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बिहार BJP अध्यक्ष को लेकर चौंकाने वाला नाम आ सकता है सामने

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय के केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री बनने के साथ ही इस पद के लिए नए नाम पर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। अब दो दिन पहले ही राय को दिल्ली का चुनाव सह प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर आलाकमान जल्द निर्णय ले।

बिहार भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने की कवायद तेज हो गई है। इस पद के लिए नाम के चयन में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तमाम समीकरणों का ध्यान रखा जा रहा है। वैसे तो कई नाम चर्चा में हैं और उनके लिए अलग-अलग तर्क दिए जा रहे हैं। मगर पूर्व के अनुभवों के बरअक्स देखें तो ऐन मौके पर प्रदेश अध्यक्ष के लिए कोई चौंकाने वाला नाम भी सामने आ सकता है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय के केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री बनने के साथ ही इस पद के लिए नए नाम पर सुगबुगाहट शुरू हो गई थी। अब दो दिन पहले ही राय को दिल्ली का चुनाव सह प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर आलाकमान जल्द निर्णय ले। भाजपा सूत्रों के मुताबिक दो माह पहले दिल्ली जो सूची भेजी गई थी, उसमें डेढ़ दर्जन से अधिक नाम थे। मगर अब यह सूची महज छह-सात नामों तक सिमट गई है।

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फिल्टर हुई सूची में फारवर्ड और बैकवर्ड, दोनों समाज के नेताओं के नाम हैं। फारवर्ड अध्यक्ष के पक्ष में तर्क है कि अभी बिहार में पिछड़ा-अति पिछड़ा नेताओं में पहले से कई बड़े चेहरे हैं। इनमें सुशील कुमार मोदी, नित्यानंद राय, नन्द किशोर यादव और प्रेम कुमार हैं। लिहाजा पार्टी किसी सवर्ण नाम पर दांव खेल सकती है।

इनमें अलग-अलग सवर्ण समाज से आने वाले देवेश कुमार, राजेन्द्र सिंह और मिथिलेश तिवारी के नाम चर्चा में हैं। सिंह अभी प्रदेश महामंत्री, कुमार मुख्यालय प्रभारी, जबकि तिवारी विधायक सह उपाध्यक्ष हैं। वहीं, झारखंड के चुनाव प्रभारी रहे मंगल पांडेय की जगह ओम प्रकाश माथुर को प्रभारी और नंद किशोर यादव को सह प्रभारी बनाया गया है। ऐसे में अचानक यह सवाल उठ रहा है कि क्या पांडेय को फिर बड़ी जिम्मेदारी देने के लिए झारखंड से मुक्त किया गया है।

इसी तरह पिछड़े वर्ग से बेतिया सांसद संजय जायसवाल, रामकृपाल यादव, पूर्व विधान पार्षद सह उपाध्यक्ष राजेन्द्र गुप्ता और विधायक संजीव चौरसिया के नाम पार्टी की फिजां में तैर रहे हैं। जायसवाल अभी प्रदेश उपाध्यक्ष के साथ ही संसद में भाजपा के मुख्य सचेतक भी हैं। यादव पूर्व केन्द्रीय मंत्री रह चुके हैं, जबकि संजीव और गुप्ता संघ से भी गहरे जुड़े रहे हैं।

गत लोकसभा चुनाव में एनडीए का शानदार प्रदर्शन रहा था। इसके प्रमुख रणनीतिकारों में बिहार प्रभारी भूपेन्द्र यादव भी थे। अब भाजपा नेतृत्व लोस की कामयाबी विधानसभा चुनाव में दुहराने को लेकर रणनीति बनाने में जुट गया है। विस चुनाव के हालात लोस से अलग होते हैं। इसके लिए सामाजिक समीकरणों से लेकर हर तरह के उपायों पर मंथन चल रहा है। जानकारी के मुताबिक भूपेन्द्र यादव सभी से नए अध्यक्ष के नाम पर फीडबैक ले रहे हैं। किसी ऐसे नाम पर निर्णय की अधिक उम्मीद है, जिस पर सबकी सहमति बनती हो। वैसे अंतिम निर्णय आलाकमान पर निर्भर है।

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