी जमीनों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है तो सरकार विभिन्न मॉडलों के जरिये इससे राजस्व जुटाने की योजना बना रही है।

 

 

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