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ऐसे कहें ‘ना’ बिना किसी का दिल दुखाए

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कहते हैं कि रिश्तों की डोर बहुत नाजुक होती है… यही सोचकर तो हम लोग कई बार अपने करीबियों को मना नहीं कर पाते। उन चीजों के लिए भी नहीं, जिन्हें हम बिल्कुल नहीं करना चाहते या जो हमें नुकसान पहुंचाती हैं। मगर हाल में हुए एक रिसर्च के मुताबिक, हमेशा हां कहना भी सही नहीं होता। इसलिए आइए जानते हैं कि कैसे आप दूसरों को ना कह सकते हैं वह भी बिना उनका दिल दुखाए।

दरअसल जब आप किसी को ना कहते हैं, तो जरूरी नहीं है कि सामने वाला इसका बुरा ही माने। आपकी अपनी चॉइस है ‘ना कहना’ और आप इसके लिए आजाद हैं। कई बार होता है कि हम दूसरों का मन रखने के लिए किसी काम के लिए राजी हो जाते हैं और इसके एवज में हमें अपना कुछ गंवाना होता है। और यह सिर्फ इस वजह से होता है क्योंकि आपने ना कहना सीखा ही नहीं है। लेकिन एक बात का ध्यान रहे कि अच्छी रिलेशनिशप के लिए हमेशा हां नहीं ना कहना भी आना जरूरी है।

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इनविटेशन पर खुशी जताएं
आप भले ही इनविटेशन या काम के लिए मना करने वाले हों, लेकिन सामने वाले को यह दिखाना ना भूलें कि आप उनके इनविटेशन से बेहद खुश हैं। इसको आप अपने एक्सप्रेशन के साथ-साथ बोल कर भी जताना होगा। आप इसे यूं कह सकते हैं ‘मेरा बहुत मन है, पर क्या करूं टाइमिंग अजस्ट नहीं कर पा रहा हूं।’ आप यह भी कह सकते हैं कि ‘अगली बार मिलकर कहीं का प्लान बनाते हैं।’ आप कुछ अपनी तरफ से अल्टरनेटिव प्लान भी दे सकते हैं।

अपने व्यवहार में लाएं शालीनता
कई बार आपका व्यवहार आपके चरित्र का प्रमाण-पत्र बन जाता है। ऐसे में आपको अपने व्यवहार में थोड़े बदलाव की जरूरत होती है। जैसे कि आप किसी को सीधे दो टूक भाषा में मना कर देंगे कि नहीं मैं यह नहीं करुंगा, ऐसे में स्वाभाविक है सामने वाले को बुरा लगेगा ही। ऐसे में आपको थोड़ा सा अपनी बोलचाल और भाषा पर ध्यान देना होगा। आपको सीखना होगा कि अगर सामने वाले को ना भी कहें, तो किस तरह से कहें कि उसे बुरा न लगे। जैसे कि आपसे कोई दोस्त पार्टी के लिए इनवाइट कर रहा है लेकिन आप किसी वजह से नहीं जाना चाहते, तो आप प्यार से बहाना बनाकर मना कर सकते हैं। आप कह सकते हैं, ‘सॉरी, मेरा बहुत मन था आने का पर क्या करूं, काम की वजह से मैं नहीं आ पाऊंगा।’ इसके बावजूद भी अगर सामने वाला बुरा मान जाता है, तो आप इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं।

बच्चों की परवरिश के दौरान ही रखें खयाल
दरअसल हम एक ऐसे समाज का हिस्सा हैं जहां किसी को ना कहने का मतलब है कि आपने उस व्यक्ति का दिल दुखाया है। ऐसे में समाज की नजरों में आप एक निहायती स्वार्थी, असंवेदनशील और बेईमान इनसान हैं। अगर हम ध्यान दें, तो सामने वाले का बिना दिल दुखाए भी मना कर सकते हैं, पर इसका भी एक तरीका होना चाहिए। जरूरी है कि आप अपने बच्चों को ऐसा तरीका बताएं कि बच्चा साफ-साफ मना कर सके।

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