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शहादत को याद करने का दिन

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विमल गुप्ता की रिपोर्ट 

मोहर्रम मातम मनाने और धर्म की रक्षा करने वाले हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करने का दिन है ।मोहर्रम महीने में मुसलमान शोक मनाते हैं। और अपनी हर खुशी का त्याग कर देते हैं ।कब है ।मोहर्रम इस बार मोहर्रम का महीना 1 सितंबर से 28 सितंबर तक है ।लेकिन इस बार दसवां मोहर्रम कुछ खास है मान्यता है। कि इस महीने की 10 तारीख को इमाम हुसैन की शहादत हुई थी ।जिसके चलते इस दिन को रोज ए आशूरा कहते हैं ।मोहर्रम का सबसे अहम दिन माना गया है ।इस दिन जुलूस निकालकर हुसैन की शहादत को याद किया जाता है ।दसवे मोहर्रम पर रोजा रखने की भी परंपरा है ।

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मुहर्रम क्यों मनाया जाता है ,

इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इराक में अजीत नाम का जालिम बादशाह इंसानियत का दुश्मन था। यह जीत खुद को खलीफा मानता था लेकिन अल्लाह पर उसका कोई विश्वास नहीं था ।वह चाहता था कि हजरत इमाम हुसैन उनके खेमे में शामिल हो जाए लेकिन हुसैन को यह मंजूर नहीं था। उन्होंने यजीद के विरुद्ध जंग का ऐलान कर दिया था पैगंबर इस्लाम हजरत मोहम्मद ने नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार और दोस्तों के साथ सहित कर दिया गया था ।जिस महीने हुसैन और उनके परिवार को शहीद किया गया था। वह मोहर्रम का ही महीना माना जाता था ।

विमल गुप्ता की रिपोर्ट उन्नाव

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