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UP में है योगी की ‘सख्त सरकार’, यहां नहीं चलेगा तबादलों पर ‘भ्रष्टाचार’

लखनऊ । बीते दिनों हुए तबादलों को मुख्यमंत्री योगी ने रद्द कर दिए थे। इसके अलावा योगी ने कई मंत्रियों के विभाग में फेरबदल के इतर अन्य कार्यों की भी स्क्रूटनी शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश में इन दिनों तबादलों का खेल धड़ल्ले से चल रहा था, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी निगाह टेढ़ी कर रखी है।

तबादलों की अनियमितता का भांडा फूटा

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विभागीय सूत्रों के मुताबिक, तबादलों को धंधा बनाने वालों की निगरानी भी मुख्यमंत्री कार्यालय कर रहा है। तबादलों की अनियमितता का भांडा गोरखपुर में फूटा, जहां पर बाबूओं का स्थानांतरण पश्चिमी जिलों में कर दिया गया था। इन लोगों ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री से गोरखपुर में इस बात की शिकायत भी की थी। ऐसी शिकायतें बड़े पैमाने पर मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय सक्रिय हुआ तो पता चला कि ऐसे कई विभाग हैं, जिनमें इस तरह की अनियमितता बरती गई है। शायद इसी कारण शुक्रवार को प्रयागराज में वृक्षकुंभ के आयोजन में स्टांप रजिस्ट्रेशन मंत्री नंद गोपाल नंदी और स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ नजर नहीं आए। यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। अपने ही शहर में, मुख्यमंत्री योगी की मौजूदगी में होने वाले आयोजन से दोनों कैबिनेट मंत्रियों के गायब रहने पर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

 300 से अधिक तबादले निरस्त

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के विभाग में भी तबादलों पर शिकंजा कसा गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुरुवार को स्टांप और पंजीयन विभाग के 300 से अधिक तबादले निरस्त कर दिए गए थे। समूह ख और ग के जो तबादले आईजी (स्टांप) के स्तर से किए जाते हैं, वे भी शासन स्तर और विभागीय मंत्री नंद गोपाल नंदी की सहमति से किए गए थे। इसके बाद भी बड़े पैमाने पर अनियमितता और नियम विरुद्ध तबादलों की शिकायतें थीं। इसे संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने तबादले निरस्त किए।  यहां पहले पैरामेडिकल स्टाफ के बड़े पैमाने पर किए गए तबादले निरस्त किए गए थे। बाद में सीएमओ और सीएमएस स्तर के अधिकारियों का तबादला रोका गया था। धर्मपाल सिंह के सिंचाई विभाग में एई और दूसरे इंजीनियरों के भारी-भरकम तबादलों को भी भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने रोक दिया था।

कर्मचारियों की शिकायत

बेसिक शिक्षा विभाग में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के तबादलों को भी मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर रोक दिया गया था। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि कुछ मंत्री तबादलों के चक्कर में सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं। ऐसे में अब मुख्यमंत्री हर विभाग के तबादले से लेकर हर छोटे-बड़े कार्यों में अपनी बराबर दखल रखेंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की शिकायत के बाद मुख्यमंत्री की ओर से कराई गई जांच में बहुत सारे तथ्य सामने आए हैं। शिकायतों की पड़ताल से पता चला है कि सरकार द्वारा तय सीमा के बाद बहुत सारे तबादले हुए हैं। सरकार ने तबादलों के लिए 30 जून का समय निर्धारित किया था, लेकिन अधिकांश तबादले 2 से लेकर 10 जुलाई के बीच में किए गए। इस पर मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेना चाहिए था, जो नहीं लिया गया। उन्हें सीधे शासन स्तर से आदेश जारी करा दिया गया।

योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति

इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने कहा,‘भ्रष्टाचार के मुद्दे पर योगी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। भ्रष्टाचार का कहीं कोई मुद्दा आएगा तो सरकार उस पर कठोर कार्रवाई करेगी। कहीं भी कोई गड़बड़ी मिलेगी तो कार्रवाई होगी। सरकार इस मुद्दे पर किसी को छोड़ने वाली नहीं है। तबादला आज यूपी में उद्योग की तरह नहीं विकसित हो पर रहा है, क्योंकि यहां पर योगी और बीजेपी की सख्त सरकार है।’

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