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पुलिस के कड़े पहरे के बीच डीएम ने निकलवाया चर्चित मिश्रौली का श्रीकृष्ण डोल मेला

पडरौना,कुशीनगर : जनपद में कड़ी सुरक्षा के बीच पडरौना कोतवाली क्षेत्र के मिश्रौली का डोल मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। मेले में आए डोल और झांकियों की वापसी के साथ ही प्रशासन ने भी चैन की सांस ली। मिश्रौली के टोला विश्राम पट्टी,सनेरामल छपरा,सोहरौना, बाजार टोला,आधार छपरा, बहादुरगंज,कोइरिया टोला,सहुआडीह,चंदरपुर,सुसवलिया, सिरसिया,पटेरा मंगलपुर,बरकंटी, अब्दुलचक,सौनहा आदि दर्जन भर गांवों से जुलूस की शक्ल में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्तियां सजाकर मिश्रौली आईं। जुलूस में द्रोपदी चीरहरण,श्रीकृष्ण सुदामा भेंट,श्रीराम दरबार आदि की झांकियां सजी थीं। जुलूस में शामिल सैकड़ों लोग एक स्वर से श्रीकृष्ण की जय-जयकार कर रहे थे। लाउडस्पीकर पर गूंजने वाला हरिनाम दूर-दूर तक सुनाई दे रहा था। हालांकि,मिश्रौली बाजार में मेला बमुश्किल दो घंटे ही रहता है लेकिन रामकोला-पडरौना मार्ग तीन घंटे तक जाम रहा। आसपास के गांवों से आए लोग, मेले में खरीदारी भी करते रहे।

 

पुलिस के कड़े पहरे के बीच डीएम ने निकलवाया चर्चित मिश्रौली का श्रीकृष्ण डोल मेला
पुलिस के कड़े पहरे के बीच डीएम ने निकलवाया चर्चित मिश्रौली का श्रीकृष्ण डोल मेला
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बच्चों और युवाओं ने मेले का खूब आनंद उठाया। डीएम,एसपी ने मेले में पहुंच कर पुलिस बलों की चौकसी का जायजा लिया और डोल उठाया । मेले में सुरक्षा व्यवस्था का दारोमदार सीओ सदर नितिश प्रताप सिंह और सीओ खड्डा संभाले थे। हाटा और पडरौना कोतवाल के अलावा एक दर्जन थानों के थानाध्यक्ष अपने मातहतों के साथ मौजूद थे। दो प्लाटून पीएसी,दो क्यूआरटी, महिला थाने की एसओ की अगुवाई में 2 महिला एसएचओ व 19 महिला पुलिसकर्मी तो थी हीं 27 दरोगा,275 कांस्टेबल, ट्रैफिक पुलिस के टीएसआई व उससे जुड़े 5 कांस्टेबल सहित फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस के साथ एसएसबी जवान के आलावा महिला व पुरुष जवानों को भी तैनात की गई थी। एडीएम भी अपने मातहतों के साथ डेरा जमाए रहे। इसके अलावा विशुनपुरा के प्रभारी चिकित्साधिकारी भी अपने कर्मियों के साथ मुस्तैद रहे |
पुलिस के कड़े पहरे के बीच डीएम ने निकलवाया चर्चित मिश्रौली का श्रीकृष्ण डोल मेला
पुलिस के कड़े पहरे के बीच डीएम ने निकलवाया चर्चित मिश्रौली का श्रीकृष्ण डोल मेला
प्रशासन ने ली राहत की सांस
सांप्रदायिक दृष्टिकोण से मिश्रौली डोल मेला प्रशासन के लिए अतिसंवेदनशील माना जाता है। मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन को बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। स्थिति यह है कि जब तक मेला समाप्त नहीं हो जाता तब तक अधिकारियों की सांस अटकी रहती है। डोल मेला शांति पूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारी आसपास के गांवों के मानिंद लोगों से रायमशविरा करते हैं।
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