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पाकिस्तान को मात देकर वसीम ने भारत को फाइनल में पहुंचाया

भारत सरकार की ओर से जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले के बाद से घाटी के अन्य हिस्सों की तरह गोपालपुरा से भी संचार संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है.वसीम को वर्ल्ड सीरीज के दौरान अपने घरवालों से बात नहीं हो पाने की वजह से उनकी फिक्र लगी रही. वसीम ने फोन पर आजतक/इंडिया टुडे को बताया, ‘बीते कुछ दिनों से मैं ना तो अपने परिवार और ना ही और रिश्तेदारों से संपर्क कर पाया. घर पर ईद का मतलब नए कपड़ों, मिठाई और जश्न से होता है.

भारत की फिजिकली चैलेन्ज्ड दिव्यांग क्रिकेट टीम ने सोमवार को इंग्लैंड में टी20 वर्ल्ड सीरीज़ के सेमीफाइनल में पाकिस्तान को मात देकर फाइनल में जगह बनाई. भारतीय टीम के 25 वर्षीय ओपनर वसीम ख़ान के चेहरे पर इस जीत से चमक आई. अभी तक वसीम इस बार ईद की खुशियां अपने घर वालों के साथ ना बांट पाने की वजह से खुद को बुझा हुआ महसूस कर रहा था.वसीम कश्मीर घाटी के अनंतनाग ज़िले के गोपालपुरा गांव का रहने वाला है. भारत सरकार की ओर से जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले के बाद से घाटी के अन्य हिस्सों की तरह गोपालपुरा से भी संचार संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है.वसीम को वर्ल्ड सीरीज के दौरान अपने घरवालों से बात नहीं हो पाने की वजह से उनकी फिक्र लगी रही. वसीम ने फोन पर आजतक/इंडिया टुडे को बताया, ‘बीते कुछ दिनों से मैं ना तो अपने परिवार और ना ही और रिश्तेदारों से संपर्क कर पाया. घर पर ईद का मतलब नए कपड़ों, मिठाई और जश्न से होता है. घर से यहां मीलों दूर बैठ कर मेरी ख्वाहिश यही थी कि कम से कम ईद पर मैं उन से बात कर पाता.’वसीम के मुताबिक गोपालपुरा हालांकि संवेदनशील क्षेत्र में नहीं आता लेकिन वहां से चुप्पी ने उन्हें चिंतित कर रखा है. वसीम ने कहा, ‘किसी भी उत्साही क्रिकेटर के नाते मैंने अपना फोकस क्रिकेट पर ही केंद्रित रखने की कोशिश की. लेकिन अपने घरवालों से पूरी तरह संपर्क टूटे रहने का तनाव सहन करना आसान नहीं होता. मेरे घर पर माता-पिता, भाई और बहन हैं. इस ईद पर खुशी जैसा कुछ नहीं था.’

वसीम ने बचपन में ही अपना दाहिना पैर एक हादसे में खो दिया था. क्रिकेट के शौक ने वसीम में उत्साह भरने का काम किया. महेंद्र सिंह धोनी के फैन वसीम ने शारीरिक चुनौती के बावजूद पावर हिटर के तौर पर अपनी पहचान बनाई.रेगुलर क्रिकेट में लंबे छक्के जड़ने के लिए जाने जाने वाले वसीम ने कहा, “मैंने काफी देर से दिव्यांग क्रिकेट खेलना शुरू किया. क्रिकेट हमेशा मेरे लिए एक जुनून रहा है. मैं सामान्य क्रिकेट खेलने का काफी अभ्यस्त हूं. जहां काफी दम लगाना पड़ता है. यहां मेरे लिए मैदान थोड़ा आसान हो जाता है.”वसीम ने सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 6 छक्कों की बदौलत 43 गेंदों पर 69 रन की तूफानी पारी खेली. मेगा फाइनल में भी वसीम को अपने इस प्रदर्शन को दोहराने की उम्मीद है. वसीम के मुताबिक उसे नहीं पता कि उसके घरवालों को उसके प्रदर्शन के बारे में पता भी चला या नहीं. संघर्ष के लंबे दौर से जूझने के बाद वसीम इस मुकाम तक पहुंचा है.वसीम अब फाइनल के बाद जल्द से जल्द घर पहुंचना चाहता है जिससे कि वो अपनी उपलब्धि की खुशी अपने घरवालों और करीबियों के साथ बांट सकें.

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