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अनुच्छेद 370, जिसकी हत्या भारत में हुई

अनिल अनूप

दिल्ली की सड़कों पर उस दिन एक जनाजा जा रहा था। उस जनाजे को भाजपा के कुछ नेता ढो रहे थे, तो कांग्रेस सहित कई अन्य विपक्षी दलों के नेता उसके पीछे चल रहे थे। मुझसे रहा नहीं गया, तो मैंने आगे बढ़कर पूछा कि आखिर किसकी मौत हो गई। उनमें से एक विपक्षी दल के नेता ने कहा कि अनुच्छेद 370 की मौत हो गई है। मैंने सोचा आदमी की तो मौत होती है, लेकिन अनुच्छेद 370 की मौत कैसे हो सकती है। उसने कहा वह ठीक-ठाक था, लेकिन आज उसे हार्ट अटैक हो गया। तब मैंने कहा कि इसकी मौत से आप क्यों दुखी हैं, जबकि इस अनुच्छेद की वजह से न जाने कितने भारतीय जवानों को अब तक शहीद होना पड़ा है।

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अगर इसकी मौत हो गई, तो खुश होने जरूरत है, न कि दुखी होने की। उसने कहा दुखी कैसे न होऊं। इस अनुच्छेद की वजह से हमारी रोजी-रोटी चलती थी। अब इसकी मौत के कारण हमारी रोजी-रोटी भी तो छिन गई। मैंने कहा अगर इससे आप लोगों को इतना प्रेम था, तो आपने इसका बीमा क्यों नहीं करा रखा था। उसने कहा कि बीमा कंपनियां किसी अनुच्छेद का बीमा नहीं करती हैं। अगर करतीं, तो जरूर करा लेता। मैंने कहा वैसे यह बतलाइए कि इसकी उम्र कितनी थी। उसने कहा यह अनुच्छेद 1951 में पैदा हुआ था। 68 सालों तक जीवित रहा। जनाजा आगे बढ़ा, तो देखा कि जम्मू की सीमा आ गई थी। वहां शहर में कर्फ्यू का माहौल था। मैंने सोचा जब भी किसी बड़े आदमी की मौत होती है, तो शहर में कर्फ्यू लगा दिया जाता है। जनाजा आगे बढ़ता जा रहा था।

मैंने एक-दूसरे नेता से पूछा कि आखिर इस जनाजे का क्या करेंगे। उसने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ले जाकर झेलम नदी में डाल देंगे, ताकि यह बहता हुआ पड़ोसी देश पाकिस्तान में पहुंच जाए। मैंने कहा इस अनुच्छेद की मौत से पाकिस्तान में पहले से ही बहुत गुस्सा है। अगर इसका जनाजा वहां पहुंचेगा, तो वहां के नेताओं का गुस्सा और भड़केगा। उसने कहा पाकिस्तान के नेताओं से हमें क्या लेना-देना है। निकट के एक घर से रेडियो पर एक गीत बज रहा था ‘छोड़ बाबुल का घर आज पिया के नगर मुझे जाना पड़ा।’

मैं समझ गया कि अनुच्छेद 370 अब पिया के घर पहुंच गया है। वहां जाकर नेताओं ने झेलम में उसे बहा दिया। दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से झेलम के तट पर इमरान खान सहित कई पाकिस्तानी नेता खड़े थे और लाउडस्पीकर से आवाज आ रही थी ‘ले जाएंगे, ले जाएंगे, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे।’ मैंने सोचा अब यह जनाजा पाकिस्तानी नेताओं के लिए दिलवाले दुल्हनिया हो गया है। वे इसे ले जाएंगे और अपने संग्रहालय में रख लेंगे तथा दुनिया के देशों को दिखाएंगे कि यह देखो अनुच्छेद 370, जिसकी हत्या भारत में हुई थी। अब यह मेरे पास है।

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