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श्रावणी उपाकर्म और ऋषि पूजन गोरखनाथ के भीम सरोवर पर, जानिए क्‍यों होता है ये अनुष्‍ठान

भारतीय विद्वतसमिति और श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में हर साल की तरह इस बार भी गोरखनाथ मंदिर स्थित भीम सरोवर पर श्रावणी उपाकर्म ऋषि पूजन और संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया।

भारतीय विद्वतसमिति के महामंत्री डॉ.जोखन पांडेय के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा पर एक ओर जहां रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है वहीं दूसरी ओर इस दिन श्रावणी उपाकर्म भी किया जाता है। श्रावणी उपाकर्म संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है।
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श्रावणी उपाकर्म वैदिक ब्राह्मणों को वर्ष भर में आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करता है। वैदिक परंपरा अनुसार वेदपाठी ब्राह्मणों के लिए श्रावण मास की पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार है। इस दिन यजमानों के लिए कर्मकांड यज्ञ, हवन आदि करने की जगह खुद अपनी आत्मशुद्धि के लिए अभिषेक और हवन किए जाते हैं।

जनेऊ के धागों में होता है सप्‍तऋषि का वास
इस दिन सुबह दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होने के बाद स्नान करते हैं। फिर कोरे जनेऊ की पूजा करते हैं। जनेऊ की गांठ में ब्रह्म स्थित होते हैं। उनके धागों में सप्तऋषि का वास माना जाता है। ब्रह्म और सप्तऋषि पूजन के बाद नदी या सरोवर में खड़े होकर ब्रह्मकर्म श्रावणी संपन्न होती है। पूजा के बाद उसमें शामिल जनेऊ में से एक जनेऊ पहन लेते हैं और बाकी के जनेऊ रख लेते हैं। पूरे वर्षभर जब भी जनेऊ बदलने की आवश्यकता होती है तो श्रावणी उपाकर्म के पूजन वाले जनेऊ को ही पहनते हैं।

 

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