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आपदा: हर तरफ तबाही का मंजर …

‘शनिवार रात से ही तेज बारिश हो रही थी, नदी उफान पर तो थी। रविवार सुबह आठ बजे तक आपदा जैसी कोई बात नहीं थी। सब कुछ सामान्य था, लेकिन 9 बजे के करीब ऐसा धमाका हुआ जैसे बम फटा हो और पीछे से बड़े-बड़े पत्थरों एवं मलबे के साथ आया सैलाब सब कुछ बहाकर ले गया। गांव में कुछ नहीं बचा, परिवार और गांव के कई सदस्य, घर का सामान, कपड़े, मवेशी सब कुछ कुदरत के कहर में समा गया। हम जैसे तैसे बच पाए, लेकिन उसके बाद जब होश आया तो सामने था सिर्फ तबाही का मंजर…।’ दून अस्पताल में भर्ती उत्तरकाशी के आराकोट के सोहनलाल, राधा देवी की आंखें ये हाल बताते हुए भर आईं। उनको अपनों की चिंता सता रही है। जौनपुर में रहने वाले कुंवर राणा और उनकी पत्नी प्रमिला ने उनको ढांढस बंधाया।

दस माह का पोता छिटककर सैलाब में समा गया 
देहरादून। आराकोट के सोहनलाल पुत्र राथू 48 ने रुंधे गले से बताया कि सुबह के समय अपनी पत्नी वंदना, सेब की फसल में लगे बेटे रोहित की पत्नी अंजना और दस माह के पोते तुषित के साथ घर में थे। पोते को गोद में लिये वह नदी में आए उफान, तेज बारिश और आपदा का ही जिक्र कर रहे थे कि इसी बीच पानी का सैलाब आ गया। दस माह का पोता छिटककर पानी में समा गया। अन्य सदस्य भी पानी के तेज बहाव में बहने लगे। लेकिन गमीनत रही कि वह कुछ दूरी पर जाकर पत्थरों में फंसकर रह गये। शाम तक गांव खोजबीन के बाद कई अन्य शवों के साथ बच्चे का शव मिला तो कोहराम मच गया। गांव के कई परिवारों के सदस्य भी इसी तरह मलबे के साथ आए सैलाब में बह गये थे, हर और चीख-पुकार मची थी। तबाही का मंजर रूपी मलबा चारों और फैला था।

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पानी और बोल्डर के सैलाब में बही गाड़ियां
देहरादून। हम चकराता से आराकोट से करीब 9 किमी ऊपर तिकुची में अपनी गाड़ी से सेब लेने गये थे। करीब 27 गाड़ियां रात में रोड पर लगाई गई थीं, सुबह काश्तकार का फोन आने पर सेब लेने बगीचे में जाना था। इसीलिए सुबह के इंतजार में सब सो गये। सुबह छह बजे अचानक बड़े-बड़े पत्थर गाड़ियों से बड़े वाहनों से टकराए और तेज बहाव के साथ पानी आया और सब कुछ बहा ले गया। गाड़ियां कई फुट तक ऊपर उछलीं। दून अस्पताल में भर्ती कराये गये चकराता के लोखंडी निवासी राजेंद्र सिंह और उनके चाचा जालम सिंह ने आपदा का दर्द कुछ ऐसे बयां किया। उन्होंने बताया कि उनके सामने ही दर्जनों गाड़ियां और करीब 15 लोग तेज पानी में बह गये। शाम को उन्हें किसी तरह आराकोट लगाया गया।

चाचा को लोहे की रॉड से स्टेयरिंग काटकर निकाला 
राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनके चाचा जालम सिंह गाड़ी के स्टेयरिंग में बुरी तरह फंस गये थे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों की मदद से रोड से स्टेयरिंग काटकर निकाला गया। ऐसे ही कई अन्य गाड़ियों में फंसे लोगों को बामुश्किल निकालकर बचाया गया।

