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राज्य कर्मचारियों के 6 भत्ते किए यूपी शासन ने खत्म

लखनऊ
उत्तर प्रदेश शासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जा रहे 6 भत्तों को अनुपयोगी मानते हुए उन्हें खत्म कर दिया है। इसमें द्विभाषी प्रोत्साहन भत्ता, कंप्यूटर संचालन प्रोत्साहन भत्ता, स्नातकोत्तर भत्ता, कैश हैंडलिंग भत्ता, परियोजना भत्ता और स्वैच्छिक परिवार कल्याण प्रोत्साहन भत्ता शामिल है। वेतन समिति ने इनको अनुपयोगी बताया था। अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल ने इसका आदेश जारी कर दिया है।

सातवां वेतनमान लागू होने के बाद न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये पहुंच गया है। इसलिए वेतन समिति ने कई भत्तों को खत्म करने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार भत्तों को 237 से कम करके 60 के आसपास ला चुकी है। उस कड़ी में यूपी सरकार ने भी कदम उठाया है।

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…इसलिए मिलते थे भत्ते
सचिवालय आदि में काम करने वाले बाबुओं, निजी सचिव, पीएस आदि को 100 से 300 रुपये ट्रांसलेशन भत्ता मिलता था। समिति ने कहा कि इन पदों के लिए यह अनिवार्य योग्यता है, इसलिए अलग से भुगतान की कोई जरूरत नहीं है। परिवार नियोजन सहित परिवार कल्याण के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए मिलने वाले भत्ते को भी जरूरी नहीं माना गया। केंद्र ने भी इसे खत्म कर दिया है। सिंचाई विभाग की परियोजनाओं में काम करने वाल कर्मियों को एचआरए के एवज में इसे दिया जाता था। अब हर शहर के लिए एचआरए तय कर दिया है, इसलिए इसका औचित्य नहीं था। अकाउंटेंट, कैशियर व नकदी से जुड़े काम से जुड़े कर्मचारियों को कैश हैंडलिंग भत्ता दिया जाता था। समिति का कहना था कि कैश की जगह अब ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की व्यवस्था लागू की जा रही है, इसलिए अब इसकी जरूरत नहीं है।

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