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मोदी उवाच

अनिल अनूप

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35-ए की समाप्ति के बाद की स्थिति को और स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इन धाराओं ने इस राज्य को अलगाववाद, आतंकवाद, परिवारवाद और व्यवस्था में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के अलावा कुछ नहीं दिया। उन्होंने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त किये जाने को ऐतिहासिक बताया। राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में दो अनुच्छेदों का देश के खिलाफ कुछ लोगों की भावनाएं भड़काने  के लिए,

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पाकिस्तान द्वारा एक शस्त्र की तरह इस्तेमानल किया जाता था। इसके कारण तीन दशक में राज्य मं 42 हजार निर्दोष लोग मारे गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में कोई भी सरकार हो, वह संसद में कानून बनाकर, देश की भलाई के लिए काम करती है, लेकिन कोई कल्पना नहीं कर सकता कि संसद इतनी बड़ी संख्या में कानून बनाए और वे देश के एक हिस्से में लागू ही न हों। उन्होंने कहा कि जो सपना सरदार पटेल का था, बाबा साहेब अंबेडकर का था, डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी का था, अटल जी और करोड़ों देशभक्त का था, वो अब पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि सामाजिक जीवन में कुछ बातें समय के साथ इतनी घुल-मिल जाती हैं कि कई बार उन चीजों को स्थायी मान लिया जाता है। ये भाव आ जाता है कि कुछ बदलेगा नहीं, ऐसे ही चलेगा।

मोदी ने कहा कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्रीय और राज्य सरकारों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे स्थानीय नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। केन्द्र की सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।  प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो जाएंगे और उनकी परेशानी भी कम होती जाएगी। उन्होंने कहा, ‘ हम सभी यही चाहते हैं कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर विधानसभा के चुनाव हों, नयी सरकार बने, मुख्यमंत्री बने। मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों को भरोसा देता हूं कि आपको बहुत ईमानदारी के साथ, पूरे पारदर्शी वातावरण में अपने प्रतिनिधि चुनने का अवसर मिलेगा।

मोदी ने कहा कि हालात सुधरने के बाद जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य बताया जाएगा, जबकि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश बना रहेगा। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने जानबूझ कर कुछ समय के लिए जम्मू-कश्मीर का प्रशासन अपने हाथ में लिया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही जम्मू-कश्मीर में चुनाव भी होंगे। नयी व्यवस्था में केंद्र की ये प्रथमिकता रहेगी कि राज्य के कर्मचारियों को, जम्मू-कश्मीर पुलिस को दूसरे केंद्र शासित प्रदेश के कर्मचारियों और वहां की पुलिस के बराबर सुविधाएं मिलें।

सरकार द्वारा उठाए उपरोक्त कदम को लेकर सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के साथ वामपंथी तथा कुछ अन्य दल विरोध कर रहे हैं, जबकि कुछ दल ऐसे भी हैं जो एनडीए के साथ नहीं लेकिन सरकार के उपरोक्त कदम का संसद में भी और सड़क पर समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डा. कर्ण सिंह जो सदर-ए-रियासत भी रहे हैं, ने एक ब्यान जारी कर रहा है कि ”निजी तौर पर मैं इस घटनाक्रम की पूरी तरह निंदा किए जाने से सहमत नहीं हूं। इसमें कई सकारात्मक बिंदु हैं। लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय स्वागतयोग्य हैं। सदर-ए-रियासत रहते हुए मैंने 1965 में इसका सुझाव दिया था।

अनुच्छेद 35-ए में स्त्री-पुरुष का भेदभाव था, उसे दूर किए जाने की जरूरत थी। पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थियों को मताधिकार मिलना और अनुसूचित जाति को आरक्षण की पुरानी मांग का पूरा होना स्वागतयोग्य है। जहां तक कश्मीर की बात है तो वहां के लोग इस निर्णय से अपमानित महसूस कर रहे होंगे। मेरा मानना है कि इस संदर्भ में राजनीतिक संवाद जारी रहना जरूरी है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 व 35-ए की समाप्ति को लेकर जो कुछ कहा है उससे स्थिति स्पष्ट हो जाती है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में जम्मू-कश्मीर के वासियों को जो कहा व जो आश्वासन दिया है उसको देखते व मोदी पर भरोसा करते हुए प्रदेश के उज्जवल भविष्य के लिए जम्मू-कश्मीर वासियों को सरकार के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए। इसी में प्रदेश और देश का हित है।

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