विकासनगर के तीन युवक आपदा में लापता
उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक के गांवों में आपदा के बाद से विकासनगर के टिमली गांव के दो सगे भाइयों सहित तीन लोग लापता है। तीनों सेब की सप्लाई करने अपने लोडर के साथ वहां गये थे। लेकिन आपदा की रात को टिकोली गांव के पास सड़क किनारे लोडर खड़ाकर वहीं सो गये थे। लेकिन सुबह को तीनों का वाहन सहित कोई पता नहीं चल पाया। परिजन उत्तरकाशी जिला प्रशासन से भी संपर्क किये हुए हैं। लेकिन तीनों का पता नहीं चल पाया है। परिजनों ने जिला और तहसील प्रशासन से तीनों के बारे में पता लगाने की मांग की है। उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र में इस बार सेब की बंपर पैदावार हुई है। जिसके चलते हर वर्ष की भांति इस बार भी विकासनगर के टिमली गांव के शहजाद और उसका भाई सलीम दोनों पुत्र शरीफ एवं चचेरा भाई  मौसीन अपना लोडर लेकर सेब ढुलान करने उत्तरकाशी के टिकोची क्षेत्र में शनिवार को गये थे। जहां रविवार से उन्हे सेब का ढुलान करना था। शनिवार रात को तीनों ने खाना खाने के बाद टिकोची गांव की सड़क के किनारे लोडर को खड़ा कर वहीं लोडर में सो गये। देर रात को आई आपदा के दौरान तीनों वहां से लापता हो गये हैं। तीनों का कोई पता नहीं चल पा रहा है। नहीं उनके वाहन का ही पता चल पाया है। परिजन आपदा के बाद से लगातार तीनों के फोन पर संपर्क कर रहे हैं। लेकिन परिजनों का संपर्क नहीं हो पाया है। परिजनों ने तीनों का पता लगाने के लिए उत्तरकाशी जिला प्रशासन से लगातार संपर्क बनाया हुआ है। देहरादून जिला प्रशासन और विकासनगर तहसील प्रशासन से भी परिजनों ने तीनों का पता लगाने की मांग की है। एसडीएम विकासनगर कौस्तुभ मिश्र ने बताया कि लगातार उत्तरकाशी और रेस्क्यू टीम से संपर्क बनाकर पता लगाया जा रहा है। उधर परिजन तीनों को खोजने के लिए उत्तरकाशी आपदा क्षेत्र के लिए रवाना हुए। लेकिन रास्ते बंद होने के कारण वे आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। बीच रास्ते में ही फंसे हैं।

एसडीआरएफ-मेडिकल टीमें मुस्तैद 
उत्तरकाशी के आराकोट में आयी आपदा के बाद सोमवार की सुबह सहस्रधारा हैलीपैड पर भी एसडीआरएफ और मेडिकल टीम मुस्तैद दिखी। हेलीपैड से तीन शिफ्ट में आपदा प्रभावित क्षेत्रों को राहत सामग्री और दवाइयां भेजी गईं। आराकोट में आपदा के बाद सोमवार की सुबह सहस्रधारा हेलीपैड पर भी एसडीआरएफ और मेडिकल टीमें सुबह ही मुस्तैद हो गई थी। आपदा प्रभावित आराकोट क्षेत्र के लिए सोमवार को सहस्रधारा हेलीपैड से सुबह 7.10 बजे एसडीआरएफ के दो जवान संचार सेवा की बहाली के लिए रवाना हुए। एसडीआरएफ संजय गुंज्याल और सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी आपदाग्रस्त क्षेत्र के निरीक्षण के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर से रवाना हुए। इसके बाद सुबह 8.30 बजे आराकोट से दो घायलों को लेकर हैलीकॉप्टर लौटा। एसडीआरएफ के जवानों ने घायलों को एंबुलेंस तक पहुंचाया और अस्पताल के लिए भेजा। सुबह 9.15 बजे प्राइवेट हेलीकॉप्टर दवाई, पानी, खाद्य पैकेज आदि लेकर रवाना हुआ।

लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया 
आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर लौटे आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ की टीमें पहुंच गई हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रभावित क्षेत्र में दवाई, पानी, खाने की सामग्री भी भेजी गई है। इसके बाद सुबह 11.47 बजे कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत और सुबोध उनियाल तीन अन्य लोगों को लेकर आपदा प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने के लिए सरकारी हेलीकॉप्टर से रवाना हुए। दोपहर 1.43 बजे कंबल, दवाइयां और एसडीआरएफ के दो जवानों को लेकर हैलीकॉप्टर आराकोट के लिए रवाना हुआ।

 

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